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विदेशी चंदा मामले में भाजपा और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी अपील वापस ली

विदेशी चंदा विनियमन कानून, में 2010 में किए गए संशोधन के मद्देनजर कानून का उल्लंघन करके कथित रूप से विदेशी धन स्वीकार करने पर उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
Author नई दिल्ली | November 30, 2016 04:32 am
भाजपा और कांग्रेस

भाजपा और कांग्रेस ने विदेशी चंदा मामले में पहली नजर में कानून के उल्लंघन का दोषी ठहराने संबंधी दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अपील मंगलवार को वापस ले लीं। न्यायमूर्ति जेएस खेहड, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खान विलकर की तीन सदस्यीय खंडपीठ को इन राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने सूचित किया कि विदेशी चंदा विनियमन कानून, में 2010 में किए गए संशोधन के मद्देनजर कानून का उल्लंघन करके कथित रूप से विदेशी धन स्वीकार करने पर उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। भाजपा की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान और कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी याचिकाएं वापस लेने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा-याचिकाएं वापस ली गई हैं, इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है।

दीवान ने कहा कि कानून में 2010 में हुए संशोधन के मुताबिक एक राजनीतिक दल को मिला चंदा विदेशी योगदान नहीं है अगर उस फर्म में एक भारतीय के 50 फीसद या इससे अधिक शेयर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश में पंजीकृत कंपनी की भारतीय सहायक कंपनी चंदा दे सकती है और संशोधित कानून के मद्देनजर ऐसे चंदे को विदेशी चंदा नहीं माना जा सकता है।इससे पहले 22 नवंबर को कांग्रेस ने इस कानून में इस साल लाए गए संशोधन के उनके मामले पर प्रभाव के बारे में स्थिति साफ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से समय मांगा था। कांग्रेस ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। कांग्रेस ने अदालत में कहा था कि इस साल फरवरी में पेश किए गए संशोधन पिछली तारीख से प्रभावी हैं। ऐसी स्थिति में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उनकी अपील निरर्थक हो गई है। 2010 के कानून में लाए गए संशोधन का उद्देश्य कार्पोरेट सामाजिक दायित्व के नाम पर विदेशी कंपनियों से चंदे का प्रवाह सरल बनाना है।

हाई कोर्ट ने 28 मार्च 2014 को अपने फैसले में कहा था कि ब्रिटेन स्थित वेदांता रिसोर्सेज की सहायक दो कंपनियों से राजनीतिक दलों ने चंदा स्वीकार करके संबंधित कानून का उल्लंघन किया था। जिसने केंद्र और निर्वाचन आयोग को इन दलों के खिलाफ छह महीने के भीतर उचित कार्रवाई का निर्देश दिया था। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि कानून की व्याख्या करने में उसने गलती की है। इस तरह से प्राप्त चंदे की जानकारी को छिपाया नहीं गया था। यह जानकारी निर्वाचन आयोग में पेश रिटर्न में भी है। कांग्रेस का यह भी कहना था कि वेदांता के मालिक भारतीय नागरिक अनिल अग्रवाल हैं और उनकी दो सहायक कंपनियां भारत में पंजीकृत है। इसलिए वे विदेशी स्रोत नहीं हैं। हाई कोर्ट ने कहा था कि वेदांता कंपनी, कानून के मुताबिक विदेशी कंपनी है और इसलिए अनिल अग्रवाल के स्वामित्व वाली फर्म और उसकी सहायक स्टरलाइट व सेसा विदेशी चंदा विनियमन कानून के अनुसार विदेशी स्रोत हैं। अदालत ने गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स और केंद्र सरकार के पूर्व सचिव ईएएस सरमा की जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन दोनों राजनीतिक दलों ने सरकारी कंपनियों और विदेशी स्रोतों से चंदा प्राप्त करके जनप्रतिनिधित्व कानून व विदेशी चंदा विनियम कानून का उल्लंघन किया है।

 

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