December 08, 2016

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पुलिस जैसी संस्था में बदलाव के लिए साहस की जरूरत

सतरहवें डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान के दौरान कनाडा के रॉयल केनेडियन माउंटिड पुलिस (आरसीएमपी) के आयुक्त बॉब पॉलसन ने 21वीं सदी में तेजी से फैलते अंतराष्ट्रीय अपराध, खतरों और आतंकवाद के लिए अंतरराष्ट्रीय पुलिसिंग को मजबूत करने के उपायों की चर्चा की और इसके लिए जरूरी नेतृत्व एवं उत्तरदायित्व को विकसित करने पर जोर दिया।

Author रुबी कुमारी | October 21, 2016 00:45 am

सतरहवें डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान के दौरान कनाडा के रॉयल केनेडियन माउंटिड पुलिस (आरसीएमपी) के आयुक्त बॉब पॉलसन ने 21वीं सदी में तेजी से फैलते अंतराष्ट्रीय अपराध, खतरों और आतंकवाद के लिए अंतरराष्ट्रीय पुलिसिंग को मजबूत करने के उपायों की चर्चा की और इसके लिए जरूरी नेतृत्व एवं उत्तरदायित्व को विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए साहस और नेतृत्व की जरूरत होती है। सीबीआइ निदेशक अनिल सिन्हा ने कहा कि आज के समय में भारत के 66 देशों के साथ 392 जांच के मामले चल रहे हैं और आने वाले समय में इसमें कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है। 150 साल पुरानी आरसीएमपी में बदलाव लाने के अनुभवों को साझा करते हुए बॉब पॉलसन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी की जरूरत है, जिसके लिए अपने संस्थानों में बदलाव लाने की जरूरत है। पॉलसन ने पूछा, ‘अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के खतरे बढ़े हैं जिसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी की जरूरत है, लेकिन इसके लिए संस्थाएं कितनी तैयार हैं कि वे एक नया नजरिया अपना सकें’? उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुलिस जैसे पारंपरिक संस्थानों में बदलाव लाने के लिए काफी साहस और नेतृत्व की जरूरत होती है।

नेतृत्व को अपने लोगों को सभी आयामों से जोड़ने की जरूरत है जिसमें नई दुनिया के अंतरराष्ट्रीय अपराध भी शामिल हैं। पॉलसन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अपराध के क्षेत्र में जांच और आॅपरेशन पर काफी कम चर्चा की गई है। जरूरत है कि इस विषय पर प्रभावी रूप से बात की जाए। 4.4 बिलियन यूएस डॉलर के बजट की पुलिस संस्था और इसके 30,000 कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे पॉलसन ने कहा कि उन्होंने सीबीआइ निदेशक अनिल सिन्हा से एक जैसे खतरों के लिए संयुक्त अंतरराष्टÑीय कोशिशों और अवसरों पर बात की है। रॉयल केनेडियन माउंटिड पुलिस के आयुक्त बॉब पॉलसन के साथ सीबीआइ प्रमुख अनिल सिन्हा ने 1984 के सिख दंगों के गवाह सहित कुछ अन्य प्रत्यर्पण के मुद्दों पर बातचीत की। सीबीआइ अधिकारियों के मुताबिक, एयर इंडिया से जुड़े सौदों में रिश्वत मामले में भारतीय-कनाडाई कारोबारी नजीर कारीगर और पंजाब ड्रग मामले पर भी चर्चा हुई।

सीबीआइ निदेशक अनिल सिन्हा ने कहा, ‘चाहे यह सफेद कॉलर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता, साइबर क्राइम, आतंक के अपराध या संगठित अपराध हों, सभी ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को तोड़ा है और साइबर वर्ल्ड का उपयोग कर रहे हैं। आज के समय में भारत के 66 देशों के साथ 392 जांच के मामले चल रहे हैं और आने वाले समय में इसमें कई गुना बढ़ोतरी की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, इंटरपोल, भ्रष्टाचार रोधी और बैंक घोटालों के लिए नोडल एजंसी के रूप में सीबीआइ इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है’।
सीबीआइ निदेशक ने कहा कि केंद्रीय जांच एजंसी तीन विश्वस्तरीय संस्थान, इंटरनेशनल सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इनवेस्टिगेशन (आइसीइआइ), सेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी वर्टिकल और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (जिसमें फोरेंसिक साइंस की सभी 17 शाखाएं शामिल होंगी) की स्थापना को शुरू करने के अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि ये संस्थानें दक्षिण एशिया और आशियान क्षेत्र के देशों की जांच एजंसियों को भी सेवा देंगी।

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First Published on October 21, 2016 12:44 am

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