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700 लोगों को बैंकों में पैसा डालने और निकालने के काम में लगाया था सूरत के फाइनेंसर ने, शनिवार को पड़ा था आयकर विभाग का छापा

किशोर भजियावाला के 27 बैंक खाते थे, जिनमें 20 बेनामी थे। इन्हीं के जरिए वह मनी लॉन्ड्रिंग करता था।
इस एजंसी पर भारतीय बैंकिंग और अन्य वित्तीय चैनलों में संदिग्ध लेन-देन का विश्लेषण का जिम्मा है।

नोटबंदी के बाद से देशभर में आयकर विभाग के छापे पड़ रहे हैं। एेसा ही मामला सूरत का था, जहां विभाग ने शनिवार को फाइनैंसर किशोर भजियावाला के पास से 10.45 करोड़ बरामद किए थे। उन्होंने कालाधन नकली बैंक खातों के जरिए ठिकाने लगाने की कोशिश की थी। उनके पास से 400 करोड़ रुपये की संपत्ति भी मिली थी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि किशोर ने नोटबंदी के बाद 700 लोगों को पैसा जमा करने और निकालने के काम में लगाया था।

टाइम्स अॉफ इंडिया ने आयकर विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया कि किशोर भजियावाला के 27 बैंक खाते थे, जिनमें 20 बेनामी थे। इन्हीं के जरिए वह मनी लॉन्ड्रिंग करता था। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हो पाया कि वह उसने कितना पैसा जमा कराया और कितना निकाला। आयकर विभाग ने उसके पास से 1,45,50,800 रुपये के नए नोट, 1,48,88,133 रुपये का सोना, 4,92,96,314 रुपये की गोल्ड जूलरी, 1,39,34,580 रुपये की डायमंड जूलरी और 77,81,800 रुपये की चांदी की जूलरी जब्त की है। बैंकों और बड़े नेताओं के हाथ होने के शक के मद्देनजर मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।

सीबीआई सूत्रों ने कहा कि भजियावाला ने बाकीी लोगों की मदद से 12, 13 और 14 नवंबर को 1 लाख, 2 लाख और 4 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराए। एजेंसी के मुताबिक करीब 212 लोगों का इस्तेमाल पुराने नोटों को नए में बदलने के लिए किया गया था। सीबीआई को यह भी पता चला है कि सूरत कोअॉपरेटिव बैंक के सीनियर मैनेजर पंकज भट्ट भी कुछ लेनदेन में शामिल थे। इसके अलावा एक जांच 1.45 करोड़ की नई करंसी जब्त करने को लेकर भी चल रहा है। जांच अधिकारी अन्य बैंक खातों की भी पड़ताल कर रहे हैं जिनके जरिए काला धन ठिकाने लगाया गया।

आपको बता दें कि नोटबंदी के बाद से लगातार आयकर विभाग और ईडी एेसे लोगों पर छापे मार रही है जो कालेधन को ठिकाने लगाने में लगे हैं। 23 दिसंबर को दिल्ली में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में सर्राफा व्यापारियों पर छापेमारी की थी। शुरुआती रिपोर्ट में सामने आया था कि व्यापारियों ने 250 करोड़ रुपये के सोने की बेहिसाब की बिक्री की है।

8 नवंबर को नोटबंदी का फैसले आने बाद तीन अलग-अलग मामलों में आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व खुफिया निदेशालय ने पाया था कि राजधानी में 400 करोड़ रुपये के सोने की बेहिसाब बिक्री की है। 23 दिसंबर को जब आयकर विभाग ने करोल बाग और चांदनी चौक के चार सर्राफा व्यापारियों से पूछताछ की तो सामने आया कि उन्होंने कथित तौर पर पिछले कुछ हफ्तों में बंद हो चुके नोटों को सोने की गिन्नियों से बदला था, जिनकी कीमत 250 करोड़ रुपये है। शुक्रवार रात यह छापेमारी सर्राफा व्यापारियों की 12 दुकानों और 8 रिहायशी परिसरों में चली थी।

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