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बांग्‍लादेश की चेतावनी- रोहिंग्‍या मुसलमानों का पलायन रोका नहीं गया तो भारत सहित संपूर्ण क्षेत्र के ल‍िए होगा खतरा

पिछले दो दशकों में बांग्लादेश में लगभग 4,00,000 रोहिंग्या मुसलमानों ने शरण ले ली थी।
25 अगस्त को रोहिंग्या मुसलमानों ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इस लड़ाई में कई पुलिस वाले घायल हुए, इस हिंसा से म्यांमार के हालात और भी खराब हो गए। (फाइल फोटो)

म्यांमार से रोहिंग्‍या मुसलमानों का पलायन जारी है। इस पर बांग्लादेश के राजदूत ने कहा कि अगर रोहिंग्‍या मुसलमानों का पलायन रोका नहीं गया तो भारत सहित संपूर्ण क्षेत्र के ल‍िए खतरा होगा। इससे भारत के उग्रवाद प्रभावित पूर्वोत्तर राज्यों समेत पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की चिंता हो सकती है। हिंदुस्तान टाइम्स से बांग्लादेश के उच्चायुक्त सईद मौज्जम अली ने कहा कि बांग्लादेश भारत को एक रीजनल पावर के रूप में देख रहा है। वह म्यांमार से पलायन कर गए रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन को रोकने और पलायन कर गए लोगों की स्वदेश वापसी में बड़ी भूमिका निभाएगा। पिछले दो दशकों में बांग्लादेश में लगभग 4,00,000 रोहिंग्या मुसलमानों ने शरण ले ली थी। उनकी संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। 25 अगस्त को रोहिंग्या मुसलमानों ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इस लड़ाई में कई पुलिस वाले घायल हुए, इस हिंसा से म्यांमार के हालात और भी खराब हो गए।

उच्चायुक्त ने कहा कि मैं अपने क्षेत्र के बारे में ज्यादा चिंतित हूं, लेकिन कहीं और रोहिंग्या शरणार्थियों की मौजूदगी सभी के लिए सुरक्षा जोखिम हो सकती है। यह पूर्वोत्तर भारत में भी सुरक्षा के लिए जोखिम हो सकता है। अली ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों ने अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी के साथ संबंध स्थापित किए थे। विभिन्न संगठन इस क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि आप उन अस्थिरता वाले कारकों के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। हम पिछले चार दशकों से इस पर काम कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर भारत यहां तक के संदर्भ में भी इसे सुरक्षा के लिए खतरा बताया। 25 अगस्त को राखीन हमलों का हवाला देते हुए अली ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आतंकवाद के लिए जीरो टॉलरेंस दिखाई है। बांग्लादेश ने म्यांमार के साथ सीमा पर संयुक्त गश्ती करने के लिए भी पेशकश की थी, ताकि आतंकवादी न बच सकें। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में भी कहा गया था कि भारतीय और बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों ने म्यांमार को संभावित हमलों के बारे में सतर्क कर दिया था। इसके बाद आतंकवादियों के कुछ संदिग्ध कॉल और आंदोलनों को रोक लिया गया।

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