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जीएसटी समारोह के बहिष्कार की राह पर चला विपक्ष

तृणमूल कांग्रेस ने बहिष्कार का एलान कर दिया है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जल्दबाजी क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि जब व्यापारी हड़ताल कर रहे हैं तो जश्न मनाने का क्या औचित्य है?
Author नई दिल्ली | June 29, 2017 02:43 am
एक समारोह में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और पीएम मोदी हाथ मिलाते हुए । (Photo Source: PTI/File)

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 30 जून की मध्य रात्रि में भव्य समारोह के साथ वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) के शुरुआत का एलान करने की तैयारी कर रही है। लेकिन कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल सरकार के मंसूबों पर पानी फेर सकते हैं। इस मौके को विपक्षी गठबंधन की एकता दिखाने का एक और मौका मानते हुए कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल जीएसटी के एलान के लिए बुलाई गई संसद की विशेष बैठक का बहिष्कार करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस ने अभी बहिष्कार का औपचारिक एलान नहीं किया है। कांग्रेस गुरुवार को इस बारे में फैसला लेगी। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने बहिष्कार का एलान कर दिया है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जल्दबाजी क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि जब व्यापारी हड़ताल कर रहे हैं तो जश्न मनाने का क्या औचित्य है?  विपक्षी दलों का मानना है  कि केंद्र सरकार बिना पूरी तैयारी के इतने बड़े कर सुधारों को लागू कर रही है, जिससे अफरा-तफरी मचेगी। कुछ का मानना है कि मोदी सरकार जीएसटी का पूरा श्रेय लेना चाहती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जीएसटी के आने से व्यापारियों को नुकसान होगा।

इस आयोजन में कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शामिल होने के लिए व्यक्तिगत न्योता भेजा है। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने सरकार की तरफ से भेजे निमंत्रण पत्र में उनसे मंच पर मौजूद रहने का आग्रह किया है। इसी तरह का आग्रह पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेकु) के नेता एचडी देवगौड़ा से किया गया है। दोनों ने ही शामिल होने की सम्मति नहीं भेजी है। कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम चेन्नई में हैं। वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इस कार्यक्रम को मजाक भी बताया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी की घोषणा की तैयारियों के बारे में मंगलवार को बताया था। इसके बाद से ही इस बाबत विपक्ष ने आलोचना शुरू कर दी है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि संसद की विशेष बैठक का उद््घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए। कांग्रेस को आपत्ति इस बात पर है कि जीएसटी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राष्ट्रपति की मौजूदगी में जीएसटी की घोषणा प्रधानमंत्री कैसे कर सकते हैं? यह कतई सही नहीं है और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि जीएसटी आयोजन को लेकर कांग्रेस की तरफ से फैसला अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ा गया है और उन्होंने अभी तक सकारात्मक संकेत नहीं दिया है।
संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित होने जा रहे समारोह के लिए संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार की तरफ से भेजे गए निमंत्रण पत्र में कहा गया है- ‘राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की गरिमामय उपस्थिति में भारत के प्रधानमंत्री की ओर से जीएसटी के लांच के अवसर पर उपस्थिति प्रार्थनीय है।’

केंद्र सरकार ने सभी सांसदों और मुख्यमंत्रियों को समारोह में आमंत्रित किया है। इस आयोजन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए सुरजेवाला ने कहा कि जीएसटी के लागू होने से व्यापार और उद्योग जगत ही नहीं, छोटे-मंझोले कारोबारियों का व्यापार भी प्रभावित होगा। कांग्रेस इसे गंभीर समस्या मान रही है और इसे लेकर गहरी चिंता जाहिर कर रही है। उसका मानना है कि जीएसटी लागू होने के शुरुआती महीनों में देश के कारोबार और व्यापार जगत में अफरा-तफरी रहेगी। महंगाई बढ़ने की आशंका भी है।  दूसरी तरफ, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी पार्टी जीएसटी के आयोजन में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कोलकाता में कहा कि जीएसटी को लागू करने के लिए की जा रही गैर-जरूरी जल्दबाजी केंद्र सरकार की एक और बड़ी गलती है। बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि जीएसटी की घोषणा को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए, क्योंकि देशभर में एकल कर की ओर बढ़ने से होने वाले बड़े बदलाव के लिए छोटे व्यापारी तैयार नहीं हैं।

 

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