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धौलपुर महल पर कांग्रेस व भाजपा के बीच रार जारी

कांग्रेस ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बर्खास्त करने की मांग को दोहराते हुए कहा कि उनके परिवार और पूर्व आइपीएल प्रमुख ललित मोदी के बीच आपराधिक सांठगांठ है...
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश। (पीटीआई फाइल फोटो)

कांग्रेस ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को बर्खास्त करने की मांग को दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि उनके परिवार और पूर्व आइपीएल प्रमुख ललित मोदी के बीच आपराधिक सांठगांठ है। वहीं राजस्थान भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को फालतू और निराधार बताया। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले की जांच क्यों नहीं कराई।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘ललित मोदी और वसुंधरा राजे परिवार के बीच आपराधिक सांठगांठ रही है।’ रमेश ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस अपने खुलासे तब तक बंद नहीं करेगी जब तक कि भाजपा ललित मोदी प्रकरण में राजे को बर्खास्त कर मामले को बंद नहीं कर देती। उन्होंने कुछ और दस्तावेज जारी किए। इनमें से एक 1949 का दस्तावेज भी है, जो यह दर्शाता है कि धौलपुर पैलेस राजस्थान सरकार की संपत्ति है।

कांग्रेस नेता ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर ललित मोदी के साथ एक निजी कंपनी के जरिए धौलपुर महल पर जबरन अवैध कब्जे का आरोप लगाया। रमेश ने यह भी कहा कि पार्टी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मामले को भी नहीं भूली है, जिन्होंने ललित मोदी को यात्रा दस्तावेजों के साथ मदद की थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजे के अलग रह रहे पति हेमंत सिंह और बेटे दुष्यंत सिंह के बीच सिर्फ चल संपत्ति को लेकर समझौता था। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से अनेक दस्तावेज पेश किए जाने के बावजूद भाजपा कमजोर तर्कों के साथ दुष्यंत सिंह के साथ संपत्ति के स्वामित्व को उचित बताने का प्रयास कर रही है।

जयराम रमेश ने कहा कि दुष्यंत सिंह बनाम हेमंत सिंह मामले में भरतपुर के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की ओर से 2007 में समझौता लाया गया था। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि महल और उसके आसपास की भूमि राजस्थान सरकार की होने के बावजूद दुष्यंत सिंह ने 500 मीटर के भूमि के एक टुकड़े के लिए एनएचएआइ से तकरीबन दो करोड़ का मुआवजा हासिल किया। यह सब उनके और भूमि अधिग्रहण अधिकारी के बीच सांठगांठ के चलते हुआ।

वहीं जयपुर ब्यूरो के मुताबिक कांग्रेस के आरोपों को नकारते हुए राजस्थान प्रदेश भाजपा ने कहा कि जिस समय की बात की जा रही है, उस समय कांग्रेस सत्ता में थी। उसने जांच क्यों नहीं करवाई। पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को फालतू और निराधार बताया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। इसमें सरकारी भर्तियां खोलने और उसमें कई रियायतें देने के निर्णय भी शामिल हैं। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस पूरी तरह कांग्रेस के आरोपों पर केंद्रित रही।

प्रेस कांफ्रेंस में संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि सिटी पैलेस 22 नवंबर 1958 को हेमंत सिंह को भारत सरकार से मिला था। इसके बाद ही हेमंत सिंह से उनके बेटे दुष्यंत सिंह को यह 2007 में संपत्ति मिली। भाजपा नेताओं ने इससे जुड़े दस्तावेजों की कापियां मीडिया को नहीं दीं। परनामी ने मीडिया को दस्तावेज की कापियां आरटीआइ के जरिए लेने की सलाह दी। प्रदेश भाजपा का कहना है कि संपत्ति सरकारी थी तो फिर दुष्यंत सिंह को जमीन का मुआवजा कैसे दिया गया।

संसदीय कार्य मंत्री ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को आरोपों को साबित करने की चुनौती देते हुए कहा कि आरोप सही साबित होने पर वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे। परनामी ने कांग्रेस के गलत तरीके से दो करोड़ रुपए का मुआवजा लेने के आरोप को भी खारिज कर दिया। उनका कहना था कि मुआवजा गलत तरीके से नहीं बल्कि कांग्रेस सरकार ने ही दिया था। उनका कहना था कि आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने गिरेबान में देखना चाहिए। आरोपों का जवाब खुद मुख्यमंत्री के नहीं देने पर दोनों नेताओं ने कहा कि बचकाना आरोपों का जवाब मुख्यमंत्री दें, ये उचित नहीं है। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते हर सवाल का जवाब दे रहा हूं।

कांग्रेस ललित मोदी प्रकरण में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके अलावा पार्टी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप को लेकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और नियमों का कथित उल्लंघन कर बिना निविदा आमंत्रित किए 206 करोड़ रुपए की खरीदारी की कथित मंजूरी देने के आरोप को लेकर महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे के इस्तीफे की भी मांग कर रही है।

सांठगांठ का लगाया आरोप
दुष्यंत सिंह बनाम हेमंत सिंह मामले में भरतपुर के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की ओर से 2007 में समझौता लाया था। महल और उसके आसपास की भूमि राजस्थान सरकार की होने के बावजूद दुष्यंत सिंह ने 500 मीटर जमीन के लिए एनएचएआइ से तकरीबन दो करोड़ का मुआवजा लिया। यह उनके और भूमि अधिग्रहण अधिकारी के बीच सांठगांठ से हुआ।… जयराम रमेश, कांग्रेस नेता

आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए
सिटी पैलेस 22 नवंबर 1958 को हेमंत सिंह को भारत सरकार से मिला था। इसके बाद ही हेमंत सिंह से उनके बेटे दुष्यंत सिंह को यह 2007 में संपत्ति मिली। मुआवजा गलत तरीके से नहीं बल्कि कांग्रेस सरकार ने ही दिया था, कांग्रेस ने इसकी जांच क्यों नहीं कराई। आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए।… राजेंद्र राठौड, संसदीय कार्य मंत्री राजस्थान, अशोक परनामी, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान भाजपा

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