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भोपाल: एनकाउंटर में मारे गए तीन सिमी सदस्यों के खिलाफ मिले सबूतों को कोर्ट ने कहा था ‘अविश्वसनीय’

भोपाल में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए 8 सिमी सदस्यों में से तीन पर लगे आरोपों और उनके खिलाफ मिले सबूतों को खांडवा कोर्ट ने अविश्वसनीय करार दिया था।
खांडवा में अकील खिलजी का परिवार। Kaunain Sheriff M

भोपाल में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए 8 सिमी सदस्यों में से तीन पर लगे आरोपों और उनके खिलाफ मिले सबूतों को खांडवा कोर्ट ने अविश्वसनीय करार दिया था। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, लगभग एक साल पहले खांडवा कोर्ट ने अकील खिलजी पर 2011 के एक मामले के लिए मध्यप्रदेश पुलिस और उस केस के इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर को लताड़ भी लगाई थी। इतना ही नहीं कोर्ट ने अकील खिलजी को गैरकानूनी गतिविधि कड़े (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तरत बरी भी कर दिया था। वहीं अजमद रमजान खान और मोहम्मद सालिख को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर रखा था। कोर्ट ने पुलिस को इस बात के लिए भी लताड़ लगाई थी कि उसने जरूरी दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा था। खिलजी को 13 जून 2011 में गिरफ्तार किया गया था। उसपर सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने का आरोप था। उसके बाद 30 सितंबर 2015 को रिहा कर दिया गया था। फिलहाल खिलजी अपने ऊपर लगे बाकी तीन केसों के लिए ट्रायल का इंतजार कर रहा था। 47 साल का खिलजी खांडवा का रहने वाला था। उसपर काफी सारे केस थे। जो कि 2000 में सिमी के बैन हो जाने के बाद लगे थे। उसपर खांडवा में चार बार सांप्रदायिक दंगे करवाने के आरोप थे। 2011 वाले केस में पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि खिलजी के घर पर 10-15 सिमी के लोग एकत्रित थे और बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे। उस वक्त पुलिस ने खिलजी के घर पर रेड मारकर सिमी के जुड़े दस्तावेज और भड़काऊ सीडी बरामद करने की भी बात कही थी।

सिमी सदस्यों के एनकाउंटर का वीडियो

कोर्ट ने 2011 वाले केस का फैसला देते हुए कहा था कि हरदेव सिंह के अलावा मौके पर मौजूद किसी पुलिसवाले ने उन लोगों द्वारा जिहाद के समर्थन में नारे लगाते आवाज नहीं सुनी थी। इसके लिए उसे रिहा कर दिया गया था। उस वक्त कोर्ट ने अबदुल्ला नाम के एक दूसरे शख्स को भी रिहा किया था वह जाकिर हुसैन का भाई थी। जाकिर हुसैन भी भोपाल पुलिस के एनकाउंटर में मारा गया था।

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  1. M
    manoj
    Nov 5, 2016 at 11:47 am
    Our unaccountable courts are one of major reason for the crime in society? some of terrorists were booked for 2008 Ahmedabad blast case why no judgement in 8 years? some were awaiting trials? infact more that 50% of prisoners are awaiting trials? how come same person like Sahabuddin is booked more than 50 times for repeat offence and courts still grant bails? and not punishments? our inefficient and incompetent judicial system must be made accountable to some mechanism
    (0)(0)
    Reply
    1. Bhagawana Upadhyay
      Nov 7, 2016 at 11:55 pm
      -----८--------------BHAGAWANA RAM UPADHY ‏@BrUPADHY 1h1 hour ago … via @youtube
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      Reply
      1. Bhagawana Upadhyay
        Nov 7, 2016 at 11:45 pm
        BHAGAWANA RAM UPADHY ‏@BrUPADHY 1h1 hour ago … via @youtube
        (0)(0)
        Reply
        1. Bhagawana Upadhyay
          Nov 8, 2016 at 12:03 am
          BHAGAWANA RAM UPADHY ‏@BrUPADHY 2h2 hours ago … via @youtube
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          Reply
          1. Bhagawana Upadhyay
            Nov 8, 2016 at 12:19 am
            BHAGAWANA RAM UPADHY ‏@BrUPADHY 3h3 hours ago … via @youtube
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