May 23, 2017

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बिहार सरकार ने कराया गंगा सफाई पर सेमिनार, बनारस के संत ने कहा- नरेंद्र मोदी में नहीं है दम, नीतीश को बनाओ पीएम

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने गंगा सफाई को लेकर दो दिन की सेमिनार का आयोजन किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने गंगा सफाई को लेकर दो दिन की सेमिनार का आयोजन किया था। इस सेमिनार में जो हुआ उसे देखकर कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर मिल सकती है। दिल्ली में बिहार सरकार की ओर से आयोजित कराए गए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय था ‘गंगा की अविरलता में बाधक गाद, समस्या व समाधान’। सम्मेलन में बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि गंगा नदी के निरंतर प्रवाह का मुद्दा राजनीतिक नहीं है और इस पर कदम उठाना ही होगा। नीतीश ने कहा कि आज गंगा की स्थिति देखकर रोना आता है।

वहीं, इस सम्मेलन के दौरान बनारस के संत स्वामी अभिमुक्तरेश्वरानंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए नीतीश कुमार को भविष्य का पीएम उम्मीदवार बता दिया। संत ने कहा कि नीतीश कुमार में देश को आगे ले जाने और नई दिशा दिखाने का जज्बा है। साथ ही संत ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी ने गंगा की सफाई का वादा पूरा नहीं किया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता जयराम रमेश भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि 2014 में यूपीए सरकार की हार के पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि हम गंगा को भूल गए थे। उन्होंने नीतीश कुमार को गंगा सफाई का बीड़ा उठाने के लिए कहा।

कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने कहा कि गंगा की अविरलता मेरे लिए कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह सिर्फ बिहार के स्वार्थ से जुड़ा मुद्दा भी नहीं है। यह राष्ट्र से जुड़ा हुआ मुद्दा है। यह प्रकृति व पर्यावरण से जुडा मुद्दा है। गंगा की अविरलता को कायम रखने के लिए कदम उठाना ही पड़ेगा। नीतीश ने कहा कि अपने बचपन के दिनों में वह गंगा नदी से पानी भरकर लाया करते थे। उस समय गंगा जल काफी स्वच्छ था। आज गंगा का प्रवाह प्रदूषण व गाद से पट गया है।

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First Published on May 19, 2017 9:17 am

  1. R
    Raju
    May 19, 2017 at 10:28 am
    इन चमचों-चापलूस संतों ने देश और हिंदू धर्म का भट्ठा बैठा दिया है। संत के वेश में सत्ता की ाई खाने वाले ऐसे संतों की भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, आतंकवाद और धर्मांधता जैसी सामाजिक-आर्थिक ाइयों पर चुप्पी संदेहास्पद लगती है।
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