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बाबरी मामला: राम विलास वेदांती, चंपत राय के साथ तीन और लोगों ने किया CBI कोर्ट में सरेंडर

राम विलास वेदंती, चंपत राय, बीएल शर्मा, महंत नृत्य गोपाल दास और धर्मेंदास ने लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में शनिवार (20 मई) को सरेंडर किया।
Author May 20, 2017 20:17 pm
प्रतीकात्मक चित्र

अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने के आपराधिक मामले में आज महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चपंत राय बंसल एवं धर्मदास ने सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में आत्मसमर्पण कर दिया। विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने सभी मुल्जिमों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। इन्हें 20 हजार रूपये की जमानत और इनती ही धनराशि का निजी मुचलका दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया।

उच्चतम न्यायालय द्वारा 19 अप्रैल को पारित आदेश के बाद अयोध्या प्रकरण की विशेष अदालत ने छह मुल्जिमों को तलब किया था। विशेष अदालत के इसी आदेश के अनुपालन में आज इन पांच मुल्जिमों ने आत्मसमर्पण किया जबकि एक मुल्जिम डा. सतीश प्रधान हाजिर नहीं हो सके। सीबीआई के विशेष वकील आर के यादव, पूर्णनेन्दु चक्रवर्ती और ललित सिंह के मुताबिक अब मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

उल्लेखनीय है कि दो दिंसबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई थी। सीबीआई ने जांच के बाद इस मामले में कुल 49 मुल्जिमों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। बालासाहेब ठाकरे, कल्याण सिंह, महंत परमहंस रामचंद दासजी, महंत अवैद्यनाथ, महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, सतीश नागर, मोरेसर सवे, सतीश प्रधान, चंपत राय बंसल व महामंडलेश्वर जगदीश मुनि जी महाराज समेत कुल 13 मुल्जिमों को अदालत ने आरोप के स्तर पर ही बरी कर दिया था।

इस आदेश को सीबीआई की तरफ से पहले उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में फैजाबाद के तत्कालीन जिलाधिकारी आर एन श्रीवास्तव, जयभान सिंह पवैया, आचार्य धर्मेंद्र देव व सुधीर कक्कड़ समेत कुल 28 मुल्जिमों के मुकदमे की कार्यवाही शुरु हो गई।

हालांकि, अब तक इनमें से छह मुल्जिमों की मुकदमे के दौरान ही मौत हो चुकी है। शेष मुल्जिम लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, विहिप के चेयरमैन अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया व साध्वी रितंभरा समेत आठ मुल्जिमों के मामले की कार्यवाही रायबरेली की विशेष अदालत में चलने लगी। इनमें अशोक सिंघल व गिरिराज किशोर का निधन हो चुका है।

उच्चतम न्यायालय ने 19 अप्रैल को सीबीआई की विचाराधीन एसएलपी का निपटारा करते हुए विस्तृत आदेश पारित किया। न्यायालय ने रायबरेली की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में स्थानांतरित कर दिया।

न्यायालय ने कहा कि लखनऊ की विशेष अदालत दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर दो साल में मुकदमे का निस्तारण करेगी। सीबीआई के विशेष वकील पूर्णनेन्दु चक्रवर्ती के मुताबिक उच्चतम न्यायालय ने इसके साथ ही विशेष अदालत से आरोप के स्तर पर ही बरी किए गए मुल्जिमों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय के इसी आदेश के अनुपालन में सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने मुल्जिमों को तलब किया था।

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