April 25, 2017

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नोटबंदी के खिलाफ कई राज्यों में प्रदर्शन, भाजपा ने बताया ‘फ्लॉप शो’

राष्ट्रीय राजधानी में माकपा और भाकपा सहित सात वाम पार्टियों ने नोटबंदी के कदम को ‘गरीब विरोधी और कारपोरेटे समर्थक’ करार दिया।

Author नई दिल्ली/तिरुवनंतरपुरम | November 28, 2016 21:12 pm
कोलकाता में नोटबंदी के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाते हुए। (REUTERS/Rupak De Chowdhuri/28 Nov, 2016)

केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को ‘गरीब विरोधी’ करार देते हुए विपक्षी दलों ने सोमवार (28 नवंबर) को प्रदर्शन किया जिस वजह से देश के कुछ हिस्सों में आम जनजीवन प्रभावित रहा। केरल और त्रिपुरा में वाम पार्टियों ने बंद का आह्वान किया था। वाम दलों ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था, लेकिन कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने सिर्फ प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने ‘जन आक्रोश दिवस’ के तौर पर देश के अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया। जदयू और बीजद ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। विरोधी दलों की ओर से आहूत ‘जन आक्रोश दिवस’ के तहत हुए विरोध प्रदर्शनों और बंद को भाजपा ने ‘फ्लॉप शो’ करार दिया और कहा कि लोगों ने कहा कि लोगों ने दोनों को खारिज कर दिया है कि क्योंकि उनकी ‘दागी’ पार्टियों में विश्वास नहीं है। तमिलनाडु में केंद्र के नोटबंदी के तरीके के खिलाफ द्रमुक के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। इस दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सैकड़ों नेताओं को सोमवार (28 नवंबर) को गिरफ्तार कर लिया गया। द्रमुक के अलावा उसके सहयोगी दलों कांग्रेस, आईयूएमएल और वाम दलों के नेता और कार्यकर्ता 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित किये जाने के कारण आम लोगों को हो रही परेशानी का हवाला देते हुए सड़कों उतरे। पुलिस ने बताया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के सामने प्रदर्शन करने के अलग-अलग मामलों में द्रमुक कोषाध्यक्ष एम के स्टालिन, माकपा के राज्य सचिव जी रामाकृष्णन और भाकपा के राज्य सचिव आर मुथरसन समेत इन पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

राष्ट्रीय राजधानी में माकपा और भाकपा सहित सात वाम पार्टियों ने नोटबंदी के कदम को ‘गरीब विरोधी और कारपोरेटे समर्थक’ करार दिया तथा कहा कि सरकार को नये नोटों को उपलब्ध कराए जाने तक पुराने नोटों का इस्तेमाल होना चाहिए। ग्वालियर जिला काग्रेस के अध्यक्ष दर्शन सिंह की ‘जन आक्रोश दिवस’ प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपने के बाद दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। केरल में माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने 12 घंटे की हड़ताल की जिससे दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे तथा राज्य परिवहन एवं निजी क्षेत्र की बस सेवाएं बाधित रहीं। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस नीत यूडीएफ ने राज भवन तक मार्च निकला और केंद्र के फैसले का विरोध किया। बेंगलुरु से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के खिलाफ देशव्यापी ‘जन आक्रोश रैली’ में शामिल होते हुए कर्नाटक की सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस ने आज (सोमवार, 28 नवंबर) राज्य भर में प्रदर्शन किया और रैलियां निकालीं।

इस प्रदर्शन से कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। हालांकि बेंगलुरु में जनजीवन सामान्य रहा और व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान, बैंक और निजी कार्यालय आम दिनों की तरह खुले और उनमें सामान्य तरीके से कामकाज हो रहा है एवं सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाएं भी सुचारू ढंग से चल रही हैं। वाम दलों द्वारा नोटबंदी के विरोध में पश्चिम बंगाल में आहूत 12 घंटे की हड़ताल राज्य में कोई खास असर डालने में विफल रही। सरकारी और निजी बसें, ट्राम तथा अन्य निजी वाहन सड़कों पर रहे। अधिकतर दुकानें और बाजार खुले रहे। रेलवे सूत्रों ने बताया कि सियालदह और हावड़ा खंडों पर पूर्वी रेलवे की ट्रेन सेवा सामान्य रही। मेट्रो रेल सेवा भी सामान्य थी।

