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दलित वोट बैंक को संजोने की कोशिश में मायावती

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से बहुजन समाज पार्टी की राष्टीय अध्यक्ष दलित वोट बैंक के हाथ से फिसलने की आशंका से ग्रस्त हैं।
Author लखनऊ | January 29, 2016 00:49 am
मायावती ने कहा, ‘महिला उम्मीदवारों की शारीरिक पैमाइश का काम पुरुषों से कराना सिर्फ आपत्तिजनक ही नहीं, बल्कि महिलाओं का शोषण और उत्पीड़न जैसा है।’

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से बहुजन समाज पार्टी की राष्टीय अध्यक्ष दलित वोट बैंक के हाथ से फिसलने की आशंका से ग्रस्त हैं। वह इस आशंका को लेकर बेहद सचेत हैं कि बसपा का लोकसभा चुनाव सरीखा हश्र विधानसभा चुनाव में न हो। अपनी इसी आशंका पर विराम लगाने के लिए गुरुवार को लखनऊ में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के डा. भीमराव अंबेडकर के प्रति उमड़े प्रेम को दिखावा और छलावा तक करार दे डाला।

लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर मीडिया से मुखातिब मायावती ने भाजपा और सपा पर आरोप लगाए कि दोनों ही राजनीतिक दलों की सरकारों के दौरान देश व प्रदेश में दलितों के प्रति उत्पीड़न की वारदातों में इजाफा हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छह दिन पूर्व लखनऊ आने और डा. अंबेडकर के प्रति अपनी खास श्रद्धा प्रदर्शित करने को छलावा करार देते हुए मायावती ने कहा कि केंद्र में सरकार बनने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी की जातिवादी सोच नहीं बदली है। उनकी सरकार में दलितों के उत्पीड़न के सभी रिकार्ड टूटे हैं। केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि संविधान समीक्षा और आरक्षण की समीक्षा करने की ओट में आरक्षण समाप्त करने की साजिशें रची जा रही हैं।

केंद्र सरकार पर हमलावर दिख रहीं मायावती ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुमित्रा महाजन भी आरक्षण की मुखालफत करती नजर आ रही हैं। केंद्र सरकार को चेतावनी देने के अंदाज में बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जात-पांत पर आरक्षण समाप्त करना घातक कदम होगा। जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा की बात करना जातिवादी सोच का परिचायक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर दिख रही मायावती ने आरोप लगाये कि डा. अंबेडकर के सम्मान में प्रधानमंत्री बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं जबकि उन्हीं के एक मंत्री जनरल वीके सिंह दलितों के बारे में अनुचित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन उनके खिलाफ प्रधानमंत्री कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हैदराबाद के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या और उस पर प्रधानमंत्री के लखनऊ में भावुक होने की घटना का जिक्र करते हुए मायावती ने प्रधानमंत्री पर फिर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री को भावुक होकर घटना से पीछा छुड़ाना पड़ा। इस मामले में गठित न्यायिक जांच आयोग की जांच में यदि रोहित के परिजनों को न्याय नहीं मिला तो यह साबित हो जाएगा कि प्रधानमंत्री का इस मामले में भावुक होना राजनीति स्वार्थ ही था। सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में मिली सफलता के बाद भाजपा का डा. अंबेडकर के प्रति उमड़ा स्नेह ही मायावती की पेशानी पर बल पैदा कर रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद से दलित बस्तियों की तरफ भाजपा के रुख से सकते में आर्इं मायावती ने अपने पारंपरिक मतदाताओं को संदेश देने के लिए ही बार-बार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर आरोप मढ़े।

उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष किसी दलित को बनाने के कयासों पर बसपा सुप्रीमो ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि भाजपा अपना राष्टीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष किसी दलित को बना दे, उसके बाद भी दलित उनके प्रलोभन में आने वाला नहीं है। अपने लंबे संबोधन में मायावती ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, भाजपा की केंद्र में सरकार बनने के बाद अल्पसंख्यकों और दलितों पर अत्याचार के बढ़ने का जिक्र किया।

गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बसपा सुप्रीमो ने जिस तरह डा. भीमराव अंबेडकर पर अधिकार जताने को सपा और भाजपा का ऐसा करना महज छद्मावरण करार देने की कोशिश की, उससे साफ है कि उन्हें अपने पारंपरिक वोट बैंक के दरकने का खतरा अभी से सता रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष पर आरोप मढ़कर बसपा सुप्रीमो उत्तर प्रदेश में अपनी सियासी जमीन को बचा पाने में कितनी कामयाबी हासिल कर पाती हैं।

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