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जिसने बीजेपी में दिलाई थी एंट्री, उसी बुजुर्ग नेता का हमला- गवर्नर नहीं बनाया तो यशवंत सिन्हा गिरती अर्थव्यवस्था पर अलापने लगे विपक्षी राग

पिछले दिनों यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आलेख लिखकर गिरती अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार की आलोचना की थी और लिखा था को पहले नोटबंदी फिर जीएसटी लागू कर केंद्र सरकार ने देश के औद्योगिक विकास की राह में बड़ा रोड़ा अटकाया है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता व पूर्व वित्‍त मंत्री यशवंत सिन्‍हा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद कैलाश सांरग ने पार्टी सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा पर बड़ा हमला बोला है। सिन्हा को पत्र लिखकर सारंग ने उन्हें पद का लालची और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ षडयंत्र करने वाला बताया है। डेढ़ पन्ने के पत्र में सारंग ने खुद को कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को तौर पर एक कायस्थ होने के नाते यशवंत सिन्हा को सलाह दी है कि वो अपने बेटे और केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा की भलाई और भविष्य के लिए चुप रहें। सारंग ने सिन्हा को सलाह दी है कि वो अपने बेटे के रास्ते में रोड़ा न बनें।

इंडिया टुडे के मुताबिक सारंग ने कहा है कि उन्होंने यशवंत सिन्हा को लाल कृष्ण आडवाणी से मिलवाकर बड़ी गलती की है। सारंग ने कहा है कि अगर यशवंत सिन्हा पार्टी के खिलाफ बोलना बंद नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ पार्टी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सारंग ने यह भी लिखा है कि यशवंत सिन्हा मोदी सरकार के खिलाफ बयान देकर उन लोगों की मदद कर रहे हैं जो राष्ट्रवाद को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि पार्टी नेता होने के नाते वो अपनी बात पार्टी फोरम में भी कह सकते थे।

सारंग ने लिखा कि अगर प्रधानमंत्री ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया तो इससे उद्वेलित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि पीएम बहुत व्यस्त रहते हैं और यह बात आप भी समझते हैं। उन्होंने लिखा है कि भाजपा की बदौलत ही यशवंत सिन्हा को पद, प्रतिष्ठा और सम्मान मिला। बावजूद इसके वो हमलावर बने हुए हैं। सारंग को मध्य प्रदेश में शिवराज खेमे का भरोसेमंद नेता माना जाता है।

बता दें कि पिछले दिनों यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस में एक आलेख लिखकर गिरती अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार की आलोचना की थी और लिखा था को पहले नोटबंदी फिर जीएसटी लागू कर केंद्र सरकार ने देश के औद्योगिक विकास की राह में बड़ा रोड़ा अटकाया है। उन्होंने कम जीडीपी के लिए मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी के जवाब पर दोबारा हमला बोलते हुए कहा कि वो अर्थव्यवस्था का चीरहरण होने नहीं देंगे। सिन्हा ने यह भी कहा कि आपको गिरती हुई अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए जनादेश मिला था, ना कि पिछली सरकारों पर आरोप मढ़ने के लिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में आपको लोग आपके प्रदर्शन और आपके द्वारा किए गए वादों से जज करेंगे। सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हम लोग निराशा फैला रहे हैं तो उन्होंने सुधारात्मक कदम उठाने का फैसला क्यों किया?

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  1. Y
    yatinderaggarwal
    Oct 7, 2017 at 3:33 pm
    यह सब पद के लालची और सत्ता के भूखे हैं. अपने दम पर यह एक चुनाव तो जीत कर दिखाएं. २०१४ में मोदीजी ने अकेले अपने दम पर बीजेपी का परचम लहराया था. आरएसएस के करोडो स्वयंसदेवक और बीजेपी के कार्यकर्ताओं का मनोबल मोदीजी से ही बढ़ा था. १९६१ से बीजेपी का कार्यकर्ता होने के नाते मैंने बहुत चुनाव देखे हैं और पो एजेंट और मतगणना पर्यवेशक होने का कार्य भी किया है. यह नेता अपने दम पर अपना चुनाव नहीं जीत सकते चाहे वोह यशवंत सिन्हा जी हों या अडवाणीजी. लेकिन पद की लालसा ८० साल पूरे होने पर भी गयी . जन संघ भी देखा है जहाँ अनुशासन इतना होता था की यशवंत जी जितना बोल रहे हैं उससे आधा कहने पर भी बाहेर निकाल दिया जाता ,. यह मोदीजी की नशीलता है की वह इतनी अनुशासनहीनता को न कर रहे हैं. आज अगर मोदीजी इस्तीफ़ा दे दें तो बहुत से सांसद भी उनके साथ अपना इस्तीफ़ा दे देंगे. यह मोदीजी का ही करिश्मा था जो राज्यों में जीत हुई . उत्तर प्रदेश का प्रचंड बहुमत मत भूलो.
    (2)(1)
    Reply
    1. K
      krishna kumar
      Oct 7, 2017 at 1:50 pm
      सिन्हा की बात ही क्या कितने सपने बनाये थे अब कांग्रेस ही उन्हें फायदा दे सकती है बेचारे सत्ता की भूख के मारे प्रचार तो चाहिए ही अब क्या करे
      (3)(7)
      Reply
      सबरंग