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अरुणाचल में तुकी के जाने से हमारा रुख साबित हुआ, राज्यपाल की कार्रवाई सही: भाजपा

भाजपा ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश संकट कांग्रेस में आंतरिक कलह का नतीजा था। नबाम तुकी पर भ्रष्टाचार के आरोप थे।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 12:58 pm
अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी (पीटीआई फाइल फोटो)

भाजपा ने रविवार (17 जुलाई) को दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से नबाम तुकी के इस्तीफे ने उसके रुख को ‘सच साबित’ किया है और राज्य में राजनीतिक संकट के बाद राज्यपाल जे पी राजखोवा के फैसेलों को ‘सही’ ठहराया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा, ‘हमने हमेशा से कहा कि तुकी के पास बहुमत नहीं था। कांग्रेस विधायकों द्वारा उनके खिलाफ बगावत करने के बाद राज्यपाल ने फैसला किया और राष्ट्रपति शासन लगाया गया। उनके (तुकी के0 इस्तीफे ने यह साबित किया है कि भाजपा सही थी और राज्यपाल की कार्रवाई भी सही थी।’

इससे पहले उत्तराखंड संकट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने समान समस्या के लिए दो अलग अलग समाधान सुझाए हैं। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि उच्चतम न्यायालय ने राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत को शक्ति परीक्षण के लिए कहा था, जबकि अरुणाचल प्रदेश में उसने पूर्ववर्ती सरकार को ही बहाल किया। उन्होंने कहा, ‘अगर उच्चतम न्यायालय तुकी से भी शक्ति परीक्षण के लिए कहता तब नतीजे कुछ और होते। इसलिए भाजपा ने न्यायालय के फैसले को आश्चर्यजनक बताया था।’ दोनों मामलों में शीर्ष अदालत के फैसले से दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बहाल हुई, जो इन राज्यों से कांग्रेस को हटाने के भाजपा के प्रयासों के लिए झटका है।

अरुणाचल प्रदेश में नाटकीय घटनाक्रम के बीच शनिवार (16 जुलाई) को कांग्रेस विधायकों ने पेमा खांडू को अपना नया नेता चुना, जिन्होंने 45 पार्टी विधायकों और दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन के आधार पर सरकार बनाने का दावा पेश किया। शर्मा ने दावा किया, ‘अरुणाचल प्रदेश संकट कांग्रेस में आंतरिक कलह का नतीजा था। तुकी पर भ्रष्टाचार के आरोप थे और कांग्रेस नेतृत्व ने अपने विधायकों की दलील को अनदेखा किया जिसके कारण ही यह संकट पैदा हुआ। कांग्रेस अपनी कमियों के लिए भाजपा पर आरोप लगाना छोड़े क्योंकि उसका केन्द्रीय नेतृत्व ही उसकी समस्याओं की जड़ में है।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। उसे भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हरीश रावत और वीरभद्र सिंह जैसे अपने मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’

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