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सिक्किम पहुंचे आर्मी चीफ मगर वहां नहीं जाएंगे जहां चीन के साथ तनाव बना हुआ है

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने भी भारतीय सैनिकों पर सिक्किम सेक्टर के डोंगलोंग इलाके में चीनी क्षेत्र में घुसने का आरोप लगाया।
Author June 29, 2017 21:51 pm
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत। (फाइल फोटो)

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार (29 जून) को उत्तरी सिक्किम में सेना के स्थानीय मुख्यालय का दौरा किया जहां सेना के शीर्ष कमान अधिकारियों ने उन्हें एक विवादित इलाके को लेकर भारतीय सैनिकों एवं चीनी सेना के बीच हुई झड़प के परिप्रेक्ष्य में पूरे सुरक्षा हालात की जानकारी दी। दो दिन के दौरे पर पहुंचे रावत को सेना के 17 माउंटेन डिवीजन में सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति की जानकारी दी जबकि चीन ने झड़प को लेकर अपना रूख कड़ा करते हुए भारतीय सेना को 1962 के युद्ध की तरफ परोक्ष संकेत करते हुए चेतावनी दी कि वह ऐतिहासिक सबक से सीख ले।

सेना प्रमुख ने 17 माउंटेन डिवीजन के तहत आने वाले इलाकों का भी दौरा किया और विभिन्न संचालन पहलुओं का जायजा लिया। 17 माउंटेन डिवीजन सिक्किम सेक्टर में चीन-भारत सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभालता है। एक आधिकारिक स्रोत ने कहा, ‘‘जनरल रावत को अभियान संबंधी विषयों की जानकारी दी।’’

चीन का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डोंगलोंग इलाके में एक सड़क के निर्माण की कोशिश करने के बाद तनातनी शुरू हुई। चीन के डोंगलोंग को सिक्किम-भूटान-तिब्बत त्रिकोणीय जंक्शन से जोड़ने से उसे भारत पर एक बड़ी सैन्य बढ़त मिल सकती है। भारतीय सेना ने डोंगलोंग में चीन के सड़क निर्माण को रोक दिया। डोंगलोंग चीन और भूटान के बीच एक विवादित क्षेत्र है।

जम्मू-कश्मीर से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक फैली 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा का 220 किलोमीटर खंड सिक्किम में आता है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि भारतीय पक्ष के अपना अनुरोध खारिज करने के बाद चीन ने बुलडोजर का इस्तेमाल कर डोंगलोंग में भारतीय सेना के एक पुराने बंकर को हटा दिया जिसके बाद तनातनी शुरू हुई।

तनावपूर्ण स्थिति के बीच चीन ने सीमा विवाद के हल की खातिर सार्थक बातचीत की पूर्व शर्त के तौर पर आज भारत से सिक्किम सेक्टर के डोंगलोंग इलाके से अपने सैनिक हटाने को कहा और चेतावनी दी कि भारतीय सेना को ऐतिहासिक सबकों से सीख लेनी चाहिए।

एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने बीजिंग में डोंगलोंग में भारत के कथित घुसपैठ की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि दोनों सेनाओं के बीच टकराव की वजह बनते जा रहे विवाद का तब ही हल हो सकता है जब भारतीय सैनिक इलाके से वापस लौट जाएं।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने भी भारतीय सैनिकों पर सिक्किम सेक्टर के डोंगलोंग इलाके में चीनी क्षेत्र में घुसने का आरोप लगाया। भारतीय सेना ने अब तक मुद्दे को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। भूटान ने कल कहा था कि उसने सड़क निर्माण को लेकर चीन को डिमार्शे जारी किया और चीन से तत्काल निर्माण कार्य रोककर यथास्थिति बहाल करने को कहा।

देखिए वीडियो - चीन ने भारतीय सेना के बंकर पर चलाया बुलडोजर

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  1. M
    manish agrawal
    Jun 30, 2017 at 12:30 am
    चीन का आकार हिन्दोस्तान का 3 गुना है और उसकी फौजी और न्यूक्लिअर ताक़त भी हिन्दोस्तान की 3 गुना है ! इसलिए हिन्दोस्तान को चाहिए की युद्ध-उन्मादी लोगों की बातों में ना आये और चीन से विवाद राजनयिक स्तर पर सुलझाए ! 1962 की जंग में चीन से हारने के बाद भी हिन्दोस्तान का कोई नुकसान नहीं हुआ था क्योंकि तब चीन एक न्यूक्लिअर ताक़त नहीं था ! आज के चीन के पास 350 से भी ज्यादा न्यूक्लिअर बम हैं जिनको चेंगदू-30 जैसे पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और मिसाइल्स से हिन्दोस्तान के किसी भी इलाके पर गिराया जा सकता है ! चीन एक क्रूर राष्ट्र है और युद्ध के हालत में , वो हिन्दोस्तान पर न्यूक्लिअर बम गिराकर , भीषण नरसंहार करने से बाज़ नहीं आएगा !
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    1. M
      manish agrawal
      Jun 30, 2017 at 12:27 am
      बरसों पहले चीन ने थ्येनयानम चौक पर , आंदोलन कुचलने के लिए अपने ही सैंकड़ो छात्रों को मार डाला था ! वो भी बर्बर तरीके से उनपर टैंक चढ़ाकर ! इसलिए हिन्दोस्तान के करोड़ों नागरिकों से उसको क्या sympathy हो सकती है ? वो निश्चित ही, पाकिस्तान के उकसावे पर, न्यूक्लिअर बम का प्रयोग करेगा ! यदि चीन की First Nuclear-strike से हिन्दोस्तान की हुकूमत बच गयी तो शायद हिन्दोस्तान भी चीन पर second न्यूक्लिअर स्ट्राइक करे , लेकिन फायदा क्या होगा ? सिवाय इसके की चीन भी बर्बाद हो जाएगा लेकिन हिन्दोस्तान तो ! शर्तिया ! विश्व के नक़्शे से गायब ही हो जायेगा ! क्या हम ये ही चाहते हैं ? चीन से रिश्ते सुधारने और विवाद शांत करने के लिए हिन्दोस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह की मदद ली जा सकती है , वे बहुत ही सुलझे हुए , गंभीर स्वभाव के व्यक्तित्व हैं ! उनके शाषणकाल में , चीन से रिश्ते लगभग सामान्य रहे !
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      सबरंग