December 03, 2016

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बैंकिंग कारोबार ठप, सात दिनों से एक भी चेक नहीं हुआ क्लीयर

सात दिनों से अपना व्यापार करने के बजाए रोजाना के इस्तेमाल के लिए रकम बैंकों से निकलवाने की कवायद में लगे हैं।

Author नई दिल्ली | November 16, 2016 03:52 am
नोएडा में आईसीआईसीआई बैंक के बाहर नए नोट के लिए खड़े लोग। (AP Photo/File)

दिल्ली में पिछले सात दिनों से नए नोटों को लोगों तक पहुंचाने की वजह से अन्य बैंकिंग कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं। कई बैंकों के कर्मचारियों का कहना है कि बैंकों में बीते सात दिन से एक भी चेक की क्लीयरिंग नहीं की गई है। नई करंसी लेने के अलावा अन्य किसी काम से बैंक जाने वाले आम लोग शाखा के भीतर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। कतार में लगे लोगों का कहना है कि मौजूदा समय में राजधानी की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। लोग बैंकों से नए नोट निकलवाने के अलावा एफडीआर, लोन लेने, नए खाते खुलवाने, खाते बंद करवाने के अलावा चेक बुक आदि विभिन्न कामों से जाते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि किसी भी बैंक में पिछले सात दिन से ये काम नहीं हो पाए है। बैंककर्मियों भी सिर्फ करंसी बदलने के काम में लगाया गया है।

पिछले सात दिनों से बैंकों में चेक क्लियरिंग न होने के कारण आम लोगों के अलावा राजधानी के कारोबारियों का बुरा हाल है। उनके आगे अब व्यापारिक दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। मयूर विहार निवासी रजनी ने बताया कि स्थानीय बैंक आॅफ इंडिया में उनका एफडीआर है, जिसकी अवधि पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वह चार दिनों से प्रयास में लगी हैं कि बैंक जाकर एफडीआर की रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा लें लेकिन वह बैंक के भीतर ही नहीं जा पा रहीं है। यही स्थिति पटपड़गंज के संजीव की है। उनका कहना है कि उनके पिता को बैंक से हाउसिंग लोन लेना है। वे उसके लिए विभिन्न बैंकों में बातचीत करने के लिए जाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन सात दिन से बैंकों की जो स्थिति है उसकी वजह से उन्होंने यह विचार आगे के लिए टाल दिया है। राजौरी गार्डन की निशा के चेकबुक खत्म हो चुके हैं लेकिन वह बैंक के भीतर नहीं जा पा रहीं। अब समस्या है यह है कि उन्हें पैसों की आवश्यकता है और चेक भी खत्म हो चुके हैं। दिल्ली के व्यापारी नेता अशोक अरोड़ा ने कहा कि बैंकों से व्यापारिक भुगतान बंद हो गई है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर बैंकों में पिछले सात दिन से चेकों की क्लीयरिंग नहीं हुई है। अरोड़ा ने कहा कि व्यापार से संबंधित चेकों की क्लियरिंग बंद होने से राजधानी का व्यापार पूरी तरह से चौपट हो गया है।

कश्मीरी गेट के व्यापारी अशोक कुमार ने कहा कि वह पिछले सात दिनों से अपना व्यापार करने के बजाए रोजाना के इस्तेमाल के लिए रकम बैंकों से निकलवाने की कवायद में लगे हैं। उन्होंने बताया कि उनक ी दुकान पर काम करने वाले पांच कर्मचारी भी इसी काम में लगे हैं। वे उन्हें रोजाना सुबह बैंकों में कैश निकलवाने के लिए भेजते हैं। उनके कर्मचारी बैंकों की लाइनों में लगकर रोजाना इतनी रकम जुटा लेते हैं, जिससे उनका रोजाना का खर्च का काम पूरा हो रहा है।

नेशनल आॅर्गनाजेशन आॅफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा कि सरकार को नोटों के बदलाव के लिए सार्वजनिक क्षेत्रों की विभिन्न इलाकों में नई व्यवस्था करनी होगी। राणा ने कहा कि सरकार को इस काम के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भी सेवाएं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि काफी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी इस काम के लिए अपनी सेवाएं देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों में नोट गिनने वाली मशीनें भी कम हैं। ज्यादातर एक बैंक में सिर्फ एक ही मशीन है, जो नोटों की गिनती कर सके। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैंक में नोटों की गिनती करने वाली कम से कम दो मशीनें तो होनी ही चाहिए।

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First Published on November 16, 2016 3:52 am

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