May 22, 2017

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सीमाई किसानों को सरकार ने दी राहत, लोगों ने कहा- दुआ करो सब ठीक हो जाए

सीमवर्ती जिलों फिरोजपुर और फाजिल्का के जिन किसानों की फसल तारबंदी के उस पार है, वे अब वहां जाकर अपनी फसल की देखभाल कर सकेंगे।

Author फाजिल्का | October 2, 2016 01:36 am
(Express File Pic)

सीमवर्ती जिलों फिरोजपुर और फाजिल्का के जिन किसानों की फसल तारबंदी के उस पार है, वे अब वहां जाकर अपनी फसल की देखभाल कर सकेंगे। पहले इन किसानों को दो घंटे के लिए वहां जाने की अनुमति दी गई थी लेकिन शाम को इसे बढ़ा कर पहने की तरह पांच घंटे कर दिया गया है। इन दोनों जिलों में किसानों की तारबंदी के उसपार करीब 200 एकड़ जमीन है। सीमा सुरक्षा बल से शनिवार को मंजूरी मिलने से किसानों में खुशी है। जानकारी के मुताबिक, जवान बुलेट प्रूफ जेकेट, हेलमेट और अन्य सामानों के साथ किसानों की सुरक्षा करेंगे। अबोहर सेक्टर के डीआइजी इप्पान सीवी ने बताया कि तारबंदी के पार जमीन वाले किसानों को खेती की देखभाल की मंजूरी दे दी गई है। किसानों की सुरक्षा के मद्देनजर कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है। पाक अधिकृत क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के बाद एहतियात के तौर पर पंजाब के सीमावर्ती गांवों को खाली करा लिया गया है।

इससे उन किसानों को ज्यादा चिंता हुई जिनकी धान की फसल लगभग तैयार है। 15-20 दिनों में फसल की कटाई होनी है। किसानों ने सीमा सुरक्षा बल के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें खेती की देखभाल करने की अनुमति मांगी थी। काफी विचार -विमर्श के बाद उन्हें सुरक्षा के साथ दिन में दो घंटे की अनुमति दे दी गई। फाजिल्का जिले का पक्का चिश्ती पाक सीमा के पास अंतिम गांव है। यहां सीमा सुरक्षा बल की सदकी चौकी है। यहां के किसान जीत सिंह (70) ने कहा ‘गांव 85 फीसद खाली हो चुका है। पंजाब पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए लोगों से वहां से जाने को कहा है। अब सीमा सुरक्षा बल ने उधर जाकर खेतों की देखभाल करने अनुमति दे दी है तो हम अपने गांव में क्यों नहीं रह सकते।’
पक्का चिश्ती के किसान रमेश ने कहा ‘ हमारी दस एकड़ जमीन है, अब हम लोग पैदावार ले सकेंगे। खेती की देखभाल के दौरान जवान हमारे साथ रहेंगे।’

यह तनाव कब तक चलेगा इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

वासन सिंह के परिवार की उधर 25 एकड़ जमीन है। अनुमति से पूरा परिवार खुश है। उन्होंने कहा, फिलहाल फसल कटने और पैदावार का मुद्दा नहीं बल्कि देखभाल का है। कुछ किसानों की राय में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खेती की देखभाल के बाद वे अपने गांव में नहीं बल्कि रिश्तेदारों के पास चले जाया करेंगे। फिरोजपुर जिले के गुरुहरसहाय के कई किसानों की बाड़बंदी के पार जमीन है। मंजूरी मिलने के बाद कई किसान खेतों में गए। विधायक राणा सोढ़ी के बेटे हीरा सोढ़ी ने इसे बेहतर कदम बताया। किसानों ने बताया कि बासमती और अच्छी गुणवत्ता के धान पर अंतिम चरण में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। अनुमति के लिए इसी बात को प्रमुखता से उठाया गया था। .

 

‘दिन भर यहां पर कोई डर नहीं होता। सब कुछ सामान्य है लेकिन रातें बहुत डरावनी लगती हैं।’ यह बात भारत-पाक सीमा से डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की 68 वर्षीय परविंदर कौर ने कही। सरकार के फरमान के बावजूद परविंदर कौर अभी तक गांव में ही रह रही हैं। हालांकि उन्होंने अपने बेटों, बहुओं और बच्चों को गांव से बाहर भेज दिया है।
उन्होंने बताया कि 48 घंटे पहले गांव के गुरुद्वारे से सभी घर खाली करने और ग्रामीणों को यहां से चले जाने की पहली घोषणा की गई थी। इसके बावजूद कुछ लोग अभी यहां रुके हुए हैं। रात के समय यहां एकदम सुनसान हो जाता है। इस गांव से ज्यादातर परिवार चले गए हैं। हर घर में परिवार का एक सदस्य रुका हुआ है ताकि घर और पशुओं की रखवाली हो सके। जो बचे हुए हैं वे यही दुआ करते हैं कि किसी तरह शांति बनी रहे। युद्ध न हो तो अच्छा है।

