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Bihar Elections 2015: चुनाव से पहले ही टूटने लगा लालू-नीतीश के जनता परिवार का महागठबंधन, मुलायम ने दिया करारा झटका

भाजपा विरोधी महागठबंधन को बिहार चुनाव से पहले एक बड़ा झटका लगा है। चुनाव में बहुत कम सीटें मिलने से ‘अपमानित’ समाजवादी पार्टी उससे अलग हो गई और कहा कि महज पांच सीट आबंटित किए जाने से वह आहत है और अब अपने बूते चुनाव लड़ेगी।
भाजपा विरोधी महागठबंधन को बिहार चुनाव से पहले एक बड़ा झटका लगा है। चुनाव में बहुत कम सीटें मिलने से ‘अपमानित’ समाजवादी पार्टी उससे अलग हो गई और कहा कि महज पांच सीट आबंटित किए जाने से वह आहत है और अब अपने बूते चुनाव लड़ेगी।

भाजपा विरोधी महागठबंधन को बिहार चुनाव से पहले एक बड़ा झटका लगा है। चुनाव में बहुत कम सीटें मिलने से ‘अपमानित’ समाजवादी पार्टी उससे अलग हो गई और कहा कि महज पांच सीट आबंटित किए जाने से वह आहत है और अब अपने बूते चुनाव लड़ेगी।

हालांकि गठबंधन के दिग्गज नेता शरद यादव ने दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से बात कर मनाने की कोशिश की। भाजपा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया जताते हुए हुए कहा कि विपक्षी महागठबंधन एक ‘डूबता जहाज’ है, जिससे समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने सबसे पहले कूदकर खुद और अपनी पार्टी को बचा लिया।

सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने लखनऊ में कहा कि बिहार में पार्टी अलग से चुनाव लड़ेगी। गठबंधन की बड़ी पार्टियों ने सीटों के बारे में तय करते समय हमारे साथ विचार-विमर्श नहीं किया जिसके कारण सपा अपमानित महसूस कर रही है। यह गठबंधन धर्म नहीं है। गठबंधन से बाहर निकलने का निर्णय सपा संसदीय दल की बैठक में पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव की उपस्थिति में किया गया। मुलायम ने ही नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बीच दोस्ती करवाई थी और राजद प्रमुख को इस बात के लिए मनाया था कि नीतीश को धर्मनिरपेक्ष गठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी के रूप में पेश किया जाए।

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यह घटनाक्रम बिहार चुनाव के कई हफ्तों पहले हुआ जिससे राज्य में धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा होने की आशंका है। इसी वर्ग के वोटों पर जद (एकीकृत), राजद, कांगे्रस गठबंधन की नजर लगी हुई है। बहरहाल, जद (एकी) अध्यक्ष शरद यादव ने इस मामले में दावा किया कि सपा के साथ मतभेदों को दूर किया जाएगा और गठबंधन बरकरार रहेगा।

ताजा घटनाक्रम से तत्कालीन जनता परिवार से अलग होकर बने छह दलों-सपा, राजद, जद (एकी), जद (एस), इनेलो और समाजवादी जनता पार्टी के एकीकरण की संभावनाएं खतरे में पड़ गई हैं। इन पार्टियों ने इस साल अपै्रल में घोषणा की थी कि बिहार चुनाव के बाद एकीकरण को औपचारिक रूप दिया जाएगा।

सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि यह प्रमुख धर्मनिरपेक्ष गठबंधन घटकों का फर्ज था कि वे सीटों के बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले सपा से विचार विमर्श करते। उन्होंने कहा, हमें इसकी जानकारी मीडिया के जरिए मिली। यह गठबंधन धर्म नहीं है और सपा अपमानित महसूस कर रही है।

बहरहाल जनता परिवार के विलय से संबंधित सवाल पूछने पर रामगोपाल यादव ने कहा, मैं जानता था कि बिहार चुनाव के वक्त ये सभी पार्टियां अलग-अलग हो जाएंगी और उनमें समझौता नहीं हो सकता। इसीलिए मैंने कहा था कि मैं जानबूझकर सपा के ‘डेथ वारंट’ पर दस्तखत नहीं कर सकता। इसके बाद यह कहने की गुंजाइश बचती ही नहीं कि यह परिवार कभी एक हो रहा था। उन्होंने कहा कि पार्टी इस बात से नाखुश है कि राज्य विधानसभा की 243 सीटों में से उसे दो या पांच सीटों की पेशकश की गई है। यादव ने बताया कि सपा को उसके सहयोगी दल जितनी सीटें दे रहे थे, उससे कई गुना ज्यादा तो सपा अपने बलबूते जीतेगी।

