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नोटबंदी: जेटली ने क‍िया सरकार का बचाव, बोले- चुनाव में कालाधन नहीं उड़ा पाएंगे नेता

जेटली ने फिर दावा किया कि नोटबंदी की वजह से जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में आतंकवादी और उग्रवादी तत्वों पर लगाम लगाया जा सका है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

नरेंद्र मोदी कैबिनेट के विस्तार की खबरों के बीच केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने उम्मीद जताई है कि वो अब लंबे समय तक रक्षा मंत्री नहीं रहेंगे। नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जेटली से जब पत्रकारों ने पूछा कि रक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल कितना लंबा होगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “उम्मीद करता हूं कि मैं अब इस पद पर लंबे समय तक नहीं रहूंगा।” जेटली ने कहा कि मोदी सरकार का अगला कदम चुनाव में इस्तेमाल होने वाले काले धन को समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रस्ताव अंतिम चरण में है और उस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

जेटली ने फिर दावा किया कि नोटबंदी की वजह से जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में आतंकवादी और उग्रवादी तत्वों पर लगाम लगाया जा सका है। उन्होंने कहा कि पैसे की कमी की वजह से घाटी में अलगाववादियों द्वारा पत्थरबाजी की घटनाएं थमी हैं। जेटली ने कहा, “पहली बार ऐसा हुआ है कि रिजर्व बैंक ने प्रत्येक नोट की छानबीन की है। इसने असली और नकली नोटों की पहचान करने और उनमें अंतर करने में मदद की है।” उन्होंने कहा कि नोटबंदी का निचोड़ यह है कि अब आतंकवादी तत्वों को अपने लिए समर्थन जुटाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त नकदी के बिना पहले की अपेक्षा अब पत्थरबाजों को इकट्ठा करना मुश्किल है।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने बुधवार (30 अगस्त) को नोटबंदी के करीब 10 महीने बाद इससे जुड़ा पहला आंकड़ा जारी किया था। केंद्रीय बैंक ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस मूल्‍य के नोटों (500 और 1,000 रुपये) का चलन पिछले साल 8 नवंबर को रात 8 बजे बंद किया था, उसके 98.7 फीसदी नोट केंद्रीय बैंक के पास वापस आ गए हैं। आरबीआई के मुताबिक, 30 जून, 2017 तक 15.28 ट्रिलियन रुपयों के मूल्‍य वाले 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट वापस आ गए हैं।

नोटबंदी के समय 1,000 रुपये के 6.7 बिलियन नोट्स प्रचलन में थे, जिसमें से सिर्फ 89 मिलियन नोट ही वापस नहीं लौटकर आए। हालांकि, इसमें नेपाल में जमा हुए नोट्स और कॉपरेटिव बैंकों में जमा हुए नोट्स के आंकड़े शामिल नहीं हैं। बता दें कि नोटबंदी के बाद से ही केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक पर यह बताने का दबाव था कि इससे कितने नोट उसके बाद वापस आए।

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