परविंदर कौर के दोनों बेटे, बहुएं और उनके बच्चे पहले दिन से ही अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। शुक्रवार शाम को उसके बेटे खेतों को देखने के लिए गांव में आए और शाम को फिर लौट गए। परविंदर ने कहा कि ‘मैंने ही यहां रुकने का फैसला किया है। घर की देखभाल और पशुओं को खिलाने की जिम्मेवारी किसी की तो बनती ही है। युवा महिलाओं और बच्चों को बचाना हमारी प्राथमिकता है। मैं खुद अपना ध्यान रख सकती हूं।’ रात के समय परविंदर गांव में ही एक अन्य घर में चली जाती हैं, जहां चार अन्य बुजुर्ग और दो युवक रुके हुए हैं। इस परिवार के भी सात सदस्यों को गांव के बाहर भेज दिया गया है। रात के समय ये सभी घर के पिछवाड़े चारपाइयां बिछा लेते हैं और किसी तरह बातें कर समय गुजार लेते हैं। गांव के जिओन सिंह ने कहा कि दिन के समय कभी भी हमला नहीं होता।

हमेशा रात को या तड़के ही वे लोग हमला करते हैं। हमें लगता है कि इस बार पंजाब सीमा पर कुछ नहीं होगा।जिओन के भाई कुलवंत सिंह ने कहा कि हमें बड़े बम चलाने से कोई चिंता नहीं। अगर पाकिस्तान बड़े बम चलाता है तो उसका असर राज्यों के बजाय किसी दूरस्थ क्षेत्र में होगा। वे लोग बड़े शहरों को ही अपना निशाना बनाते हैं। हमें तो छोटे-छोटे बम विस्फोटों से नुकसान की आशंका है। एक अन्य युवक चमकौर सिंह ने कहा कि वह रात रात भर जागकर निगरानी रखता है कि सब कुछ सुरक्षित तो है। फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि पंजाब के सीमावर्ती गांवों में पिछले 48 घंटे से जो तनाव बना हुआ है, उसका विधानसभा चुनाव पर क्या असर होगा। यह आरक्षित गांव है और यहां की सरपंच दलित महिला है लेकिन सरपंच की असली शक्तियां निर्मल सिंह के पास ही हैं जो खुद को सरपंच और अकाली कार्यकर्त्ता बताता है। गांव में सबसे बड़ा घर उसका ही है।

सीमा के पास राजोके गांव में रह रहे ग्रामीणों ने कहा, दुआ करो सब ठीक हो जाए
निर्मल सिंह ने कहा, ‘इन तनावपूर्ण हालात से कोई भी राजनीतिक फायदा नहीं उठाना चाहता। मुख्यमंत्री बादल ने अकाली विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे चंडीगढ़ में न बैठे रहें और गांवों में जाकर लोगों की मदद करें। इसीलिए अकाली मंत्री और विधायक सब जगह पहुंच रहे हैं। लोगों की पूरी मदद की जा रही है। उन्हें गांवों से राहत शिविरों तक पहुंचाने के लिए परिवहन सुविधा दी जा रही हैं। दिन में जो गांव में आना चाहता है, उसे भी लाया जा रहा है और फिर रात के समय उन्हें शिविरों तक पहुंचाया जाता है।’ इस स्वयंभू सरपंच ने कहा- ‘हर कोई खुश है कि नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। यहां तक कि इस गांव के जमींदार भी खुश हैं हालांकि उन्हें अपने खेतों और फसलों की चिंता है।

एक अन्य ग्रामीण सतनाम सिंह ने कहा कि ‘यहां कोई समस्या नहीं है। ऐसे में लोगों को यहां से क्यों जाने को कहा जा रहा है। मैंने यहां दो करोड़ का घर बनाया है, क्या मैं उसे ऐसे ही छोड़ सकता हूं। हो सकता है मुख्यमंत्री बादल को यह फैसला चुनावों में मददगार लगे, जबकि हमें तो बेघर होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यहां सेना का एक भी जवान तैनात नहीं है। अगर यहां इतना ही बड़ा डर है तो यहां सेना क्यों तैनात नहीं की गई है।’ खुद को आप कार्यकर्ता बताने वाले स्वर्ण सिंह ने कहा कि सरकार इस बार धान की खरीद के लिए सब कुछ करेगी। वह किसानों को भूखा नहीं मरने देंगे। इस गांव से जाने वाले ज्यादातर दलित परिवार शिविरों में रह रहे हैं जबकि प्रतिष्ठित परिवार अपने रिश्तेदारों के घर रह रहे हैं।

 

 

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First Published on October 2, 2016 12:40 am

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