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नोटबंदी पर बहस के बीच कैबिनेट में फेरबदल कर सकते हैं पीएम नरेंद्र मोदी, बदले जा सकते हैं गवर्नर

कई दलित और ओबीसी नेताओं को अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जगह दी गई थी।
मंबई के मरीन ड्राइव पर एक कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी। (Source: PTI)

नोटबंदी पर जारी बहस के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल कर सकते हैं। द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अहम बदलाव होगा क्‍योंकि उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले छह महीनों में होने हैं। अगर मंत्रिमंडल में बदलाव होता है तो चुनावी राज्‍यों का खास ध्‍यान रखा जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्‍ली के उप-राज्‍यपाल नजीब जंग के अचानक इस्‍तीफा देने के बाद कैबिनेट में बदलाव से ‘गवर्नरों में भी बदलाव’ हो सकता है। हालांकि इस संबंध में केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से कोई अ‍ाधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना दूसरा मंत्रिपरिषद विस्तार मई 2014 में सत्ता की बागडोर संभालने के दो साल से थोड़े अधिक समय बाद किया। कई दलित और ओबीसी नेताओं को अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जगह दी गई है। जुलाई में जब मोदी ने कैबिनेट में बदलाव किया था तो ऐसा सिर्फ समीकरणों के चलते नहीं, गवर्नेंस की वजह से भी किया गया।

पार्टी और सरकार को संदेश देते हुए नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ कैबिनेट का आकार बड़ा किया बल्कि मंत्रालयों में भी व्‍यापक स्‍तर पर बदलाव किए। जुलाई के कैबिनेट फेरबदल में तुलनात्‍मक तौर पर युवा मुख्‍तार अब्‍बास नकवी को अल्‍पसंख्‍यक मामलों का मंत्री बनाया गया। उन्‍होंने नजमा हेपतुल्‍ला की जगह ली जो 75 साल की अनाधिकारिक सीमा को पार कर चुकी थी। जहां नजमा को मणिपुर का राज्‍यपाल बना दिया गया, वहीं केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र उम्र की सीमा पार करने के बावजूद मंत्रिमंडल में बने रहे।

पांच मंत्रियों को हटाने के बावजूद मोदी ने 78 मंत्रियों का मंत्रिमंडल बनाया। संविधान के अनुसार, लोकसभा की कुल संख्‍या के अधिकतम 15 प्रतिशत तक ही मंत्री नियुक्‍त किए जा सकते हैं। कांग्रेस ने जुलाई के कैबिनेट फेरबदल केा ‘वोट जुटाने वाली कवायद’ बताया था। विपक्ष का आरोप था कि चुनावी राज्‍यों को ध्‍यान में रखकर यह परिवर्तन किया गया और नरेंद्र मोदी का ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ का ‘ऊंचा दावा’ ‘नौटंकी’ बन गया है।

कई दलित और ओबीसी नेताओं को अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जगह दी गई थी।

“सरकार को मीडिया के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए”: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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  1. A
    Abu talib
    Dec 26, 2016 at 1:49 pm
    आजकल जिसे देखो उसकी ज़बान पर यही गाना है, " कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन "
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    Reply
    1. B
      bitterhoney
      Dec 26, 2016 at 3:25 pm
      बी.जे.पी. सरकार के कुकर्मों के कारण कांग्रेस जल्द ही सत्ता में लौटने वाली है.
      (0)(2)
      Reply
      1. S
        Shrikant Sharma
        Dec 26, 2016 at 2:35 pm
        NARENDRA MODI दुनिया के सबसे ऑनेस्ट कर्मठ प्रदान मंत्री हैं इन्होंने कालेधन और भ्रस्टाचार के खिलाफ जो मुहीम शुरू की HAI उसमें अब कांग्रेस के बड़े नेता फंसने वाले HAIN
        (2)(0)
        Reply
        1. R
          rambharosr
          Dec 27, 2016 at 12:12 am
          नाम से तो आप ब्राह्मण लगते हैं आप को पता होगा की भस्मासुर कौन था? बीजेपी ने अपने लिए भसमासुर पैदा करलिया है
          (0)(1)
          Reply
        2. S
          Shrikant Sharma
          Dec 26, 2016 at 2:41 pm
          श्रीकांतशर्मा नव्योर्क से kahte हैं की अगर मोदी ने अपने कोर्रुप्त और निकम्मे मंत्रियुओं को नहीं बदला तू उनकी ऐसीयात पर असर पद सकता है.
          (0)(0)
          Reply
          सबरंग