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मुशायरे में बोले देश के नामी शायर: भारत-पाक में तनाव के बीच जारी रहने चाहिए कलाकारों के दौरे

कार्यक्रम में मौजूद शायरों ने तनाव के बावजूद भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की वकालत की।
Author नई दिल्ली | April 15, 2017 19:22 pm
जावेद अख्तर। (फाइल फोटो)

भारत-पाक में बढ़ते तनाव के बीच प्रमुख उर्दू शायरों का मानना है कि राजनीति के दायरे से अलग हटकर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कलाकारों के दौरे जारी रहने चाहिये।  बीती शाम यहां हुये ‘मुशायरा जश्न-ए-बहार’ से इतर कई उर्दू शायरों ने यह इच्छा जतायी। जावेद अख्तर समेत कई शायरों ने श्रोताओं से भरे इस मुशायरे में शेर और नज्मों से लोगों की खूब वाहवाही बटोरी।  इस साल इस सालाना मुशायरे का यह 19वां साल था और यह पहला मौका था जब भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव की वजह से इसमें किसी पाकिस्तानी शायर ने शिरकत नहीं की।  इस मुशायरे का आयोजन करने वाले गैर सरकार संस्था जश्न-ए-बहार ट्रस्ट के संस्थापक कामना प्रसाद पाकिस्तानी शायरों की गैर मौजूदगी की वजह उस ‘गणित’ को बताया कि इसमें कितने शायरों को आमंत्रित किया जा सकता है और ट्रस्ट का उद्देश्य उन जगहों के शायरों को बुलाना होता है जहां उर्दू में लोगों का रूझान बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद शायरों ने तनाव के बावजूद भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की वकालत की।  शायर इस बात पर सहमत थे कि पाकिस्तान से शायरों को मौजूदा हालात में किसी आयोजन के लिये बुलाना मुसीबत से कम नहीं।  कार्यक्रम से इतर ‘पॉपुलर मेरठी’ के नाम से मशहूर शायर सैयद एजाजुद्दीन शाह ने कहा, ‘‘जब पाकिस्तानी शायर आते थे तो यह विशाल सम्मेलन हुआ करता था। उन्हें अब बुलाया जाता है तो माहौल असहज हो जायेगा, लोग इसका विरोध करने लगेंगे।’’ शाह के सुर से सुर मिलाते हुये मुंबई के युवा उर्दू शायर हुसैन हैदरी ने कहा कि संस्कृति और सियासत को अलग-अलग रखा जाना चाहिये।

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