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देवबंद में सपा, बसपा व भाजपा में मुकाबला

विधान परिषद सदस्य (स्थानीय प्राधिकारी) के तीन मार्च को होने वाले चुनाव के लिए दाखिल सभी छह नामांकन पत्र जांच में सही पाए गए। मुख्य मुकाबला सपा, बसपा, भाजपा के उम्मीदवार के बीच होगा।
Author देवबंद-सहारनपुर | February 18, 2016 02:33 am

विधान परिषद सदस्य (स्थानीय प्राधिकारी) के तीन मार्च को होने वाले चुनाव के लिए दाखिल सभी छह नामांकन पत्र जांच में सही पाए गए। मुख्य मुकाबला सपा, बसपा, भाजपा के उम्मीदवार के बीच होगा। भाजपा की ओर से गुर्जर नेता सूरत सिह वर्मा, बसपा की ओर से महमूद अली और सपा की ओर से मुजफ्फरनगर युवजन सभा के नेता गौरव जैन उम्मीदवार है। कांग्रेस ने इस चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है।
सपा आलाकमान ने मुजफ्फरनगर के स्टील व्यवसायी और बिजनौर के पूर्व विधायक शाहनवाज राणा को उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन उनकी अचानक तबियत बिगड़ने के बाद सपा नेतृत्व ने नए उम्मीदवार की फौरी तलाश शुरू की। सूत्रों के मुताबिक कैराना की पूर्व सांसद तबस्सुम बेगम, मुजफ्फरनगर सपा के महानगर अध्यक्ष राशिद सिद्दीकी आदि को भी तैयार करने के प्रयास किए गए। लेकिन आधी रात के करीब समाजवादी युवजन सभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष गौरव जैन को चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया गया।

बसपा उम्मीदवार महमूद अली सहारनपुर के अरबपति है और बसपा के पूर्व एमएलसी और खनन व्यवसायी मो. इकबाल के छोटे भाई है। भाजपा उम्मीदवार सूरत सिंह वर्मा मुजफ्फरनगर के बड़े ट्रांपोर्ट व्यवसायी है। उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री व मुजफ्फरनगर भाजपा सांसद डा. संजीव बालियान ने चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली तीन जिलों से मिलकर बनी सहारनपुर विधान परिषद सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या चार हजार पांच सौ 22 है। सहारनपुर जिले में 2090, मुजफ्फरनगर जिले में 1605 और शामली जिले में 887 मतदाता आते है।

मतदाताओं में गांव प्रधान, बीडीसी ऐर ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, नगर पालिका सदस्य और सांसद, विधायक शामिल है।
बसपा उम्मीदवार महमूद अली के भाई पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल के खिलाफ उन्हीं के पूर्व साथी रणधीर सिंह और विकास अग्रवाल आदि ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन न्यायधीशोें की बैंच मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय की कई एजेंसियां इकबाल पर लगे गंभीर आरोपो की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां 25 अप्रैल को अपनी रपट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगी। इस संबंध में इकबाल का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से आरोप लगाए गए हैं। जिनमें कोई दम नहीं हैै।

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