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मेनका गांधी ने तेज़ाब फेंकने वालों के लिए की मौत की सजा की पैरवी

मेनका गांधी ने महिलाओं पर तेजाब फेंकने वालों के लिए मौत की सजा की पैरवी करते हुए कहा कि तेजाब पीड़िताओं की दशा देखकर ‘खून खौलता’ है।
Author नई दिल्ली | October 8, 2016 00:54 am
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने महिलाओं पर तेजाब फेंकने वालों के लिए मौत की सजा की पैरवी करते हुए शुक्रवार (7 अक्टूबर) को कहा कि तेजाब पीड़िताओं की दशा देखकर ‘खून खौलता’ है। मणिपुर की राज्यपाल डॉ नजमा हेपतुल्ला ने तेजाब फेंकने की घटनाओं को कत्ल से भी बदतर बताते हुए आरोपियों के लिए सख्त सजा की मांग की और तेजाब फेंकने को सबसे बदतर अपराध बताया। मेनका और नजमा यहां वरिष्ठ पत्रकार प्रभा ज्योति की पुस्तक ‘एसिड वाली लड़की’ के विमोचन के मौके पर बोल रही थीं। मेनका ने कहा, ‘तेजाब पीड़िताओं की दशा देखकर खून खौलता है। तेजाब फेंकने से बुरी कोई चीज नहीं है। आज इंसान ही इंसान पर जुल्म कर रहा है।’ उन्होंने कहा ‘तेजाब फेंकने वाले को 10 साल की सजा मिलती है लेकिन मेरा बस चले तो मैं इन्हें मौत की सजा दूं।’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये मांग की जाती है कि तेजाब पीड़िताओं को सरकारी नौकरी दी जाए लेकिन क्लर्क या टाइपिस्ट की नौकरी उनके स्तर की नहीं हैं। अगर वे इस घटना की शिकार नहीं हुई होतीं तो वे शिक्षिका या किसी अन्य क्षेत्र में होतीं। वहीं नजमा ने कहा, ‘तेजाब पीड़िताएं हर रोज दर्द झेलती हैं। यह कत्ल से भी ज्यादा बुरा है क्योंकि उन्हें यह दर्द जिंदगी भर झेलना पड़ता है। इसलिए लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है।’ उन्होंने तेजाब फेंकने वालों के बारे में कहा कि जो लोग महिलाओं पर तेजाब फेंकते हैं वे इंसान कहलाने के लायक ही नहीं है। राज्यपाल ने कानूनी प्रक्रिया पर कहा, ‘इन मामलों पर अगर जल्दी फैसला हो और दोषियों को सजा मिले तो लोगों के मन में डर पैदा होगा।’ नजमा ने कहा कि तेजाब फेंकने वालों के लिए उम्र कैद की सजा होनी चाहिए। उम्र कैद की सजा न सिर्फ मौत के मामले में दी जाए बल्कि तेजाब फेंकने के मामले में भी दी जाए।

उन्होंने इस पुस्तक के बारे में कहा, ‘जब मैंने यह किताब देखी तो मेरी आंखों में आंसू आ गए।’ उन्होंने कहा कि भगवान की दी गई शक्ल को बिगाड़ने का किसी को हक नहीं है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया से हिन्दी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर और कई प्रतिष्ठित अखबारों में काम कर चुकीं प्रभा ज्योति ने बताया कि ‘एसिड वाली लड़की’ पुस्तक में छह से ज्यादा तेजाब पीड़िताओं की आपबीती है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में बताया गया है कि कैसे तेजाब किसी की जिंदगी को बदल देता है। प्रभा ने कहा कि जब तक हिंसा के खिलाफ नहीं बोलेंगे तब तक यह नहीं रुकेगी।

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First Published on October 8, 2016 12:49 am

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