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गुरमीत राम रहीम के चेलों की हिंसा के बाद पहली बार अमित शाह से मिले सीएम खट्टर, इस्तीफे पर बोले- जो मांगता है वो मांगता रहे…

गुरमीत राम रहीम के समर्थकों द्वारा की गई हिंसा के बाद पहली बार सीएम मनोहर लाल खट्टर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिले।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर। (फाइल फोटो)

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नई दिल्ली में बुधवार (30 अगस्त) को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। शाह से मुलाकात के बाद खट्टर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के सवाल पर कहा, “जो मांगता है वो मांगता रहे, हमने अपना काम अच्छी तरह किया था।” डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को अदालत द्वारा बलात्कार का दोषी ठहराए जाने के बाद राज्य में हुई हिंसा पर रोक में विफल रहने के लिए विपक्षी दल खट्टर का इस्तीफा मांग रहे हैं। गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों के बलात्कार के लिए 20 साल कठोर कारावास और 30 लाख रुपये नकद हर्जाना की सजा मिली है। गुमरीत राम रहीम को अदालत द्वारा दोषी पाए जाने के बाद उसके समर्थकों ने हरियाणा के कई जिलों में हिंसा की जिसमें 38 लोग मारे गए और सौ से ज्यादा घायल हो गए।

साल 2002 में दर्ज मामले में गुरमीत राम रहीम को सीबीआई की विशेष अदालत ने बलात्कार का दोषी पाया। अदालत द्वारा दोषी पाए जाने के बाद गुरमीत राम रहीम के समर्थकों ने सिरसा और पंचुकला समेत कई जिलों में करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। गुरमीत राम रहीम के समर्थकों ने मीडिया की तीन ओवी वैन जला दी और कुछ मीडियाकर्मियों को मारापीटा। गुरमीत राम रहीम के समर्थकों की हिंसा से नाराज अदालत ने उसकी संपत्तियों को बेचकर हिंसा में हुए नुकसान को भरपायी का आदेश दिया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य की बीजेपी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने राजनीतिक फायदे के लिए ये सब होने दिया।

हरियाणा में हुए जानो-माल के नुकसान के बाद से ही विपक्षी दलों समेत सोशल मीडिया पर बहुत से लोग खट्टर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मनोहर लाल खट्टर सरकार में जाट आंदोलन के दौरान भी व्यापक हिंसा हुई थी। इससे पहले हरियाणा के ही स्वघोषित संत रामपाल को पुलिस दो हफ्ते के संघर्ष के बाद गिरफ्तार कर सकी थी। रामपाल की गिरफ्तारी के दौरान हुई हिंसा में छह  लोगों की जान भी गयी थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इन सब मसलों को लेकर कई यूजर्स खट्टर सरकार पर प्रशासन में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं।

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  1. M
    manish agrawal
    Aug 30, 2017 at 10:37 pm
    जैसे सच बोलने वाले को महाराज हरिश्चंद्र और बेसिरपैर की बात करने वाले को शेखचिल्ली कहा जाता है , ऐसे ही , अब अक्षम प्रशासक को "मनोहर लाल खट्टर" कहा जाएगा ! बीजेपी की सेंट्रल लीडरशिप ने महाराज धृतराष्ट्र की तरह आँख मूँद रखी है और उसको माननीय उच्च न्यायलय की फटकार के बाबजूद , मनोहर लाल खट्टर की नाकामी नज़र नहीं आती !
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    1. S
      SS RAWAT
      Aug 30, 2017 at 2:14 pm
      ये भाजपा के ताबूत में आखिरी कील ठोक देगा, इन राष्ट्रद्रोहियों ने मोहाली चंडीगढ़ और पंचकूला को पूरी तरह से तबाह करने ठान ली थी , आज भारीतय मीडिया हावी है, अब भारत में सुप्रीम कोर्ट ही एक मात्रा विकल्प है जो राष्ट्रद्रोह की परिभाषा को अ में ला सकता है, जितना बड़ा गुनाह होगा उतनी बड़ी सजा का हकदार होगा, भारतीय न्यायालयों को चाहिए ऐसे देशद्रोहियों की पहचान कर इन्हे भी जेलों में डाले |
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      सबरंग