December 05, 2016

ताज़ा खबर

 

रक्षा खरीद में ‘ब्लैक लिस्टिंग’ नीति को लेकर सेना में चिंता

सेना और वायुसेना को जिस तरह के हथियारों और साजो-सामान की तुरंत जरूरत है, उसमें कई कंपनियों से प्रतिबंध हटाने का सुझाव रक्षा मंत्रालय को दिया गया है।

Author नई दिल्ली | November 9, 2016 05:13 am
विवादास्पद अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर। (फाइल फोटो)

दीपक रस्तोगी

रक्षा सौदों में ‘ब्लैक लिस्टिंग’ नीति को हरी झंडी दिखाए जाने के साथ ही सेना ने चिंता जतानी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने पहले से चली आ रही नीति को थोड़ा लचीला बनाया है। फिर भी, किए गए प्रावधानों को सैन्य विशेषज्ञ अपर्याप्त मान रहे हैं। सेना और वायुसेना को जिस तरह के हथियारों और साजो-सामान की तुरंत जरूरत है, उसमें कई कंपनियों से प्रतिबंध हटाने का सुझाव रक्षा मंत्रालय को दिया गया है। कंपनियों की कारगुजारी के आधार पर नहीं, बल्कि हथियारों की मेरिट के संदर्भ में रक्षा सौदों की विवेचना की बात उठ रही है।

नई नीति का विस्तृत ब्योरा सोमवार को देर रात तक चली ‘रक्षा खरीद परिषद’ (डीएसी) की बैठक में तय कर लिया गया। इसे जल्द ही रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक करने के पहले इसमें कुछ और संशोधन हो सकते हैं। दरअसल, छोटे से छोटा रक्षा खरीद सौदा हजारों करोड़ का होता है। इसके लिए बड़ी कंपनियां अपने प्रतिनिधियों के लिए लॉबिंग करती रहती हैं। विदेशों में लॉबिंग के लिए भुगतान किया जाता है। जबकि, भारतीय कानून के अनुसार, रक्षा सौदों में कमीशन लेना अवैध है और आरोप सामने आने पर जांच बिठाने के साथ ही संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट या कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाता है।

सेना, वायुसेना और थलसेना में रक्षा सौदों से जुड़े आला अफसरों ने डीएसी की बैठक में मनोहर पर्रीकर के सामने कठोर नीति के असर की चर्चा की। कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने या उन्हें प्रतिबंधित करने से सैन्य बलों की जरूरतें प्रभावित होती हैं। उदाहरण के लिए, अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में कमीशनखोरी का आरोप लगने के बाद इतालवी कंपनी ‘फिनमेकेनिका’ को प्रतिबंधित किए जाने से नौसेना की जरूरतें प्रभावित हुई हैं। 10 साल का समय ब
जाया हुआ है। अरब सागर में तैनात की गई नौसेना के कलावरी श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए ब्लैक शार्क तारपीडो मिलने थे।

पाकिस्तानी सेना ने अपनी तैयारियों की जांच के लिए रात के अंधेरे में किया अभ्यास

रक्षा मंत्रालय के पूर्व महानिदेशक (एक्विजीशन) विवेक राय कहते हैं, ‘ब्लैकलिस्टिंग नीति हमारी जरूरतों के लिहाज से घातक रही है।’ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) पीएस अहलूवालिया कहते हैं, फिनमेकेनिका पर कार्रवाई से हमे अब तारपीडो और तोपों के लिए 2022 तक तो इंतजार करना ही होगा। हेलीकॉप्टर सौदा वायुसेना के लिए था, लेकिन कंपनी को प्रतिबंधित किए जाने के बाद नौसेना की नई कई पनडुब्बियों के लिए तारपीडो और युद्धपोतों के लिए मुख्य तोपों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस कंपनी के तारपीडो और जहाजों के तोपों के लिए काम दिया गया था, जो हेलिकॉप्टर खरीद सौदे के विवाद के चलते ठप पड़ गया। अब नए सिरे से खरीद की प्रक्रिया की तैयारी चल रही है।

नई नीति में इस प्रावधान को लचीला बनाया जा रहा है। अब कमीशन खाने के पुख्ता सबूत मिलने पर ही किसी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भारत में देशी-विदेशी कुल 118 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जिनमें छह बड़ी कंपनियां विदेशी हैं। इनमें इजराइल की इजराइली मिलिट्री इंडस्ट्रीज भी है। लंबे अरसे बाद इस कंपनी से प्रतिबंध हटाने और उसे सेना के लिए स्नाइपर राइफल्स की आपूर्ति के सौदे में भाग लेने की अनुमति देने की बात चल रही है। लेकिन जानकारों के अनुसार, विशेषज्ञ यह मांग कर रहे हैं कि दलाली के आरोपों की जांच भले चलती रहे, आयुध उपकरणों की मेरिट के आधार पर सौदे पर फैसले किए जाएं। सीआइआइ में रक्षा तकनीक विशेषज्ञ मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) मृणाल सुमन कहते हैं, ‘पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं करना चाहिए। सौदे का पुनर्विवेचन जरूरी होना चाहिए।’

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 9, 2016 5:10 am

सबरंग