December 08, 2016

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7,000 करोड़ रुपए बट्टे खाते में डालना कर्ज माफी नहीं : जेटली

बट्टे खाते में डाला जाना कर्ज माफी नहीं है। कर्ज अभी कायम है। इसे अभी भी वसूला जाएगा।

Author नई दिल्ली | November 17, 2016 03:15 am
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली। (AP Photo/File)

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) द्वारा विजय माल्या प्रवर्तित किंगफिशर एअरलाइंस सहित करीब 7,000 करोड़ रुपए के कर्ज को बट्टे खाते में डालने के विवाद के बीच सरकार और बैंक दोनों ने बुधवार को इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि यह कर्ज माफ करना नहीं। उन्होंने कहा कि कर्ज लेने वालों पर देनदारी कायम है।  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सदस्य सिर्फ ‘बट्टे खाते’ के अर्थ पर न जाएं। उन्होंने कहा कि बट्टे खाते में डाला जाना कर्ज माफी नहीं है। कर्ज अभी कायम है। इसे अभी भी वसूला जाएगा। जेटली माकपा नेता सीताराम येचुरी के सवाल का जवाब दे रहे थे। येचुरी ने अखबार में छपी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एसबीआइ ने जानबूझ कर चूक करने वालों का कर्ज बट्टे खाते में डाला है। इसमें किंगफिशर एअरलाइंस का 1,200 करोड़ रुपए का कर्ज भी शामिल है। आनंद शर्मा ने भी अपने संबोधन में यह मुद्दा उठाया।

जेटली ने कहा, ‘इसका मतलब कर्ज को समाप्त करना नहीं है। हम कर्ज वसूलेंगे। खातों में इसकी प्रविष्टि को सिर्फ गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में डाला गया है।’ एसबीआइ की चेयरमैन अरूंधति भट्टाचार्य ने भी 63 जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वालों के कर्ज को बट्टे खाते में डालने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि इन्हें विभिन्न मदों में डाला गया है और ऐसे डिफाल्टरों से कर्ज वसूली का प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि कर्ज लेने वालों को कोई रियायत नहीं दी जा रही है। पूरा कर्ज वसूलने के लिए प्रक्रिया जारी है। बट्टे खाते में डालना एक तकनीकी शब्द है। आम आदमी की भाषा में इस शब्द को लेकर समझ भ्रम पैदा करती है।

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First Published on November 17, 2016 3:15 am

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