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भोपाल: एनकाउंटर में मारे गए 8 सिमी सदस्य किन आरोपों के लिए थे जेल में बंद, जानिए

मध्यप्रदेश के भोपाल में पुलिस द्वारा सोमवार (31 अक्टूबर) को कथित एनकाउंटर में आठ लोग मारे गए।
Author November 1, 2016 11:45 am
भोपाल सेन्ट्रल जेल से फरार सिमी के सदस्य, बाद में जिन्हें पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया। (फोटो-स्क्रीनशॉट)

मध्यप्रदेश के भोपाल में पुलिस द्वारा सोमवार (31 अक्टूबर) को कथित एनकाउंटर में आठ लोग मारे गए। उन सभी लोगों पर सरकार द्वारा बैन संगठन सिमी का हिस्सा होने का आरोप था। मारे गए लोग 2008 में हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट से लेकर 2014 में बिजनौर में हुए धमाके के आरोपी थे। इसके अलावा उनमें से कुछ पर खांडावा में हुए सांप्रदायिक दंगे करवाने का भी आरोप था। अमजद रमजान खान, शेख महबूब, जाकिर हुसैन और मोहम्मद सालिक का यूपी के बिजनौर में 2014 में हुए धमाके में नाम आया था। आरोप था कि वे लोग बम बना रहे थे जो कि बनाते वक्त ही फट गया था। एटीएस ने उन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी और एनआईए मामले की जांच कर रही थी। जानिए मारे गए लोग के बारे में बाकी जानकारियां-

यहां देखें मुठभेड़ का वीडियो

शेख महबूब: उसे गुड्डू के नाम से भी जाना जाता था। वह 2013 में खांडवा की जेल से भाग भी गया था। बाद में उसका नाम 2014 में हुए बिजनौर धमाके में आया। वह भी उस धमाके में जख्मी हुआ था। बाद में उसे इसी साल गिरफ्तार किया गया था। 2011 में उसे एक कॉन्सटेबल के मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 2008 में हुए अहमदाबाद ब्लास्ट में भीा उसका नाम आया था।

जाकिर हुसैन: उसे सादिक भी कहते थे। कॉन्सटेबल में मर्डर में महबूब के साथ 32 साल के जाकिर का भी नाम आया था। 2014 में बिजनौर धमाके में भी उसका नाम शामिल था। दोनों को एक साथ ही राउरकेला से गिरफ्तार किया गया था।

अमजद: उसे पप्पू और दाउद भी कहा जाता था। 25 साल का अमजद भी जाकिर और महबूब के साथ 2013 में जेल तोड़कर भागा था। बिजनौर धमाके में उसका भी नाम था। उसे भी राउरकेला से दोनों के साथ गिरफ्तार किया गया था। 2010 में उसपर भोपाल की एक फाइनेंस कंपनी में डकैती डालने का आरोप लगा। 2011 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

मोहम्मद सालिक: उसे सल्लू भी कहा जाता था। उसे महबूब, जाकिर और अमजद के साथ राउरकेला से गिरफ्तार किया गया था। उसपर भी बिजनौर धमाके में शामिल होने का आरोप लगा था।

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अकील खिलजी: 47 साल का खिलजी खांडवा का रहने वाला था। उसपर काफी सारे केस थे। जो कि 2000 में सिमी के बैन हो जाने के बाद लगे थे। उसपर खांडवा में चार बार सांप्रदायिक दंगे करवाने के आरोप थे। अपराधी ठहराए जाने के बाद वह दो साल जेल में बिता भी चुका था।

माजिद नागौरी: नागौरी उज्जैन के माहिदीपुर का रहने वाला था। उसपर गौरकानूनी काम की रोकधाम के लिए बने अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे कई सारी विस्फोटक सामग्री लेकर जाने के आरोप में पकड़ा गया था। आरोप तय होने के बाद पहले तो वह भाग गया था लेकिन फिर उसने खुद सरेंडर कर दिया था।

खालिद अहमद: वह सोलापुर का रहने वाला था। वह ऑटोरिक्शा चलाया करता था फिर उसने कबाड़ी की दुकान खोल ली थी। वह उन पांच लोगों में शामिल था जिन्हें 2013 में सोलापुर से मध्यप्रदेश पुलिस ने पकड़ा था। पुलिस ने बताया था कि उसके साथ एक स्लीपर सेल को भी पकड़ा गया था जो कि किसी बड़ी जगह को निशाना बनाना चाहता था।

मुजीब शेख: वह अहमदाबाद का रहने वाला था। उसे मध्यप्रदेश पुलिस ने 2011 में पकड़ा था। आरोप था कि वह सिमी के साथ मिलकर काम कर रहा था। बाद में उसपर अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में शामिल होने का आरोप लगा। उसके खिलाफ चार्जशीट तैयार की जा चुकी थी।

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  1. A
    Anjan
    Nov 1, 2016 at 4:35 am
    As we know these terrorist are traitors, NO question should be raised about their encounter. They deserved to be dead.
    Reply
  2. A
    Ashit
    Nov 1, 2016 at 4:30 am
    Keeping them even in the jail was aCRIME against humanity, because it was not only waste of tax payers money, but a threat to humanity had they escaped without caught
    Reply
  3. M
    Manoj
    Nov 1, 2016 at 4:45 am
    When in India you get so called justice after twenty to thirty years ,it is better to eliminate hardcore criminals and terrorists in encounter.
    Reply
  4. D
    Devisahai Meena
    Nov 1, 2016 at 6:06 am
    बिना किसी जाती / संप्रदाय / धर्म के भेद भाव के ...अपराधी को अपराधी समझते हुए ..
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  5. P
    Partha
    Nov 1, 2016 at 4:32 am
    Condolences to the late head constable''s family. I hope the govt appropriately compensates his next of kin.
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