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भाजपा-शिवसेना के साथ आने के संकेत

नई दिल्ली। भाजपा ने अपनी शुरुआती दुविधा छोड़ते हुए सरकार गठन के लिए अपने अलग हुए सहयोगी शिवसेना का साथ लेने का संकेत दिया है। शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भाजपा नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए अपने दो दूत भेजे हैं। संकेत यह भी मिले हैं कि राकांपा का बाहर […]
Author October 22, 2014 08:08 am
वित्तमंत्री अरुण जेटली और महाराष्ट्र के लिए पार्टी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर की टिप्पणियों से भी यह स्पष्ट है कि पार्टी ने शिवसेना के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं किए हैं। (फोटो: भाषा)

नई दिल्ली। भाजपा ने अपनी शुरुआती दुविधा छोड़ते हुए सरकार गठन के लिए अपने अलग हुए सहयोगी शिवसेना का साथ लेने का संकेत दिया है। शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भाजपा नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए अपने दो दूत भेजे हैं। संकेत यह भी मिले हैं कि राकांपा का बाहर से समर्थन लेने का विकल्प भाजपा नहीं छोड़ना चाहती ताकि शिवसेना के साथ समझौता नहीं हो पाने की स्थिति में उसके पास दूसरा विकल्प बना रहे।

सूत्रों ने कहा कि शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व के साथ चर्चा के लिए अपने दो नेताओं को लगाया है। शिवसेना ने इस विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के खिलाफ तीखी बयानबाजी की थी। भाजपा नेतृत्व से चर्चा करने के लिए शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य अनिल देसाई और एक अन्य नेता सुभाष देसाई मंगलवार रात दिल्ली पहुंचे। शिवसेना ने इसके साथ ही अपने कट्टर नेता संजय राउत को दरकिनार कर दिया।

 

पार्टी सूत्रों ने कहा कि परोक्ष तौर पर शिवसेना को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह का महाराष्ट्र दौरा टाल दिया है। सिंह को भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया था। वे अब दीपावली के बाद वहां जाएंंगे। यह कदम एक तरह से पर्दे के पीछे शिवसेना को भाजपा की शर्तों पर साथ लाने की संभावना तलाशने का हिस्सा है।

 

सरकार बनाने की कवायद के लिए सघन विचार-विमर्श के बीच राज्य के भाजपा नेता विलास मुगंतीवार ने मुख्यमंत्री के मुद्दे को नया मोड़ दे दिया जब उन्होंने इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का पक्ष लिया। इस बीच वित्तमंत्री अरुण जेटली और महाराष्ट्र के लिए पार्टी के चुनाव प्रभारी ओम माथुर की टिप्पणियों से भी यह स्पष्ट है कि पार्टी ने शिवसेना के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं किए हैं। सभी विकल्प खुले रखते हुए जेटली ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कुछ अन्य नेताओं को टेलीफोन पर बधाई देने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अपने आप में संकेत देता है (संभावित गठजोड़ के बारे में)।

 

जेटली ने कहा, हमारे पास दो प्रस्ताव हैं। शिवसेना स्वाभाविक सहयोगी रही है, एनसीपी ने बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है…महाराष्ट्र में सरकार बनाने में भाजपा और शिवसेना का सहयोगी बनना निश्चित रूप से एक बात होगी, अगर कुछ कठिनाई पैदा होती है तो आपके पास राकांपा के रूप में बिना शर्त समर्थन की पेशकश भी मौजूद है।

 

उन्होंने हालांकि कहा कि शिवसेना के साथ अभी अधिक बात नहीं हुई है, साथ ही जोर दिया कि दोनों सहयोगी अभी भी केंद्रीय मंत्रिमंडल और मुंबई नगर निगम में साथ-साथ हैं। जेटली ने कहा, ‘निस्संदेह तीन स्तरीय सरकार में से हम दो में सहयोगी हैं, यह तथ्य कि हम एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं, अपने आप में एक संकेत है।’ केंद्रीय मंत्रिमंडल में शिवसेना शामिल है और मुंबई नगर निगम में भी दोनों दल सहयोगी हैं।

