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सिर पर चुनाव तो ‘आम-लीची’ को लेकर टकराव

क्या आप कभी सोच सकते हैं कि दो बड़े नेता आम और लीची फल को लेकर आपस में लड़ रहे हो... आपका जवाब ज़रूर नहीं में होगा लेकिन अब यह सच हो गया है क्योंकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार के बीच आम-लीची को लेकर जंग छिड़ गए हैं।
‘आम’ की लड़ाई: नीतीश बोले मुझे आवाम की चिंता आम की नहीं, मांझी ने बताया घटिया मानसिकता

बिहार सरकार के पटना में एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को वहां मौजूद आम और लीची का आनंद लेने से रोकने के लिए 24 पुलिसकर्मियों की तैनाती के बाद नीतीश कुमार और मांझी के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। सूबे में सितंबर-अक्तूबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बिहार में अभी आम-लीची का मौसम चल रहा है। इसलिए सियासी जंग में इन फलों का शामिल होना लाजिमी है।

मांझी फरवरी में मुख्यमंत्री पद से हटने के बावजूद मुख्यमंत्री आवास में रह रहे हैं जबकि नीतीश फिलहाल 7 सकुर्लर रोड स्थित एक सरकारी आवास में रह रहे हैं। एक अणे मार्ग स्थित फलदार वृक्षों, जिसमें आम और लीची आदि शामिल हैं, से फल तोड़ने से मांझी और उनके परिवार को रोकने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती को नीतीश की ओछी मानसिकता का प्रतीक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह आश्चर्य की बात है कि एक व्यक्ति एक बंगले में रहता है, लेकिन वहां लगे वृक्षों के फलों का आनंद नहीं ले सकता’।

नीतीश ने मांझी के आरोप पर हंसते हुए गुरुवार से पत्रकारों से बातचीत के दौरान उसे ‘तुच्छ’ बताया और कहा कि इस मामले की उन्हें जानकारी नहीं थी और जब आज अखबारों के जरिए उससे अवगत हुए तो प्रदेश के पुलिस महानिदेशक पीके ठाकुर से पूछा है कि मामला क्या है और ऐसा क्यों हो रहा है?

उन्होंने कहा कि अगर उनकी जानकारी में इसे पहले लाया जाता तो वे एक अणे मार्ग में पेड़ों पर लगे सभी आम और लीची तुड़वाकर वहां रहने वाले (मांझी) को दे देते। ठाकुर ने बताया कि मुख्यमंत्री जैसी हस्तियों की सुरक्षा के लिए एसएसजी की तैनाती की जाती है और वर्तमान विवाद को लेकर एसएसजी के समादेष्टा से रिपोर्ट तलब की गई है।


जीतन राम मांझी ने यह भी आरोप लगाया कि हाल में एक माली ने उनके परिवार के सदस्यों को आम तोड़ने से मना किया। उन्होंने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद 2005 में एक अणे मार्ग में अपनी पत्नी राबड़ी देवी के सत्ता से बेदखल हो जाने पर करीब छह महीने रहे थे। लेकिन उस दौरान मुख्यमंत्री पद पर आसीन नीतीश ने लालू के खिलाफ ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया था।

मांझी ने कहा कि एक दलित होने के नाते वे ज्यादा शक्तिशाली नहीं हैं, शायद इसी वजह से उन्हें इस स्तर तक नीतीश द्वारा अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश प्रशासन ने इन 24 पुलिसकर्मियों को उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार की लाईफलाइन माने जाने वाले गंगा नदी पर बने महात्मा गांधी सेतु पर लगने वाले जाम को हटाने के लिए इस्तेमाल करते पर तो जनता को कुछ लाभ भी होता, लेकिन उनकी प्राथमिकता उन्हें और उनके परिवार को परेशान करना है।

