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बिहार में गहराया सियासी संकट, शह और मात का खेल जारी

अनिल बंसल बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एलान कर दिया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। बकौल मांझी वे अभी भी मुख्यमंत्री हैं और बहुमत का फैसला केवल विधानसभा के भीतर हो सकता है। वहां अगर वे हार गए तो पद छोड़ देंगे। इसके लिए उन्होंने 20 फरवरी से विधान मंडल की बैठक […]
Author February 9, 2015 11:45 am
Jitan Ran Manjhi को पप्पू और राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पूर्व में नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाने की भी वकालत की थी। (फ़ोटो-पीटीआई)

अनिल बंसल

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एलान कर दिया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। बकौल मांझी वे अभी भी मुख्यमंत्री हैं और बहुमत का फैसला केवल विधानसभा के भीतर हो सकता है। वहां अगर वे हार गए तो पद छोड़ देंगे। इसके लिए उन्होंने 20 फरवरी से विधान मंडल की बैठक बुलाई है। मांझी प्रकरण में रविवार को दिल्ली और पटना दोनों जगह सरगर्मी दिखी। दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के बाद जहां मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की, वहीं पटना में विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने नीतीश कुमार को जद (एकी) विधायक दल के नेता के नाते मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मांझी के तेवर तल्ख दिखे। उन्होंने एलान कर दिया कि वे संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार आचरण करेंगे।

दरअसल बिहार के विवाद में इस समय राज्यपाल की भूमिका अहम हो गई है। बिहार के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी इस समय कोलकाता में हैं। उनके पास पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का कार्यभार भी है। उनका सोमवार को पटना पहुंचने का कार्यक्रम है। तय है कि उसके बाद गतिविधियों का केंद्र पटना का राजभवन बनेगा। नीतीश कुमार जहां अपने समर्थन में विधायकों की राजभवन में परेड कराने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं बेफिक्र मांझी ने रविवार को दो टूक कहा कि फैसला विधानसभा में होगा। उन्होंने राज्यपाल से मिलकर मंत्रिमंडल का विस्तार करने का भी दावा किया। मांझी का कहना था कि गरीबों के हितैषी सभी दलों के विधायक उनका समर्थन करेंगे। भाजपा से समर्थन लेने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि किसी भी दल के समर्थन का स्वागत है।

जहां तक केंद्र सरकार का सवाल है, वह इस मामले में खुलकर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। अलबत्ता राज्य की सियासी गतिविधियों पर उसकी नजर लगातार बनी हुई है। दिल्ली के चुनावी नतीजों से भी इस मामले में केंद्र का रुख तय होगा। अगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो केंद्र सरकार बिहार के मामले में खुलकर कोई भूमिका अदा करने से बचेगी। प्रधानमंत्री से मांझी ने अपने संकट का जिक्र किया होगा। हालांकि पत्रकारों से उन्होंने यही कहा कि वे सूबे के विकास के लिए मदद की गुहार लगाने गए थे। पर चर्चा सियासी हालात पर भी हुई। मांझी ने मोदी की कई मामलों में खुलकर सराहना भी की।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस मामले में केंद्र सरकार राज्यपाल को अपने विवेक से फैसला करने देगी। त्रिपाठी को इस तरह के झगड़ों का वैसे भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष के नाते खासा अनुभव रहा है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील होने के नाते वे कानूनी मामलों की पेचीदगी को समझते हैं। उधर, संविधान के जानकार भी यही कह रहे हैं कि बहुमत का फैसला केवल विधानसभा के भीतर हो सकता है, राजभवन में नहीं। लिहाजा संभावना यही है कि बिहार का संकट अभी कुछ दिन और खिंचेगा। हालांकि त्रिपाठी ने रविवार को 20 मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। मांझी ने शनिवार को ही इन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। त्रिपाठी के जनसंपर्क अधिकारी एसके पाठक ने कहा कि राज्यपाल ने जीतन राम मांझी की सलाह पर कार्रवाई की।