 

भाजपा के महाराष्ट्र चुनाव प्रभारी ओमप्रकाश माथुर ने भी इसी आधार पर बात कही और कहा कि उनकी पार्टी ‘खुश’ होगी अगर उसकी ‘स्वाभाविक सहयोगी’ शिवसेना साथ आती है। भाजपा ने 288 सदस्यीय विधानसभा में 122 सीटें जीती हैं जो बहुमत से 23 सीटें कम हंै। वहीं शिवसेना ने 63 और राकांपा ने 41 सीटें जीती हैं।

 

यह पूछे जाने पर कि क्या वे शरद पवार के नेतृत्व वाले दल राकांपा से गठबंधन की संभावना को खारिज कर रहे हैं, जेटली ने कहा कि राजनीति में किसी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, जब आप बातचीत कर रहे होते हैं तो पार्टी कुछ भी नहीं बोलती। इस बारे में जोर देकर यह पूछे जाने कि क्या वह राकांपा को ‘ना’ कह रहे हैं, उन्होंने कहा, मैं किसी को हां नहीं कह रहा हूं।

 

इस बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को जेटली से उनके आवास पर मुलाकात की। उन्होंने जेटली से करीब आधे घंटे तक बात की और सरकार बनाने की रणनीति पर चर्चा की। समझा जाता है कि जेटली और गडकरी के बीच महाराष्ट्र में पार्टी की पसंद के बारे में चर्चा हुई। राकांपा ने पहले ही बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की है। लेकिन भाजपा ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह पेशकश स्वीकार करती है या नहीं।

 

सूत्रों ने कहा कि अगर शिवसेना तेवर दिखाती है तो भाजपा अपना नेता चुनकर सरकार बनाएगी और राकांपा के प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन से सदन में बहुमत साबित करेगी। जेटली से बातचीत करने के बाद गडकरी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श करने के लिए नागपुर रवाना हो गए। बताया जाता है कि संघ की इच्छा है कि हिंदुत्व की शक्तियां एकजुट रहें। लेकिन अंतिम निर्णय उसने भाजपा पर छोड़ दिया है।

 

इस बीच मुख्यमंत्री पद के लिए महाराष्ट्र में भाजपा प्रमुख देवेंद्र फडणवीस का नाम सबसे आगे चल रहा है। हालांकि इस दौड़ में एकनाथ खडसे और विनोद तावडे भी शामिल हंै। उधर गडकरी के नई दिल्ली से मंगलवार को नागपुर पहुंचने पर शानदार स्वागत किया गया और बाद में विदर्भ क्षेत्र से पार्टी के नव-निर्वाचित विधायकों का एक समूह उनके आवास के बाहर एकत्रित हुआ और उनके नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए नारेबाजी की।

 

जब संवाददाताओं ने गडकरी से मुगंतीवार की उस मांग के बारे में पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनना चाहिए, गडकरी ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे राज्य की राजनीति में लौटना नहीं चाहते।

 

 

भाजपा विधायक दल की बैठक के लिए सोमवार को मुंबई पहुंचे विधायक मंगलवार को अच्छी तादाद में सीधे नागपुर स्थित गडकरी के आवास पहुंचे और उनके पक्ष में नारेबाजी की। भाजपा विधायक दल की बैठक नहीं हो पायी थी। बहरहाल इस घटनाक्रम को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है ताकि भाजपा नेतृत्व को एक संकेत दिया जा सके जिसे अभी मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला करना है। गौरतलब है कि विदर्भ क्षेत्र खुलकर भाजपा के समर्थन में आया है और क्षेत्र में 62 सीटों में से 44 सीटें जीती हैं। वहां अलग राज्य एक विवादास्पद मुद्दा है।

 

 

 

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