इस मामले में भाजपा ने नीतीश पर हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने नई दिल्ली में कहा कि नीतीश कुमार किसी से लड़ने पर उसके प्रति अत्यधिक पूर्वग्रही होकर राजनीति को बहुत निचले स्तर पर ले जाते हैं। महादलित जीतन राम मांझी को पहले मुख्यमंत्री बनाया फिर पद से हटाया और अब उन्हें उनके आवास के पेड़ों पर लगे आम की चटनी तक खाने का अधिकार नहीं है।

इस सिलसले में उन्होंने 2010 की उस घटना का भी उल्लेख किया जब पटना में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी और नीतीश कुमार ने भाजपा नेतृत्व को दावत दी थी। लेकिन गुजरात के उस वक्त के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी एक फोटो को शहर के चौराहों पर लगाए जाने से नाराज होकर उन्होंने वह दावत रद्द कर दी थी।

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मांझी के निवास 1 अणे मार्ग पर कथित रूप से आम के पेड़ों के फलों की रखवाली के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शाहनवाज ने कहा कि नीतीश कुमार ने यह जो घटिया कदम उठाया है इससे उन्होंने अपना ही नहीं, बल्कि बिहार और बिहार के लोगों का भी मजाक बनाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के वर्तमान शासन में बिहार में डकैती, हत्याओं और लूट जैसे अपराधों के सारे रेकार्ड टूट गए हैं और वहां अब जंगल राज-2 स्थापित हो चुका है। लेकिन नीतीश कुमार को अवाम की चिंता नहीं बल्कि आम, लीची और कटहल की ही चिंता है।

शाहनवाज ने हालांकि कहा कि नीतीश अब इसे छोटी बात बता रहे हैं। लेकिन बिहार में पुलिस की कमी होने के बावजूद आम की रखवाली के लिए एक बंगले में 24 पुलिसकर्मी लगाना और दिल्ली में छह अन्य पुलिसकर्मियों को निर्यात करना क्या छोटी बात है? बिहार में कानून व्यवस्था की सबसे बड़ी वजह राजनीति है। जब तक जद (एकी)-भाजपा शासन था कानून व्यवस्था कायम थी। लेकिन भाजपा का साथ छोड़ कर राजद का दामन थामने के साथ ही सब बर्बाद हो गया।

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  1. S
    satish
    Jun 5, 2015 at 10:29 am
    मांझी क्या बोलते है क्यूँ बोलते है उनको खुद भी पता नहीं रहता है ये बिहार का दुर्भाग्य है की उसे राबड़ी , मांझी जैसे मुख्यमंत्री को न करना पड़ा है. मांझी जी से गुजारिश है की वे दलितों होने की दुहाई देना बंद करे . उनकी इस तरह की ओछी हरकते दलितों को जानवरो से भी कमतर बना रही है. वे तो ऐसा दिखाते है जैसे की दलितों में कुछ सम्मान बचा ही नहीं . दलितों के साथ कोई भी कुछ भी कर सकता है . अरे आपने मुख्यमंत्री रहते कौन सा ऐसा काम किया की दलितों का सर ऊँचा हो
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    1. उर्मिला.अशोक.शहा
      Jun 4, 2015 at 5:13 pm
      वन्दे मातरम- एक वक्त का अपना मित्र आम न खाय इसीलिए पुलिस तैनात? यु पि में भी ग्रह मंत्री ने भेस को ढूंढने के लिए पुलिस तैनात किये थे ये मानसिकता तथाकथित सेक्युलर समाजवादियोंकी. जनता की फिक्र नहीं सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना है जा ग ते र हो
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      Reply
      1. उर्मिला.अशोक.शहा
        Jun 5, 2015 at 5:01 am
        वन्दे मातरम- नितीश को डर है की आम मांझी न खा जाये और नितीश के किस्मत में सिर्फ गुठलियां ही आये इसीलिए यह परिश्रम नितीश ले रहे है नितीश ने भाजप को धोका दिया तो मांझी ने नितीश को ऐसी पठकनी दी के जिंदगीभर गुठलियां ही खता रहे जा ग ते र हो
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        सबरंग