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मद्रास: हाईकोर्ट में धरने पर बैठे वकील, तमिल भाषा के इस्तेमाल की मांग

मद्रास उच्च न्यायालय में तमिल भाषा को अदालती काम काज की भाषा बनाए जाने की मांग कर रहे वकीलों के एक समूह द्वारा मुंह पर काली पट्टी बांधकर अदालत कक्ष में आज धरने पर बैठने के..
Author चेन्नई | September 14, 2015 18:46 pm
मद्रास उच्च न्यायालय (फोटो-विकिपीडिया)

मद्रास उच्च न्यायालय में तमिल भाषा को अदालती काम काज की भाषा बनाए जाने की मांग कर रहे वकीलों के एक समूह द्वारा मुंह पर काली पट्टी बांधकर अदालत कक्ष में आज धरने पर बैठने के कारण न्यायालय परिसर में खलबली मच गई। वकीलों को इस हरकत के कारण मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल की नाराजगी झेलनी पड़ी।

मुदरै के ‘तमिल संघर्ष आंदोलन’ के बैनर तले करीब 12 वकील मुख्य न्यायाधीश के कक्ष में पहुंचे और उनके पहुंचने से पहले वे दर्शक दीर्घा की कुछ सीटों पर बैठ गए। अपनी मांग के समर्थन में उन्होंने एक बैनर और पोस्टर भी दिखाया।

मुख्य न्यायाधीश के न्यायालय कक्ष में आते ही दो वकील वकीलों के लिए बने स्थान की ओर चले गए। अपना स्थान ग्रहण करने के तुरंत बाद मुख्य न्यायाधीश को प्रदर्शन कर रहे वकीलों की उपस्थिति का भान हुआ और उन्होंने इसका कारण जानना चाहा। इनमें से एक वकील ने कहा कि वे चाहते हैं कि तमिल भाषा को उच्च न्यायालय में अदालती काम काज की भाषा बनाया जाए।

प्रदर्शन पर अपनी नाखुशी जताते हुए न्यायाधीश कौल ने कहा कि इस तरह की मांगों के लिए अदालत सही मंच नहीं है और इसके लिए उन्हें सरकार से संपर्क करना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन की संभावना की सूचना के बगैर स्थानीय पुलिस बल ऐसी स्थिति को रोकने में सक्षम नहीं होगी।

बहरहाल, भोजन-सत्र के बाद वकीलों ने अपने मुंह से काली पट्टी हटा ली, जिसे उन्होंने अदालत में बांध रखा था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी है कि अदालत में प्रवेश और निकास के लिए बेहतर व्यवस्था शुरू की जाये। इसके लिए एक समुचित प्रणाली विकसित करनी होगी।’’

न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अतीत में वकील और पुलिस के बीच हुए विवाद के कारण वे अनिच्छुक हैं। न्यायाधीश ने कहा कि इससे पहले भी अदालत में वकीलों में घुसने की घटनायें हुयी हैं, यहां तक कि उन्होंने नारेबाजी भी की और अदालत से संबद्ध या गैर संबद्ध मुद्दों पर उन्होंने गलियारे में जुलूस भी निकाला।

उन्होंने कहा कि इसलिए मद्रास उच्च न्यायालय को एक उच्च सुरक्षा जोन घोषित करने के लिए अधिकारियों को कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिर क्यों एक स्वतंत्र सुरक्षा प्रणाली अदालत को नहीं सौंपी जाती।

न्यायालय में मौजूदअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जी. राजागोपालन ने कहा कि इस तरह का प्रदर्शन करना वकीलों के एक वर्ग के व्यवहार में आ गया है। राजागोपालन ने कहा, ‘‘हालांकि ऐसा उन्होंने पहली बार नहीं किया है। वे इसे बाहर भी करते रहे हैं, अब वे अंदर घुस आए, यहां तक कि पुलिस द्वारा उन्हें रोकने की कोशिश के बावजूद वे यह कहते हुए अंदर घुस आए कि वे वकील हैं और अदालत में घुसने से उन्हें रोका नहीं जा सकता।’’

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