गठबंधन के प्रमुख दलों द्वारा बहुत कम सीटें दिए जाने के कारण उससे बाहर आने वाली, सपा दूसरी पार्टी है। इससे पहले शरद पवार की राकांपा ने भी गठबंधन को छोड़ दिया था। नीतीश कुमार और लालू प्रसाद ने सीटों के बंटवारे की जो घोषणा की थी, उसके अनुसार जद (एकी) और राजद को सौ-सौ सीटें दी जाएंगी जबकि कांगे्रस को 40 सीटें मिलेंगी। शेष तीन सीटों को राकांपा को दिए जाने की बात थी। लेकिन इतनी कम सीटों की पेशकश से असंतुष्ट राकांपा ने गठबंधन को छोड़ दिया।

भले ही बिहार में सपा कम प्रभाव रखने वाली पार्टी हो, लेकिन गठबंधन में उसकी उपस्थिति से धर्मनिरपेक्ष वोट अधिक लामबंद होंगे। सपा ने पिछले चुनाव में 146 उम्मीदवार उतारे थे और कुल मतों में 0.55 प्रतिशत मत हासिल किए थे।
इस बीच पटना में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, अब यह साबित हो गया है कि महागठबंधन डूबता जहाज है।

यादव इससे सबसे पहले कूद गए क्योंकि डूबते जहाज पर कोई भी नहीं रहना चाहता। लगता है कि गठबंधन की स्वाभिमान रैली के बाद उनका स्वाभिमान जगा। महागठबंधन से सपा के हटने पर खुशी जाहिर करते हुए हुसैन ने कहा कि यादव को समझना चाहिए कि गठबंधन के वरिष्ठ नेता जिन्होंने राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं के साथ काम किया है, वे अपनी धुर विरोधी कांग्रेस के साथ गठबंधन को तैयार नहीं हैं।

हुसैन ने कहा, भागलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी रैली यादव के लिए आंखें खोलने वाली थी। उन्होंने समझा होगा कि महागठबंधन के बिहार में जीतने की कोई संभावना नहीं है और हार से उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी पर असर होगा।

हुसैन ने राजद उपाध्यक्ष रघुनाथ झा के पार्टी छोड़ने की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह महागठबंधन के खत्म होने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में और लोग छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, विपक्ष को इसे महागठबंधन कहना बंद करना चाहिए। इसमें महा कुछ भी नहीं है। मोदी की भागलपुर रैली राजनीतिक सूनामी थी और गठबंधन को लगा कि इससे राज्य में जद (एकी) और राजद का खात्मा हो जाएगा।

नई दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने दावा किया कि नीतीश के ‘महागठबंधन’ से सपा के हटने के बाद अब कोई राजनीतिक दल चुनाव में पराजित होने वाले इस गठबंधन के साथ नहीं जाना चाहता है। यह महागठबंधन अब चरमरा रहा है। बिहार में मुसलिमों और दलितों को विभाजित करने का भी नीतीश पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की जनता इस बार विकास के मुद्दे पर मतदान करेगी। वह जाति या धार्मिक विभाजन के आधार पर वोट नहीं देगी।

यहां भाजपा मुख्यालय में मीडिया को रूडी ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें नीतीश कुमार को समस्तीपुर के एक कार्यक्रम में अध्यापकों के खिलाफ ‘सख्त’ भाषा का प्रयोग करते दिखाया गया है। इसके बाद उन्होंने कहा, नीतीश जिस तरह बोल रहे हैं, उससे साफ है कि लालू के डीएनए का उन पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा, समाजवादी पार्टी का जद (एकी), राजद, कांग्रेस जमावड़े से अलग हटना विपक्ष में असंतोष और घबराहट का परिचायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल रैलियों से सबको साफ हो गया है कि बिहार चुनाव में भाजपा के सामने कोई नहीं टिक पाएगा।

पटना से मिली एक अन्य खबर के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने समाजवादी पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि वह भाजपानीत राजग और महागठबंधन से बाहर छोटे दलों को साथ लेकर तीसरा मोर्चा बनाने के लिए प्रयासरत है।
राकांपा के राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर ने कहा कि सपा ने सही निर्णय लिया है और मुलायम सिंह यादव के इस महागठबंधन के बाहर हो जाने के बाद जनता परिवार के एकजुट होने की उम्मीद अब एक तरह से खत्म हो गई है।

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  1. उर्मिला.अशोक.शहा
    Sep 5, 2015 at 7:52 am
    वन्दे मातरम- नितीश की हठयोग नीति से गठबंधन तितर बितर हो रहा है फिर कैसे मोदी के खिलाफ लड़ पाएंगे?भाजप के बल पे सत्ता भोगने के बाद चूहा शेर बनगया था लेकिन अब छठी का दूध याद आ रहा है. मुलायम ,पवार और अन्य पार्टिया मिलकर तीसरा मोर्चा खोलेंगे तो उन्हें जनता का अच्छा प्रतिसाद मिल सकेंगा जा ग ते र हो
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    Reply
    सबरंग