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राज्‍यसभा चुनाव में BJP के ल‍िए मददगार साब‍ित हो सकता है RSS मूल का यह पुराना कांग्रेसी, जान‍िए क्‍यों

अमित शाह, स्मृति ईरानी, अहमद पटेल और बलवंत सिंह राजपूत गुजरात की तीन राज्य सभा सीटों के लिए उम्मीदवार हैं।
Author August 7, 2017 18:18 pm
2015 में एक कार्यक्रम के दौरान स्‍मृति ईरानी और अमित शाह। (Express Archive Photo)

लीना मिश्रा

गुजरात की तीन राज्य सभा सीटों के लिए मंगलवार (आठ अगस्त) को चुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और पूर्व कांग्रेसी नेता बलवंत सिंह राजपूत चुनावी मैदान में हैं। तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार होने से ये चुनाव कांटे को गया है। इस चुनाव में हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला की भूमिका काफी अहम हो गई है। 77 वर्षीय वाघेला कांग्रेस छोड़ने से पहले तक गुजरात विधान सभा में नेता विपक्ष थे। गुजरात की राजनीति को करीब से न जानने वाले बहुत से लोगों को लगता है कि वाघेला के दिन लद चुके हैं लेकिन ये सच नहीं है। मंगलवार को अगर कोई एक नेता पासा पलटने की ताकत रखता है तो वो हैं शंकर सिंह वाघेला। मजेदार बात ये है कि इस समय वाघेला न तो कांग्रेस में हैं और न ही बीजेपी में। आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों वाघेला इस चुनाव में इतने महत्वपूर्ण हैं।

गुजरात के गांधीनगर में 5.2 एकड़ में फैला शंकर सिंह वाघेला का बंगला राज्य सभा चुनाव की धुरी बना हुआ है। माना जा रहा है कि वाघेला का राजनीतिक भविष्य भी कल के चुनाव के बाद साफ हो जाएगा। गुजरात राज्य सभा के लिए 176 विधायकों को वोट देना है। एक सीट जीतने के लिए कम से कम 45 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। 29 जुलाई को कांग्रेस के 44 विधायक कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाए गए और सोमवार (सात अगस्त) को वापस गुजरात लौटे। वाघेला के पार्टी छोड़ने के बाद से छह कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी छोड़ दी जिनमें से तीन बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। वाघेला और उनके बेटे महेंद्र सिंह वाघेला भी विधायक हैं। वाघेला पिता-पुत्र समेत कुल सात कांग्रेसी विधायक ऐसे हैं जो नो तो बीजेपी में शामिल हुए हैं और न ही कांग्रेस के 44 एमएलए के साथ बेंगलुरु गए थे।

21 जुलाई को वाघेला ने अपने 77वें जन्मदिन पर 20 सालों के बाद कांग्रेस छोड़ दिया था। वाघेला के इस्तीफे से पहले ही कांग्रेस के लिए तभी खतरे की घंटी बज गई जब उसे पता चला कि 17 अगस्त को हुए राष्ट्रपति चुनाव में गुजरात कांग्रेस के 57 विधायकों में से आठ ने एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को वोट दिया था।  गुजरात के बनासकंठा जिले में एक कार्यक्रम में वाघेला ने कहा कि विधायकों को दुख की घड़ी में जनता के पास होना चाहिए था। बनासकंठा बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रहा। बनासकंठा की नौ विधान सभा सीटों में से छह पर कांग्रेसी विधायक हैं। वाघेला ने यहां सार्वजनिक रूप से कहा कि राज्य सभा चुनाव में उनका वोट अहमद पटेल को जाएगा।

बीजेपी ने कांग्रेस के पूर्व मुख्य सचेतक बलवंत सिंह राजपूत को समर्थन दिया है। राजपूत वाघेला के समधी हैं। राजपूत के बेटे की शादी वाघेला की पोती से हुई है। माना जा रहा है कि राजपूत को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। पार्टी छोड़ने से पहले तक गुजरात में राजपूत को “अहमद पटेल का आदमी” माना जाता था। ऐसे में कुछ कांग्रेसी या पूर्व कांग्रेसी भी उन्हें वोट दे दें तो किसी को हैरत नहीं होगी।

वाघेला का राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनसंघ से हुई थी। वो पहली बार 1977 में सांसद बने थे। वो भारतीय लोक दल के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़े थे। भारतीय लोक दल जनसंघ समेत सात दलों का गठबंधन था जो इंदिरा गांधी के खिलाफ एकजुट हुई थीं। 1985 में वो बीजेपी के राज्य सभा सदस्य बने। लेकिन जब बीजेपी गुजरात में सत्ता में आई तो वाघेला मुख्यमंत्री न बनाए जाने से रुष्ट थे। वाघेला ने 1995 में बीजेपी में दो फाड़ कर दिए थे। वो पार्टी के 55 विधायकों को लेकर मध्य प्रदेश चले गए थे। उस समय मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार थी।  वाघेला ने राष्ट्रीय जनता पार्टी (आरएसपी) बनाकर कांग्रेस की मदद से सरकार बना ली थी हालांकि उसके बाद वो दोबारा कभी गुजरात की सत्ता में वापस नहीं आ सके।

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  1. B
    bitterhoney
    Aug 7, 2017 at 9:49 pm
    सत्ता प्राप्ति के लिए बीजेपी और आरएसएस ने धार्मिक सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है. हिन्दू धर्म में वर्णो को बहुत महत्व दिया गया है. ब्राह्मणो को सर्वश्रेष्ट्र स्थान प्राप्त है, इसके बाद क्षत्रिय, फिर वैश, और सबसे नीचे छुद्र यानि दलित. जिनको अछूत भी कहा जाता है. वह मंदिरों में पूजा भी नहीं कर सकते,. मनुस्मृति जो हिन्दू धर्म का संविधान है उसमे इसका वर्णन विस्तार से है.
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