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आरएसएस सर्वेः गुजरात में अभी चुनाव हुए तो बीजेपी को मिलेंगी बस 60-65 सीटें

पाटीदार आंदोलन और दलित आंदोलन से हुए नुकसान की भरपाई की दिशा में पहला कदम था सीएम आनंदीबेन पटेल का इस्तीफा
Author अहमदाबाद | August 4, 2016 15:55 pm
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को गुजरात पहुंचे (जावेद रज़ा, इंडियन एक्सप्रेस)

गुजरात के उना में कथित गौरक्षकों द्वारा दलितों की पिटाई के बाद राज्य में बीजेपी का जनाधार हिलता नजर आ रहा है. आरएसएस-बीजेपी के ताजा आंतरिक सर्वे के अनुसार अगर राज्य में आज चुनाव हो जाएं तो बीजेपी को राज्य की कुल 182 सीटों में से 60-65 सीटों पर ही जीत मिलेगी। दलितों की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गुजरात में कई दलितों ने विरोध स्वरूप आत्महत्या की कोशिश की। आत्महत्या की कोशिश करने वाले एक नौजवान की मौत हो गई। दलितों ने रविवार को राज्य में सरकार विरोध रैली भी निकाली। सोमवार को राज्य की सीएम आनंदीबेन पटेल ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा करी दी।

दलितों का विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद दो हफ्तों के दौरान ये सर्वे किया गया। आरएसएस ने ये सर्वे अपने प्रचारकों की मदद से किया जिन्हें जनता से सीधी प्रक्रिया लेने का प्रशिक्षण दिया गया है। सर्वे के अनुसार दलित मुद्दे को लेकर हिंदू समुदाय भी दो खानों में बंटा नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि इस सर्वे के नतीजे आने के बाद आरएसएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आनंदीबेन को इस्तीफा देने के लिए कहा।

सर्वे के अनुसार राज्य में 2017 में होने वाले विधान सभा चुनावों में बीजपी को पाटीदार और दलित आंदोलन की वजह से 18 विधान सभाओं में हार का सामना करना पड़ सकता है। सर्वे के अनुसार राज्य के आदिवासी नौकरी और भूमि आवंटन को लेकर सरकार के खिलाफ एक अलग आंदोलन शुरू करने की तैयारी में हैं। इससे पूर्व किए गए एक सर्वे के अनुसार दिसंबर 2015 में हुए पंचायत चुनावों में बीजेपी को पाटीदार आंदोलन के कारण 104 सीटों पर हार मिली थी। शहरी इलाकों में बीजेपी पाटीदार आंदोलन के झटकों से उबरने में कामयाब रही थी लेकिन ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ ढीली पड़ गई।

आरएसएस मुसलमानों के दलितों के समर्थन में आने को लेकर भी चिंतित है। आरएसएस के एक सूत्र ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार को बताया, “संघ दलितों को हिंदू समुदाय का हिस्सा समझता है। इसलिए वो हिंदू समाज के अंदर ध्रुवीकरम नहीं होने देगा। पहले दलित कांग्रेस के वोटर थे लेकिन संघ पिछले दो दशकों के अथक परिश्रम के बाद उन्हें अपने पाले में लाने में सफल रहा है।”

पाटीदार आंदोलन और दलित आंदोलन से हुए नुकसान की भरपाई की दिशा में पहला कदम आनंदीबेन का इस्तीफा था। दूसरे चरण में आरएसएस दलितों और हिंदू मुख्यधारा के बीज बढ़ती दूरी को पाटने की कोशिश की जाएगी। मंगलवार को उना में स्थानीय आरएसएस शाखा ने एक सामाजिक सद्भावना सम्मेलन आयोजित किया था। सम्मेलन पर बोलते हुए गुजरात आरएसएस के विजय ठाकर ने कहा, “हमने सामाजिक सद्भाव के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया है। धार्मिक गुरु और संत इसके लिए सबसे उपयुक्त होते हैं। राजनीतिक नेताओं की तुलना में धार्मिक उपदेशक सरल भाषा में जनता को अर्थपूर्ण संदेश देते हैं।”

ठाकर ने कहा, “हम संदेश देना चाहते हैं कि दलित हिंदू मुख्यधारा का हिस्सा हैं।” आरएसएस द्वारा कराए गए सर्वे पर ठाकर ने कहा, “आरएसएस ऐसे सर्वे कभी नहीं कराती। बीजेपी के पास अपना संगठन है, वो अपना ख्याल रख सकती है।” वहीं राज्य में विपक्षी दल के नेता शंकर सिंह वघेला कांग्रेस में आने से पहले आरएसएस और बीजेपी के वरिष्ठ नेता थे। मंगलवार को वघेला ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी वक्त हर तरह की चुनौती के लिए तैयार है। वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को गुजरात पहुंचे। माना जा रहा है कि वो राज्य के नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी के सिलसिले में राज्य पहुंचे हैं।

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