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गरीबों के ‘जनधन’ तक पहुंचे दलाल

काले को सफेद करने में लगे पेशेवरों व कारोबारियों के बार-बार नोट बदलने की होड़ के कारण ज्यादा विकट हो रही है।
Author नई दिल्ली | November 13, 2016 05:32 am
2000 के नए नोट। (तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।) (Photo Source: AP)

बैंक व एटीएम से जूझने की समस्या दिल्ली में बद से बदतर होती जा रही है। माना जा रहा था कि चौथे दिन से हालात सामान्य होते नजर आएंगे। लेकिन शनिवार को भी यह दावा खोखला साबित हुआ। सरकार की घोषणा के पांचवें दिन भी दिल्ली के बैंको का पता उसके सामने की सड़क पर खड़ी कतार बता रही थी। यह समस्या काले को सफेद करने में लगे पेशेवरों व कारोबारियों के बार-बार नोट बदलने की होड़ के कारण ज्यादा विकट हो रही है। कतार में एक सवाल आम था कि जब राजधानी दिल्ली की यह हालत है तो दूर-दराज की स्थिति क्या होगी?

बहरहाल, सप्ताहांत पर नोट बदलने के लिए लोगों की कतार बैंकों और एटीएम के बाहर पहले से भी ज्यादा लंबी देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या में लोगों के आने से अधिकतर जगहों पर एटीएम से नकदी भी खत्म हो गई है। कई बैंकों ने सरकार के निर्देश से उलट नोटों की अदला-बदली की तय सीमा 4000 की जगह 2000 कर दी। इससे घंटों लाइन में लगकर काउंटर पर आए लोग बिफर पड़े। लोगों ने वित्त मंत्री और भाजपा अध्यक्ष के इस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया कि नए नोटों के आकार-प्रकार के कारण एटीएम में दिक्कतें आ रही है! उनका कहना है कि अगर ऐसा है तो कुछ एटीएम कैसे काम कर रहें हैं? उन्होंने कहा- दिक्कत ‘मशीनरी’ में है न कि मशीन में!

चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि लोगों की परेशानी का फायदा उठाने के लिए दलाल सरीखे लोग कतार के आस-पास मंडरा रहे हैैं। अचानक से मुद्रा बदलने वाले (मनी चेंजर) और हवाला कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक ये ‘जनधन’ खाते का प्रयोग नोटों को जमा करने में कर रहे हैं। अधिकतर जनधन खाते गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों के हैं। इन खातों में ढाई लाख तक रुपए जमा किए जा रहे हैं। चांदनी चौक इलाके में पुराने नोट के बदले नए नोटों के लिए दलाल पूरे लेन-देन पर 40 से 45 फीसद का कमीशन की मांग कर रहे हैं। बहरहाल, कालकाजी स्थित एसबीआइ के एटीएम से निराश लौटीं गृहणि तुली शर्मा नाम ने कहा, ‘मैं हजार-पांच सौ के नोट बचाते आ रही थी लेकिन वे अब किसी काम के नहीं हैं। मैं बिना नकदी के तीन दिन से इस इंतजार में थी कि एटीएम काम करने लगेंगे लेकिन ऐसा हो न सका। मुझे अपने पड़ोसियों से पैसे उधार लेने पड़े’।

शनिवार को ढेर सारे एटीएम के काम ना करने और बैंकों में खचाखच भीड़ जमा होने के कारण लोग बेचैन और परेशान रहे। केंद्र सरकार ने नोट बदलने की पूरी प्रक्रिया के सरल होने का वादा किया था लेकिन स्थिति पूरी तरह उलट दिख रही है। बैंक एवं डाकघरों के दबाव में आने से स्थिति कोलाहल और ऊहापोह से भरी रही। कई डाकघरों में नोटों की अदलाबदली शनिवार को भी नहीं शुरू हो सकी। पैसे निकालने के लिए जमा भारी भीड़ के कारण बहुत सारे एटीएम में दोबारा काम करना शुरू करने के कुछ ही घंटे बाद पैसे खत्म हो गए। वहीं कई मशीन तो बिल्कुल ही बंद रहीं। पुराने नोट बदलवाकर नए नोट हासिल करने की खातिर लंबी-लंबी कतारों में कई-कई घंटे खड़े होने के लिए मजबूर लोगों ने सरकार को बदइंतजामी के लिए खूब कोसा। तमाम घोषणाओं के बावजूद लोगों को दवा खरीदने, बस और ट्रेन का टिकट खरीदने में और आॅटोरिक्शा का भाड़ा देने में परेशानी रही।

पुलिस को मिलीं 5000 से ज्यादा शिकायतेंएमटीएम-बैंक से परेशान लोगों की ओर से दिल्ली पुलिस को अब तक करीब 5000 से ज्यादा शिकायती फोन आए। विशेष पुलिस आयुक्त (परिचालन) संजय बेनीवाल ने बताया कि फोन कॉल्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले दिन पुलिस को करीब 750 फोन आए लेकिन वे लगातार बढ़ रहे हैं। इन लोगों की शिकायत थी कि इनके नोट नहीं बदले गए या बैंकों में नकदी खत्म हो गई। पुलिस को इनमें से ज्यादातर शिकायतें एटीएम खाली होने या आॅफलाइन होने से जुड़ी थीं। बेचैन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली के एटीएम एवं बैंकों में अर्द्धसैनिक बल एवं दिल्ली पुलिस के 3,400 कर्मी और त्वरित प्रतिक्रिया बल की 200 टीमें तैनात की गई हैं। लोग तब खाली हाथ लौट गए जब सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि एटीएम में अब तक पैसे नहीं डाले गए हैं।

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