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2G स्पेक्ट्रम आवंटन में सिब्बल पर बरसे जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2002 के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा कि सीबीआई..
Author नई दिल्ली | October 16, 2015 01:27 am
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2002 के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा कि सीबीआई ने इस मामले में आरोप पत्र सिब्बल ‘की ओर से’ दायर किया था। (फोटो-पीटीआई)

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2002 के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा कि सीबीआई ने इस मामले में आरोप पत्र सिब्बल ‘की ओर से’ दायर किया था। एक विशेष अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा दायर आरोप-पत्र ‘‘मनगढ़ंत तथ्यों’’ से भरा करार देते हुए मामले को खारिज कर दिया।

जेटली ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘एक ईमानदार नौकरशाह और अन्य लोगों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों के लिए अधिकारी निश्चित तौर पर दोषी हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह आरोप पत्र संप्रग सरकार में दूरसंचार मंत्री श्री कपिल सिब्बल की ओर से दायर किया गया था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब दूरसंचार क्षेत्र घोटालों से परेशान था तब श्री कपिल सिब्बल ने अपनी पसंद के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का चयन किया और उनसे कहा कि वह दूरसंचार में ‘राजग के घोटाले’ का खुलासा करें।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश की राय थी कि अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए ‘स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क’ तय करने में कुछ मनमानी हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘एक बेहतरीन और ईमानदार नौकरशाह श्यामल घोष के खिलाफ नहीं टिकने वाला आरोप पत्र दायर किया गया। स्वर्गीय प्रमोद महाजन को कॉलम-2 में मृत आरोपी के तौर पर शामिल करके राजग सरकार पर निशाना साधने का विचार था।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने निरंतर यह बात कही है कि यह आरोप पत्र पूरी तरह मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित थी। उन्होंने कहा, ‘‘हम जो कहते आ रहे थे अदालत ने उसकी पुष्टि की है। सीबीआई के जिन अधिकारियों ने राजनीतिक सरकार के फरमान पर काम किया उन्हें अब जांच का सामना करना होगा। परंतु उन मंत्रियों के बारे में क्या जिन्होंने एक मनगढ़ंत आरोप पत्र तैयार करने की साजिश रची तथा एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने अवकाश ग्रहण करने के बाद काम की खातिर इसके लिए अपने कार्यालय का इस्तेमाल होने दिया?’’

सीबीआई को एक तगड़ा झटका देते हुए विशेष सुनवाई अदालत ने 2002 के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामले में पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष और तीन दूरसचांर कंपनियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि जांच एजेंसी द्वारा दायर आरोप-पत्र ‘ऊटपटांग और मनगढ़ंत तथ्यों’’ से भरा है और एजेंसी ने अदालत को गुमराह किया है।

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