December 08, 2016

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टाइम्‍स नाउ का 60 फीसदी संसाधन अपने एक शो के लिए इस्‍तेमाल करते थे अरनब गोस्‍वामी, इसी से आता था 20% रेवन्‍यू

2012 में ही, अरनब को सालाना दो करोड़ रुपए बतौर वेतन मिलता था। चैनल में बिना उनकी इजाजत के पत्‍ता तक नहीं हिलता था।

टीवी पत्रकार अर्नब गोस्‍वामी।

वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार अरनब गोस्‍वामी ने मंगलवार को टाइम्‍स नाउ के एड‍िटर-इन-चीफ पद से इस्‍तीफा दे दिया था। वजह साफ नहीं हुई मगर कहा जा रहा है कि वे अपना कुछ करने की तैयारी में हैं। टाइम्‍स नाउ में आखिरी बैठक में अपने सहयोगियों से उन्‍होंने इस बात का जिक्र किया कि किस तरह उन्‍होंने चैनल को बुलंदियों तक पहुंचाया। टाइम्‍स नाउ ने 2007 में जब प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़कर साप्‍ताहिक रेटिंग्‍स में नंबर वन पोजिशन हासिल की, तो अरनब गोस्‍वामी ने केक काटकर सेलि‍ब्रेट किया था। तब उन्‍होंने कहा था, मुझे रेटिंग्‍स की परवाह नहीं, लेकिन हम नंबर वन हैं।” लेकिन अंदरखाने ‘मीठी छुरी’ कहे जाने वाले अरनब को रेटिंग्‍स की इतनी परवाह थी कि उन्‍होंने खबरों के प्रोडक्‍शन की हर विधा पर अपना नियंत्रण किया। उन्‍होंने फ्लैशिंग पैनल्‍स, ऑन-स्‍क्रीन फॉन्‍ट्स में मनमुताबिक बदलाव किए। यहां तक कि कैमरामैन को भी बताया जाता था कि उसे किस एंगल से शूट करना है। टाइम्‍स नाउ का एडिटर-इन-चीफ बनने से पहले अरनब एनडीटीवी में थे। टाइम्‍स नाउ में आने के बाद गोस्‍वामी ने खुलकर पुराने संस्‍थान को ‘सफेद हाथी’ बताया। टाइम्‍स नाउ के लाइव होने से एक महीने पहले जब, राजदीप सरदेसाई ने सीएनएन-आईबीएन शुरू किया तो गोस्‍वामी और उनकी टीम नर्वस थी। महज 33 साल की उम्र में संपादक बने अरनब ने दिन में सामान्‍य और व्‍यापार की खबरें चलवाईं, रात में हल्‍के-फुल्‍के कार्यक्रम। यह प्रयोग अनूठा था, मगर दर्शक नहीं मिले। अरनब के साथ काम करने वाले एक पूर्व कर्मचारी ने बताया, ”किसी ने चैनल नहीं देखा। वह (अरनब) अपने शो पर दर्शक नहीं ला पाए। कोई उनसे बात नहीं करना चाहता था। उनके बड़े राजनेताओं से कोई संंबंध नहीं थे, न ही रिपोर्टर्स के। किसी ने हमें इंटरव्‍यू नहीं दिया।”

 वीडियो: 5 बहसें, जिन्‍होंने अरनब को बनाया स्‍टार पत्रकार

मगर, इसके बाद के सालों में गोस्‍वामी का प्राइम टाइम डिबेट शो ‘द न्‍यूजऑवर’ टाइम्‍स नाउ का सबसे ज्‍यादा देखा जाना वाला कार्यक्रम बना। करीब 60 से 120 मिनट के अरनब के कार्यक्रम को 2012 में बाकी सभी से ज्‍यादा दर्शक मिलने लगे। इसके विज्ञापन के रेट भी उस स्‍लॉट के लिए सबसे ज्‍यादा थे। अरनब का शो चैनल के लिए इतना जरूरी था कि एक वरिष्ठ प्रबंधक के मुताबिक, ‘चैनल के संपादकीय संसाधनों का 60 फीसदी द न्‍यूजऑवर के लिए इस्‍तेमाल किया जाता था।’ चैनल के राजस्‍व में अरनब के शो का योगदान कुल राजस्‍व का पांचवांं हिस्‍सा था। गाेस्‍वामी ने अपने स्‍टाफ को यह बताने में कसर नहीं छोड़ी कि उनका वेतन उनके शो से आता है। चैनल के तत्‍कालीन वरिष्‍ठ मैनेजर के अनुसार, विज्ञापन राजस्‍व से करीब 34 करेाड़ रुपए का वेतन दिया जाता था, जिसमें गोस्‍वामी का अपना 2 करोड़ रुपए सालाना वेतन शामिल होता था।

एक बार न्‍यूजऑवर के लिए दस सेकेंड का स्‍पॉट खाली था। इसलिए तत्‍कालीन संपादक महरुख इनयात ने अन्‍ना हजारे की भूख-हड़ताल की खबर चला दी। लेकिन कार्यक्रम खत्‍म होने के बाद अरनब को चेहरा गुस्‍से से लाल हो गया। वहां मौजूद दो वरिष्‍ठ संपादकों के अनुसार, अरनब ने इनायत को लताड़ लगाते हुए कहा, ”अन्‍ना हजारे चलाने की तुम्‍हारी हिम्‍मत कैसे हुई? कौन जानता है अन्‍ना हजारे को? यह देश अन्‍ना हजारे को नहीं जानता। तुमने उन्‍हें कवरेज क्‍यों दी?” लेकिन कुछ महीनों बाद ही अरनब का मन बदल गया। उन्‍होंने रविवार को अन्‍ना पर एक मिनट का सेगमेंट तैयार करने को कहा। बैठक में अरनब ने इसका कारण बताते हुए कहा, ”आपको पता है कि मुझे अन्‍ना हजारे पसंद नहीं। लेकिन जिस मुद्दे पर वह बात कर रहे हैं, वह अहम है। भ्रष्‍टाचार हर भारतीय से जुड़ा हुआ है, हम सभी इससे प्रभावित है। इसलिए हम अन्‍ना हजारे से एक अभियान बनाएंगे। मैं आज न्‍यूजऑवर पर बहस करूंगा, कल 12 से 1 के बीच हमारे सारे रिपोर्टर जंतर-मंतर पर होंगे। इस दौरान और कोई स्‍टोरी नहीं चलाई जाएगी।”

गोस्‍वामी चैनल की पहचान बनते जा रहे थे। अरनब ने डेस्‍क को अपने मुताबिक ढाला और रिपोर्टर्स से वही करवाया जो मुंबई डेस्‍क उनसे करने को कहती थी। जब कारवां मैगजीन ने अरनब का इंटरव्‍यू लेने के लिए उन्‍हें फोन किया तो उन्‍होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्‍हें खबर की रिपोर्ट‍िंग में दिलचस्‍पी है, खबर बनने में नहीं। बाद में चैनल के दो कर्मचारियों ने मुंबई और दिल्‍ली के स्‍टाफ को अपने इंटरव्‍यू से जुड़ी किसी भी तरह की रिक्‍वेस्‍ट लेने से साफ मना कर दिया था।

इस लेख का कुछ अंश कारवां मैगजीन के दिसंबर 2012 अंक में प्रकाशित रिपोर्ताज से लिया गया है।

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First Published on November 2, 2016 5:25 pm

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