इस विवाद में रविवार को आरोप-प्रत्यारोपों का दौर भी जारी रहा। जद (एकी) ने जहां भाजपा पर अपनी पार्टी में फूट की साजिश रचने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। उलटे नीतीश पर सत्ता का लोभी होने और उसी लोभ के चलते संकट खड़ा करने का आरोप जड़ दिया। जद (एकी) की तरफ से मोर्चा दिल्ली में महासचिव केसी त्यागी ने संभाला और कहा कि अल्पमत वाले मांझी को नीति आयोग की बैठक में भाग लेने का कोई अधिकार नहीं है। त्यागी ने अमित शाह पर जद (एकी) को तोड़ने की कोशिश का भी आरोप लगाया।

भाजपा की तरफ से पार्टी के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने बिहार के विवाद से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह जद (एकी) का आंतरिक संकट है। सत्ता के लोभ में नीतीश बेचैन हैं। इसी से सारा संकट खड़ा हुआ है। पहले उन्होंने अपनी प्रधानमंत्री पद की महत्त्वाकांक्षा के लिए भाजपा से गठबंधन तोड़ा। अब मुख्यमंत्री बनने के लिए वे उसी मांझी को अपमानित करने पर तुले हैं जिसे मुख्यमंत्री बना कर उन्होंने महादलितों का हितैषी होने का दावा किया था। इस बीच बिहार के दलित नेता और लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी मांझी को पद से हटाने की तीखी आलोचना की है।

जीतन राम मांझी ने नीतीश और शरद यादव के दबाव में शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने रविवार को दिल्ली में आत्मविश्वास के साथ कहा कि मांझी की नैया कभी नहीं डूबती। मांझी ने शनिवार को अपने समर्थक मंत्रियों से विधानसभा भंग करने की सिफारिश का अधिकार भी ले लिया था। नीतीश को रोकने और तत्काल चुनाव कराने के लिए एक संभावना यह भी है कि राज्यपाल मुख्यमंत्री की विधानसभा भंग करने की सिफारिश को स्वीकार कर लें। हालांकि मंत्रिमंडल के 21 सदस्यों ने उस बैठक से बहिष्कार कर दिया था जिसमें मांझी को उनके समर्थकों ने फैसले के लिए अधिकृत किया था।

तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच रविवार को जद (एकी) की तरफ से राजभवन को 130 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंप कर नीतीश कुमार को मांझी की जगह मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बाद में कहा कि नीतीश कुमार सोमवार को राज्यपाल से मिलेंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। उन्होंने 243 सदस्यों की विधानसभा में जद (एकी) के 97 विधायकों के अलावा राजद के 24, कांग्रेस के पांच, इतने ही निर्दलियों और माकपा के एक विधायक के समर्थन का भी दावा किया। विधानसभा में दस सीटें फिलहाल खाली हैं और 233 बची सीटों के हिसाब से बहुमत के लिए 117 का आंकड़ा जरूरी है।

इस बीच पटना से संकेत मिले हैं कि लालू की पार्टी के कुछ विधायक भी मांझी के पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने खुल कर कहा कि वे महादलित समुदाय के विधायकों से अनुरोध करेंगे कि वे मांझी को समर्थन जारी रखें। राजद विधायक दल की औपचारिक बैठक सोमवार को बुलाई गई है। राघवेंद्र प्रताप सिंह के अलावा एक अन्य राजद विधायक ब्रजकिशोर सिंह भी मांझी के संपर्क में बताए गए हैं। जद (एकी) के भीतर का झगड़ा तब और बढ़ गया जब एक मंत्री विनय बिहारी के खिलाफ विरोधी खेमे की एक सहयोगी को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में एफआइआर दर्ज कराई गई। एफआइआर कराने वाली नेता बीमा भारती हैं।

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