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संविधान असहमति की आज़ादी देता है, देश विनाश की नहीं: अरुण जेटली

कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए अरुण जेटली ने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी की हालत आज यह हो गई है कि वह चुनावों में कुछ कर सकने की अपनी ‘‘महत्वकांक्षा’ तक खो कर अन्य दलों की ‘‘पूंछ’’ भर बन कर रह गई है।
Author नई दिल्ली | March 20, 2016 17:23 pm
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते वित्त मंत्री अरुण जेटली। (पीटीआई फाइल फोटो)

भाजपा ने रविवार (20 मार्च) को कहा कि संविधान असहमति और अभिव्यक्ति की पूर्ण आजादी देता है लेकिन राष्ट्र के विनाश की नहीं। उसने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद के बीच आवश्ययक सह-अस्तित्व है और ‘भारत माता की जय’ कहना बहस का मुद्दा नहीं हो सकता है। यह नारा लगाने में किसी को कठिनाई नहीं होनी चाहिए। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यहां हो रही बैठक के दूसरे दिन उसके बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘‘भाजपा का मानना है कि ‘भारत माता की जय’ कहना बहस का मुद्दा नहीं होना चाहिए। राष्ट्रवाद की विचारधारा हमारी आस्था और दिशा को निर्देशित करती है और हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूर्ण समर्थन करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत का संविधान असहमति की पूर्ण स्वतंत्रता देता है। लेकिन राष्ट्र के विनाश की नहीं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद के बीच आवश्यक सहअस्तित्व है। हमारा मानना है कि यह ऐसा मुद्दा है जिस पर बहस नहीं होनी चाहिए। जहां तक इस नारे का संबंध है, भारत के लोगों को इसे लेकर किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

यह विवाद एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी के कुछ दिन पहले यह कहने से हुआ कि वह ‘जय हिन्द’ कहेंगे लेकिन अगर उनकी गर्दन पर कोई छुरी रख कर भी ‘भारत माता की जय’ बोलने को कहेगा, तो वैसा नहीं कहेंगे। जेएनयू विवाद पर जेटली ने कहा कि वहां राष्ट्रविरोधी नारे लगे लेकिन ऐसा करने वालों में अति वामवादी अग्रणी थे। उन्होंने कहा, इसके लिए अल्पसंख्यकों पर आरोप लगाना गलत होगा। इसकी अगुवाई अति वामवादियों ने की थी।

कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी की हालत आज यह हो गई है कि वह चुनावों में कुछ कर सकने की अपनी ‘‘महत्वकांक्षा’ तक खो कर अन्य दलों की ‘‘पूंछ’’ भर बन कर रह गई है। उन्होंने कहा कि बिहार में उसने यह किया और अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी यही करने जा रही है।

जेटली ने दावा किया कि पांच राज्यों में जल्द ही होने जा रहे विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी अपनी उपस्थिति बढ़ा कर असम में जहां सरकार बनाएगी वहीं केरल और पश्चिम बंगाल की राजनीति का रुख बदल देगी। कार्यकारिणी की बैठक में पांचों राज्यों में पार्टी की चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं।

राज्यसभा में अल्पमत का सामना कर रही सत्तारूढ़ भाजपा इन विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करके इस स्थिति को बदलने की जी तोड़ कोशिश में है। उच्च सदन में अल्पमत के कारण मोदी सरकार के जीएसटी सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक अटके हुए हैं।

उत्तराखंड में कांग्रेस नीत सरकार में आए संकट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने के राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जेटली ने कहा, ‘‘इसका इल्जाम भाजपा को नहीं दिया जा सकता है। यह कांग्रेस का अंदरूनी संकट है। विधानसभा में उन्हीं के सदस्यों ने वित्तीय विधेयक के खिलाफ मत दिया।’’

राजनीतिक प्रस्ताव में दावा किया गया कि पूर्व के कथित दिशाहीन संप्रग शासन के स्थान पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में प्रतिबद्ध नेतृत्व और राष्ट्रवादी नीतियों वाली एक प्रगतिशील सरकार चल रही है। प्रस्ताव में कहा गया ‘‘एक समय था जब देश बिना किसी दिशा के शासित हो रहा था। उस समय अनिश्चितता थी और कोई उद्देश्य नहीं था। अब हमारे पास एक ऐसी सरकार है जिसके पास मजबूत इरादों वाला नेतृत्व है। राष्ट्रवादी नीतियों वाला एक प्रगतिशील शासन है।’’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले दलित वोटरों को रिझाने का प्रयास करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि मोदी सरकार दलित व्यवसायियों को एक संस्था के रूप में खड़ा करने का प्रयास कर रही है। वह दलितों को केवल रोजगार ही नहीं देना चाहती है बल्कि उन्हें रोजगार देने वाला भी बनाना चाहती है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के बारे में इसमें इस बात की तारीफ की गई कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों का सफाया करते हुए अपनी कार्रवाई में इस बात का ध्यान रखा कि कम से कम क्षति हो। सरकार की कुशलता के रूप में नगा समझौते, भारत-बांग्लादेश भूमि समझौते और पूर्व सैनिकों के एक रैंक एक पेंशन समझौते का उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद सरकार की व्यावहारिक नीतियों के चलते भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गई है। सरकार की उपलब्धियों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने को भी गिनाया गया।

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