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गुजरात में भाजपा का मनोबल लड़खड़ाया

भाजपा कैडर आधारित पार्टी है, जो चुनावों में जीत के लिए अपने कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है। यहां तक कि शाह भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ‘निराशा’ है और भाजपा के सामने चुनौती बड़ी है।
Author अहमदाबाद | March 1, 2016 01:00 am
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह (फाइल फोटो)

स्थानीय निकाय के चुनावों में हार और पटेल कोटा आरक्षण के आंदोलन के बाद गुजरात में भाजपा कार्यकर्ताओं का लड़खड़ाता मनोबल पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए चिंता की वजह बन गया है। उनका मानना है कि इससे वर्ष 2017 में राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने में गंभीर अवरोध पैदा हो सकते हैं।

भाजपा कैडर आधारित पार्टी है, जो चुनावों में जीत के लिए अपने कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है। यहां तक कि शाह भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ‘निराशा’ है और भाजपा के सामने चुनौती बड़ी है। शाह ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़ी बैठक का आयोजन किया था, जहां उन्होंने यह स्वीकार किया कि दिल्ली में बैठ कर वह देख सकते हैं कि गुजरात के भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह भी कहा था कि भाजपा गुजरात को नहीं खो सकती क्योंकि यह संघ परिवार की विचारधारा की ‘प्रयोगशाला’ है। अपने भाषण में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे सभी ‘निराशाओं और मतभेदों को पीछे छोड़ कर’ वर्ष 2017 चुनाव के लिए ‘एकसाथ मिल कर काम करें’।

शाह ने कहा कि जिस तरह वर्ष 2012 के राज्य चुनाव ने वर्ष 2014 की लोकसभा जीत की नींव रखने का काम किया था, उसी तरह से वर्ष 2017 की जीत वर्ष 2019 के राष्ट्रीय चुनावों में जीत का रास्ता तैयार करेगी। पटेल जाति गुजरात में संख्यात्मक एवं सामाजिक रूप से प्रभावशाली जाति है, जो पिछले छह माह से आरक्षण की मांग को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ खड़ी हुई है। यह आंदोलन हिंसक हो गया था, जिसके कारण 10 व्यक्तियों की मौत हो गई और करोड़ों रुपए की सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति का नुकसान हुआ। हार्दिक पटेल और उनके साथियों जैसे आरक्षण आंदोलन के नेताओं के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है और उन्हें देशद्रोह के मामलों में जेल में डाल दिया है। पटेल समुदाय के नेता पिछले चार माह से जेल में बंद हैं। ऐसे में इस समुदाय के बड़े वर्ग के बीच असहमति के स्वर उठने लगे हैं।

राजनीतिक पंडितों के अनुसार इसकी वजह से ही स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। जिला एवं तालुका पंचायत चुनाव में भाजपा कांग्रेस के हाथों बुरी तरह हार गई थी। गुजरात में पार्टी के गिरते मनोबल की एक वजह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में नरेंद्र मोदी जैसे लोकप्रिय नेताओं की गैरमौजूदगी भी है। मोदी ने राज्य में कांग्रेस को एक के बाद एक चुनाव में हराया था।

पार्टी के नेता ने कहा, ‘इन सभी चीजों ने पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाला है और अमित शाह इसे पहचान गए हैं। वर्ष 2001 के बाद पहली बार पार्टी गुजरात में एक बुरे दौर से गुजर रही है।’ उन्होंने कहा, इसी वजह से पार्टी ने कार्यकर्ताओं की बड़ी बैठक आयोजित की और शाह इसमें पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए आए। गुजरात भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष विजय रूपानी ने कहा, ‘हमारे पास एक करोड़ से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ता हैं। हम कार्यकर्ताओं की ओर से किए गए काम के आधार पर चुनाव जीते। मुझे यकीन है कि उनकी ताकत के आधार पर हम वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेंगे।’ शाह ने यह भी कहा था कि पार्टी एक अमरपक्षी की तरह गुजरात जीतने के लिए उभरेगी। उन्होंने कहा था, ‘कांग्रेस के नेता नहीं जानते कि भाजपा एक अमरपक्षी है, जिसका राख हो जाने के बाद भी फिर से उभार होगा।’

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