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चरम पर तनाव के बाद पीछे हटने लगे चीनी सैनिक

लेह/नई दिल्ली। पूर्वोत्तर लद्दाख के चुमार क्षेत्र में चार दिनों तक चरम पर रही तनाव की स्थिति के बाद गुरुवार रात चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र से पीछे हटना शुरू कर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक रात नौ बजकर 45 मिनट से अपने क्षेत्र में लौटने लगे। […]
Author September 19, 2014 09:37 am
दोनों देशों के गड़रियों को मैदान में आने-जाने की इजाजत होती है। (FILE PHOTO)

लेह/नई दिल्ली। पूर्वोत्तर लद्दाख के चुमार क्षेत्र में चार दिनों तक चरम पर रही तनाव की स्थिति के बाद गुरुवार रात चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र से पीछे हटना शुरू कर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि चीनी सैनिक रात नौ बजकर 45 मिनट से अपने क्षेत्र में लौटने लगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद लेह से 300 किमी दूर पूर्व के इस क्षेत्र में भारी संख्या में मौजूद भारतीय सैनिकों ने भी अपनी उपस्थिति को कम करना शुरू कर दिया।

सूत्रों ने बताया कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है क्योंकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास डेरा डाले हुए है और स्थिति की शुक्रवार को समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि बहरहाल, देमचक में आमना-सामना की स्थिति बनी हुई है जहां चीनी खानाबदोश ‘रेबो’ पिछले 12 दिनों से तंबू लगाए हुए हैं। इस क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र में 500 मीटर अंदर घुसपैठ हुई है।
चीनी खानाबदोश पीएलए की, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा सिंचाई के लिए एक नहर के निर्माण का विरोध करने में सक्रियता से मदद कर रहे हैं। देमचक और चुमार में तानातनी की स्थिति का प्रभाव गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच शिखर स्तर की वार्ता पर भी पड़ी।

सूत्रों ने बताया कि चीनी पक्ष ने गुरुवार तड़के अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि करनी शुरू कर दी थी जो बैनर लिए हुए थे जिनमें भारतीय सेना से इलाके से चले जाने को कहा गया था। इस क्षेत्र में चीनी सैनिकों की संख्या बढ़कर 600 हो गई थी। उन्होंने कहा कि चीनी हेलिकॉप्टरों को पीएलए के सैनिकों के लिए कम से कम तीन बार भोजन के पैकेट गिराते देखा गया। भारत ने भी इलाके में कुमुक भेजी है और चीनी सैनिकों को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है और उनसे पीछे हटने को कहा गया है। चीनी पक्ष एलएसी के पास अपनी ओर सड़क का निर्माण कर रहा है लेकिन रविवार को उसके श्रमिक निर्माण कार्य के लिए भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर गए।

सूत्रों ने बताया कि इस पर भारत ने ऐतराज जताया था क्योंकि चीनी कामगार यह कह रहे थे कि उन्हें तिबले तक सड़क बनाने के निर्देश हैं जो भारतीय भूमि में पांच किलोमीटर अंदर है। सेना ने चीनी कामगारों से कहा कि वे वहां से हट जाएं अन्यथा भारत में अवैध रूप से घुसने को लेकर उन्हें भारतीय कानूनों के तहत अभियोजन का सामना करना पड़ेगा। रविवार और सोमवार के बीच की रात करीब 100 भारतीय सैनिकों को 300 चीनी सैनिकों ने कथित तौर पर घेर लिया जिसके बाद गतिरोध शुरू हो गया जो अभी तक जारी है।

भारत ने इस क्षेत्र में कुमुक भेजी है और वे चीनी सैनिकों को आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं और उनसे पीछे लौटने को कह रहे हैं। भारतीय और चीनी सेना एक-दूसरे से 200 मीटर की दूरी पर आमने-सामने हैं। सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को कोई फ्लैग मीटिंग नहीं हुई और चीनी पक्ष ने स्वत: ही पीछे लौटने का फैसला किया। दोनों देशों ने अभी तक दो फ्लैग मीटिंग की हैं जिसमें बुधवार की लंबी चर्चा शामिल है जो कई घंटों तक चली, पर वह बेनतीजा रही।
हिमाचल प्रदेश से लगे लद्दाख में चुमार आखिरी गांव है जो चीन के साथ विवाद की जड़ है, जिसे चीन अपना क्षेत्र होने का दावा करता है। पीएलए ने 2012 में क्षेत्र में अपने कुछ सैनिक इस क्षेत्र में उतारे थे। सेना व आइटीबीपी के अस्थायी तंबुओं को नष्ट कर दिया था। दौलत बेग ओल्डी में पिछले साल करीब पखवाड़े भर चले गतिरोध में चुमार चर्चा के केंद्र में रहा। सत्रह जून को भी चुमार में चीनी सैनिकों की चहलकदमी देखी गई थी।

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