वाम मोर्चे द्वारा आहूत हड़ताल का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया है। तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों ने हड़ताल को खारिज कर दिया है। बंगाल के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि हड़ताल से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता। यदि आप जनविरोधी फैसले का विरोध करना चाहते हैं तो आपको सड़कों पर उतरना चाहिए।’ वाम मोर्चे ने दावा किया कि हड़ताल शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है। इसने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस कुछ स्थानों पर हिंसा कराने की कोशिश कर रही है। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि वह लोगों को और परेशानी में डालने के खिलाफ है क्योंकि लोग नकदी की कमी की वजह से पहले से ही मुश्किल झेल रहे हैं।

राज्य के वित्त विभाग द्वारा जारी एक परिपत्र में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने सभी कर्मियों को आज (सोमवार, 28 नवंबर) और कल (मंगलवार, 29 नवंबर) कार्यालयों में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। किसी प्रियजन की मृत्यु, मातृत्व अवकाश, अस्पताल में भर्ती होने तथा अन्य वास्तविक कारणों के मामले में कर्मियों को छूट प्राप्त रहेगी। कांग्रेस के जनाक्रोश आंदोलन का आज (सोमवार, 28 नवंबर) ओड़िशा में मामूली असर देखा गया। हालांकि, लंबी दूरी की बसें सड़कों पर नहीं उतरी और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। ऑटो रिक्शा जैसे छोटे वाहन सभी स्थानों पर समान्य रूप से चले और व्यापारिक प्रतिष्ठान और सरकारी तथा निजी कार्यालय खुले रहें।

पांच वाम दलों के अलावा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जन आक्रोश आंदोलन किया और राज्य में सभी प्रखंडों में प्रदर्शन किया जबकि सीटू कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर, पुरी और अन्य स्थानों पर जुलूस निकाला। बिहार विधानमंडल में नोटबंदी का विरोध कर रहे कांग्रेस, राजद और भाकपा माले सदस्यों ने 500 और 1000 रुपये के नोट पर रोक लगाए जाने के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं भाजपा सदस्यों ने विपक्ष के भारत बंद के आह्वान को गलत ठहराया और विमु्रदीकरण के पक्ष में नारेबाजी की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नोटबंदी का लगातार समर्थन के चलते जदयू ने विपक्ष के आज के बंद से स्वयं को अलग रखा। बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में और इन सदनों के बाहर नोटबंदी को लेकर बंद का मुद्दा गूंजा।

नोटबंदी के खिलाफ विपक्ष प्रायोजित ‘जन आक्रोश दिवस’ का उत्तर प्रदेश में असर नजर नहीं आया। कार्यालयों में सामान्य कामकाज हुआ तो व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहे। यातायात भी सामान्य रहा। राज्य में किसी बड़े दल ने जन आक्रोश दिवस का समर्थन नहीं किया। हालांकि, कांग्रेस और आप कार्यकर्ताओं ने अलग अलग कार्यक्रम किये। कांग्रेस नेताओं ने मार्च किया तो आप ने जनसंवाद कर लोगों को नोटबंदी के फायदे नुकसान समझाये। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव अविनाश पाण्डेय और विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीपीओ से शहीद स्मारक तक मार्च किया और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा ने प्रदर्शन किया, हालांकि आम जनजीवन प्रभावित नहीं रहा। सड़कों पर यातायात की स्थिति सामन्य थी और रोज की तरफ दफ्तर और कारोबारी प्रतिष्ठान खुले रहे। गुजरात में भी कांग्रेस ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस के ‘जन आक्रोश दिवस’ के आह्वान का असर नहीं दिखा जहां के व्यापारियों ने बंद के आह्वान को नजरअंदाज कर दिया।

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First Published on November 28, 2016 9:07 pm

  1. J
    jaya
    Nov 28, 2016 at 4:19 pm
    मेरे भाइयो और बहिनो, देशहित मे आप लोग फोन बैंकिंग का उपयोग करे - मोदी जीआप काहे नही वीडियों काँफ्रेंसिंग से शिलान्यास,उदघाटन और चुनावी रैली को संबोधित करते साहब ??? !
    Reply
    1. R
      ramji
      Nov 28, 2016 at 8:25 pm
      मोदी जी तो पहले ही सिर्फ अपने ग़ुलामों को ही संबोधित करते हैं . लाइन मैं कड़ी होने वाली जनता से उन्हें नफरत है
      Reply
    2. M
      Manoj Saini
      Nov 28, 2016 at 5:11 pm
      सत्यमेव जयते।
      Reply

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