December 04, 2016

ताज़ा खबर

 

टैक्‍स बचाने के लिए किया था कैश में सौदा, लॉकर्स में जमा कराए थे करोड़ों, अब काट रहे बैंकों के चक्‍कर

अक्टूबर 2013 से मार्च 2016 के बीच अमरावती राजधानी क्षेत्र के गांवों में 6,500 एकड़ जमीन बेची गई थी।

फोटो का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर किया गया है।

अमरावती राजधानी क्षेत्र में जिन किसानों ने साल 2013-14 में अपनी जमीन बेची थी और उनके रुपए बैंकों के लॉकर्स में थे, वे अब अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बैंक अकाउंट्स के लिए घूम रहे हैं, ताकि 2.5 लाख रुपए हर एक अकाउंट में बिना किसी जुर्माना के जमा करा सकें। विजयवाड़ा, मंगलगिरी, थुल्लर और गुंटुर में बैंक अधिकारियों का कहना है कि परेशान किसान बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं और बैंक अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि वे अपने पैसों को बिना किसी जुर्माना के कैसे जमा करा सकते हैं। अक्टूबर 2013 से मार्च 2015 तक इस क्षेत्र के किसानों ने उस वक्त अपनी जमीन बेच दी थी, जब रिपोर्ट्स आई थीं कि नई राजधानी यहां बनाई जाएगी। उस वक्त जमीनों के भाव काफी बढ़ गए थे। कुछ किसानों ने जिन जमीनों की कीमत 40 लाख रुपए प्रति एकड़ थी, वह उन्होंने एक करोड़ रुपए या उससे ज्यादा में बेच दी थी। जिन्होंने ज्यादा एकड़ जमीन बेची उनके पास करोड़ों रुपए आए थे। हालांकि, राज्य सरकार ने इस क्षेत्र में जमीनों की रजिस्ट्रेशन कीमत तय कर रखी थी, जो कि आठ से 16 लाख रुपए थी। ऐसे में 95 फीसदी रकम नगद के रूप में दी गई थी। ज्यादात्तर किसानों ने उन पैसों से जमीन खरीद ली, घर बना लिया या फिर लग्जरी गाड़ियां खरीद लीं। लेकिन कुछ किसानों ने वह रकम बैंक लॉकर्स में रखी थी, वहीं कईयों ने इसे अपने घर में ही रखा हुआ था।

विजयवाड़ा में एक रियल एस्टेट एजेंट ए बलराम रेड्डी ने बताया, ‘थुल्लर, ताडेपल्ली और मंगलागिरी मंडल के तहत आने वाले गांवों के किसानों के पास करीब पांच से छह करोड़ रुपए हैं। परेशान किसान जो कि रातों-रात करोड़पति बन गए थे, अब वे एक बैंक से दूसरे बैंक अपने पैसे जमा कराने या बदलने का तरीका ढूंढ़ने के लिए घूम रहे हैं। कईयों ने उन रियल एस्टेट एजेंटों से भी संपर्क साधा है, जिन्होंने उनकी डील कराई थी। हम क्या कर सकते हैं?’

एसबीआई के एक अधिकारी ने बताया, ‘कुछ किसान किस्मत वाले थे, जिन्होंने अपने कई बैंक अकाउंट खुलवा लिए थे। बैंक ने साल 2014 में नए कस्टमर्स को आकर्षित करने के लिए मल्टिपल अकाउंट्स खोलने के लिए अभियान चलाया था। उनमें से कईयों के चार या पांच अकाउंट हैं। जिन किसानों के पास 10 लाख तक कैश है, वे अपने पैसों को इन अकाउंट्स में जमा करा रहे हैं।’

मंगलागिरी से विधायक रामकृष्ण रेड्डी ने कहा, ‘कुछ किसानों ने केवल एक अकाउंट रखना ही सही समझा, क्योंकि वे अनपढ़ थे और परेशानी पैदा नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपने पैसे लॉकर्स में जमा करा दिए। ताकि बाद में वे दहेज दे सकें या जमीन खरीद सकें। अब उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। वे दो साल पहले एक रात में ही आमिर बन गए थे, अब आठ नवंबर को उनके पास कुछ लाख रुपए ही बच गए।’ साथ ही रेड्डी ने बताया कि उनका फोन लगातार बज रहा है, उनके क्षेत्र के किसान उनसे सलाह मांग रहे हैं। अक्टूबर 2013 से मार्च 2016 के बीच इस क्षेत्र के गांवों में 6,500 एकड़ जमीन बेची गई थी।

इस क्षेत्र के गांवों में नया बिजनस शुरू हुआ है। एक गांव में रियल एस्टेट एजेंट से करंसी एजेंट बने मोकामतम वेंकटेश ने बताया, ‘1000 रुपए के नोट के लिए 300 रुपए और 500 रुपए के नोट के लिए 150 रुपए कमीशन है। हम आपके पुराने नोट अभी ले लेंगे, लेकिन आपको तीन महीने बाद नए नोट दिए जाएंगे। इसके लिए कोई कागजात नहीं बनाए जा रहे हैं। ना कि कोई हस्ताक्षर या बॉन्ड बनाए जाए रहे हैं। एक भरोसा है कि आपको तीन या चार महीने बाद कमीशन काटने के बाद आपकी रकम मिल जाएगी।’

एक अधिकारी ने बताया, ‘एजेंट जिन बीपीएल परिवारों को जानते हैं, उनके अकाउंट्स में पैसे जमा करा रहे हैं। इसके साथ ही कई सरकारी स्कीमों के तहत खुलाए गए अकाउंट्स का भी इसमें इस्तेमाल किया जा रहा है। इन अकाउंट्स में लोगों से लिए गए पैसे जमा कराए जा रहे हैं।’

वीडियो में देखें- 500, 1000 रुपए के नोट बदलवाने बैंक गए लोगों ने क्या कहा, जानिए

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 14, 2016 7:28 am

सबरंग