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NIT, IIT के बावजूद शिक्षा गुणवत्ता में बहुत कमी: राष्ट्रपति

छठी ईसा पूर्व से 12वीं सदी तक यानी तक्षशिला के सुनहरे दिनों से नालंदा के ढहने तक भारत उच्चतर शिक्षा का मुख्य केन्द्र था तथा भारतीय विश्वविद्यालयों ने शिक्षकों और छात्रों के रूप में दुनियाभर से प्रबुद्ध जनों को आकर्षित किया।
Author नई दिल्ली | September 5, 2016 23:38 pm
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी। (PTI File Photo)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार (5 सितंबर) को कहा कि आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों की मौजूदगी के बावजूद देश में शिक्षा की गुणवत्ता में ‘बहुत कमी’ है। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्रों के विदेशी संस्थानों में जाने के प्रवाह को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘जहां तक कैंपस भर्ती की बात है तो हमारे आईआईटी, हमारे एनआईटी अब तक शानदार रहे हैं।’ उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि इस आधारभूत ढांचे के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता में ‘बहुत कमी’ है। इस कार्यक्रम में देशभर के 364 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुखर्जी ने कहा, ‘जब तक हमारे पास शिक्षा में गुणवत्ता नहीं होगी, आप ज्ञान वाले समाज को नहीं बना सकते। जब तक आप ज्ञान वाला समाज नहीं बना सकते, आप राष्ट्रों के सामने अपनी सही जगह हासिल नहीं कर सकते।’ उन्होंने कहा कि छठी ईसा पूर्व से 12वीं सदी तक यानी तक्षशिला के सुनहरे दिनों से नालंदा के ढहने तक भारत उच्चतर शिक्षा का मुख्य केन्द्र था तथा भारतीय विश्वविद्यालयों ने शिक्षकों और छात्रों के रूप में दुनियाभर से प्रबुद्ध जनों को आकर्षित किया।

मुखर्जी ने कहा, ‘आज, हर साल 60 हजार से अधिक छात्र उच्चतर शिक्षा के लिए हमारा देश छोड़कर आक्सफोर्ड, कैंब्रिज, एमआईटी आदि जाते हैं। हमें यह प्रवाह पलटना होगा।’ उन्होंने कहा कि इस प्रवाह में बदलाव केवल विश्वविद्यालयों में नहीं हो सकता बल्कि बुनियादी स्तर पर शुरूआती होनी चाहिए। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा उच्चतर शिक्षा का आधार है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने देश के लिए सामाजिक जिम्मेदारी के संदर्भ में बड़ा योगदान दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर, मंत्रालय के राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा तथा महेंद्र नाथ पांडेय भी इस मौके पर मौजूद थे। अपने भाषण में मुखर्जी ने कहा कि वह 30 एनआईटी, 16 आईआईटी, 45 विश्वविद्यालय, प्रबंधन संस्थान आदि सहित 114 केन्द्रीय संस्थानों के ‘विजिटर’ हैं।

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