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भाजपा-मांझी में बनी बात: ‘हम’ का दावा, करीब 20 सीटों पर हो जाएगा समझौता

Bihar polls-समझा जाता है कि बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बीच सीट बंटवारे को लेकर..
Author नई दिल्ली | September 14, 2015 07:56 am
भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन एक पार्टी नेता ने कहा, ‘सब कुछ ठीक है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।’

समझा जाता है कि बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बात बन गई है और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के एक नेता ने दावा किया कि भाजपा उन्हें करीब 20 सीटें देने के लिए तैयार हो गई है।

भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन एक पार्टी नेता ने कहा, ‘सब कुछ ठीक है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।’ बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री और बिहार के भाजपा चुनाव प्रभारी अनंत कुमार और पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव की बिहार निवास पर मांझी के साथ हुई बैठक में सीट बंटवारे पर समझौता हो गया।

देर रात तक बातचीत के बाद मांझी की पार्टी के एक नेता ने दावा किया कि बैठक में हुई बातचीत के आधार पर उनकी पार्टी करीब 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, वहीं पांच अन्य उम्मीदवार भाजपा के चुनाव चिह्न पर किस्मत आजमाएंगे। हालांकि कुछ सूत्रों ने 17-5 के फार्मूले की भी बात कही, जिसमें मांझी की पार्टी को सत्रह सीटें देने की बात है और पांच अन्य उम्मीदवार भाजपा के चुनाव चिह्न पर लड़ेंगे। इस बीच मंगलवार को भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हो सकती है जिसमें बिहार चुनावों के लिए उम्मीदवारों का फैसला होगा।

इससे पहले रविवार को मांझी और उनके सहयोगियों ने दिन में कुमार, यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ बैठकें कीं। लोजपा अध्यक्ष राम विलास पासवान के रूप में भाजपा के पास एक मजबूत दलित नेता हैं, लेकिन वह महादलित वोटों के लिए मांझी को भी साथ में रखना चाहती है।

बताया जाता है कि मांझी भाजपा की ओर से 13 से 15 सीटों की पेशकश किए जाने से खुश नहीं थे और लोजपा के समान ही सीटें चाहते थे जिसे 40 सीटें दिए जाने की संभावना है। चल रही बातचीत से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भाजपा राज्य की 243 में से करीब 160 सीटों पर किस्मत आजमाना चाहती है और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी के लिए 25 सीटें देने को तैयार है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सीट-बंटवारे की बातचीत पर नजर रखने के लिए अपनी मैसूर यात्रा रद्द कर दी। रविवार को सीट बंटवारे पर मांझी और भाजपा नेताओं में दिन भर बातचीत के कई दौर हुए।

इस बीच, सीट बंटवारे को लेकर राजग में अंतर्कलह पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि जब ‘किसी उसूल के बिना और अवसरवाद के लिए’ गठबंधन होता है तो ऐसी चीजें होती हैं। सिंघवी ने कहा, ‘यह अंतर्विरोध का आगाज है। आगे आगे देखिए होता है क्या। निजी महत्वाकांक्षा और सत्ता के लोभ पर आधारित ऐसे गठबंधन नहीं टिकते।’

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘जब आप इस तरह के गठबंधन के लिए जाते हैं, ये अंतर्विरोध बाहर आ जाते हैं, जो अंत का आरंभ है। लोग उन्हें मुंहतोड़ जवाब देंगे।’

उधर भाजपा के मान्यता प्राप्त थिंक टैंक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास के दावों को खारिज करते हुए कहा कि राजग से उनके अलग हो जाने के कारण राज्य में शासन की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ा है। बकौल पार्टी उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाले जन नीति शोध केंद्र (पीपीआरसी) के अध्ययन में विकास के सभी प्रमुख संकेतकों के विश्लेषण में यह पाया गया है कि भाजपा और जद (एकी) के अलगाव का बिहार के शासन और बिहार के लोगों के जीवन पर बेहद नकारात्मक असर रहा है।

पीपीआरसी ने अपने अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला है कि 2013 में पार्टी की चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख के रूप में नरेंद्र मोदी का कद बढ़ने के बाद, नीतीश के भाजपा नेतृत्व वाले राजग से अलग हो जाने पर विकास कार्य प्रभावित हुआ है। अध्ययन में कहा गया कि राज्य की आर्थिक विकास दर वर्ष 2012-13 में 15 फीसद से गिरकर नौ फीसद रह गई।

इस अलगाव के शासन पर पड़े असर का अध्ययन करने का दावा करने वाली पीपीआरसी ने कहा कि राज्य के सिर्फ 70 फीसद सरकारी स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय हैं। लड़कियों के लिए यह फीसद महज 58 है। लड़कियों द्वारा बीच में ही पढ़ाई छोड़ दिए जाने की एक प्रमुख वजह यह है।

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