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AAP New Sting: आप की सफेदी पर ‘दाग ही दाग’

करीब डेढ़ महीने पहले प्रचंड बहुमत से जीतने वाली आम आदमी पार्टी के दो संस्थापक सदस्यों योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाल दिया गया। दोनों असंतुष्ट नेताओं के साथ उनके समर्थकों आनंद कुमार और अजीत झा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। शनिवार को […]
Author March 29, 2015 13:23 pm
योगेंद्र, प्रशांत, आनंद कुमार और अजित झा राष्टÑीय कार्यकारिणी से बाहर, दोनों गुट बता रहे राष्टÑीय परिषद की बैठक का अपना-अपना सच

करीब डेढ़ महीने पहले प्रचंड बहुमत से जीतने वाली आम आदमी पार्टी के दो संस्थापक सदस्यों योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाल दिया गया। दोनों असंतुष्ट नेताओं के साथ उनके समर्थकों आनंद कुमार और अजीत झा को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया।

शनिवार को कापसहेड़ा में चली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में दोनों गुटों में मचे हंगामे के बाद यह फैसला किया गया। इसके बाद पूरे दिन दोनों गुट एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि उनके व उनके समर्थकों के साथ बैठक में मारपीट की गई।

जबकि केजरीवाल गुट से संजय सिंह ने पत्रकारों से दावा किया कि बैठक में कोई मारपीट नहीं हुई है और चारों बागियों को बहुमत से निकालने का फैसला हुआ है।


यादव ने कहा कि जो हुआ वह गैर लोकतांत्रिक है और इसके खिलाफ उन्होंने सारे विकल्प खुले रखे हैं। उधर, केजरीवाल ने बैठक में कहानी के जरिए दोनों नेताओं पर कटाक्ष किया और इन दोनों को न निकाले जाने की सूरत में खुद इस्तीफा देने की धमकी दी थी।

बैठक में पार्टी नेता व उपमुख्मंत्री मनीष सिसोदिया ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रोफेसर आनंद कुमार और अजित झा को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकालने का प्रस्ताव पेश किया। कार्यकारिणी में कुल 392 सदस्य हैं। बैठक में करीब 311 सदस्य शामिल थे।

इस प्रस्ताव को 167 लोगों ने समर्थन दिया था। दो सदस्यों ने इस प्रक्रिया के खिलाफ लिखित असहमति दी। कुल सदस्यों की संख्या प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद ही इस पर मतदान कराया गया। आप के राष्ट्रीय महासचिव पंकज गुप्ता ने बताया कि दस सदस्यों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और 54 अन्य ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

संजय सिंह ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में महज आठ लोगों ने ही प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया जबकि 247 सदस्यों ने इसके पक्ष में हाथ खड़े किए। इसके पहले बैठक को संबोधित करने के बाद आप के मुखिया केजरीवाल बैठक की अध्यक्षता गोपाल राय के जिम्मे छोड़ कर घर चले गए। बाद में वे दुबारा बैठक स्थल पर पहुंचे।

बैठक के बाद सांसद धर्मवीर के साथ प्रेस कांफ्रेंस करके योगेंद्र और प्रशांत भूषण ने राष्ट्रीय परिषद की बैठक को असंवैधानिक करार देते हुए कहा है कि वे अभी भी पार्टी के सदस्य हैं। वे पार्टी की सदस्यता नहीं छोड़ेंगे। केजरीवाल पर तानाशाही प्रवृत्ति और निर्ममता से असंतोष की आवाज दबाने के लिए निशाना साधते हुए प्रशांत भूषण ने पत्रकारों से कहा कि फैसले को चुनौती देने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।


हम अदालत, चुनाव आयोग जा सकते हैं या राष्ट्रीय परिषद की दूसरी बैठक बुला सकते हैं।

दोनों नेताओं ने केजरीवाल पर सुनियोजित तरीके से असंतुष्ट नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों को उकसाने का आरोप लगाया, जिससें कुछ सदस्यों के साथ धक्कामुक्की की गई। योगेंद्र ने कहा कि केजरीवाल ने करीब एक घंटे तक हमारे खिलाफ आरोपों से भरा हुआ भाषण दिया।

उन्होंने धमकी दी कि अगर हमें नहीं हटाया जाता है तो वे इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने शांति भूषण का नाम लिए बिना उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद विधायक कपिल मिश्रा सहित कुछ लोग खड़े हुए और हमें गद्दार कहते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। भाषण खत्म करते ही केजरीवाल परिवहन मंत्री गोपाल राय को बैठक का अध्यक्ष बना वहां से चले गए। इसके कुछ ही सेकेंड बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव पेश किया।

योगेंद्र के मुताबिक, सिसोदिया ने कहा कि 167 सदस्यों ने प्रस्ताव रखा है और किसी का अनुमोदन लिए बिना ही मतदान शुरू हो गया। जब हमने राय से इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करने और गुप्त मतदान की व्यवस्था करने को कहा तो उनका कहना था कि आप जो कह रहे हैं वह लिख कर हमें दे दीजिए, पर न तो चर्चा कराई न ही मतदान रुकेगा। यह उस पार्टी की विडंबना है जिसका जन्म जनलोकपाल पर हुआ, और अब आंतरिक लोकपाल एल रामदास को बैठक में आने ही नहीं दिया गया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि हर विधायक से कहा गया था कि वे 50 लोगों को लेकर बैठक में आएं। यही वे लोग थे जो उपद्रव में लगे हुए थे और जिन्होंने उन्हें रोकने का प्रयास किया, उन्हें धक्का देकर बाहर कर दिया गया। बैठक में निमंत्रण के साथ आए ऐसे लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा था जो केजरीवाल से भिन्न राय रखते हैं। इसके खिलाफ योगेंद्र यादव करीब आधे घंटे तक बैठक स्थल के बाहर धरने पर बैठे रहे। दोनों गुटों में समझौता होने के बाद वे अंदर गए।

योगेंद्र ने केजरीवाल खेमे के उन दावों पर तंज किया कि राष्ट्रीय परिषद में प्रस्ताव के खिलाफ केवल आठ लोगों ने ही मतदान किया। योगेंद्र और भूषण ने कहा कि वे यह भी कह सकते हैं कि ‘माइनस आठ’ थे। मतदान करने और नहीं करने वाले सदस्यों की पहचान नहीं थी। यह पूरी तरह से पहले लिखी पटकथा के अनुरूप थी। अगर हम उनके दावों को भी मान लें तब क्या यह तथ्य नहीं है कि वे प्रस्ताव पेश करने के लिए केवल 167 हस्ताक्षर जुटा सके।

नई पार्टी बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे पार्टी की बैठक में कार्यकर्ताओं के साथ इस पर चर्चा करेंगे। बैठक से कुछ घंटे पहले योगेंद्र्र यादव ने पार्टी मुखिया को रामदास की ओर से लिखे गए पत्र को सार्वजनिक किया जिसमें पूर्व नौसेना प्रमुख ने इस बात पर हैरानी जताई है कि पार्टी ने संघर्ष की स्थिति से बचने के लिए उनसे बैठक में हिस्सा नहीं लेने को कहा है। पत्र में रामदास ने आप महासचिव पंकज गुप्ता से मिले एसएमएस का जिक्र किया है।

पंकज ने एसएमएस में कई कारण गिनाते हुए उनसे बैठक में हिस्सा नहीं लेने को कहा था। प्रशांत भूषण ने कहा-लोकपाल को अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। यह पूरी तरह से पूर्वनियोजित था। उन्होंने सभी सीमाओं को पार कर दिया। यह केजरीवाल और उनके चाटुकारों की मानसिकता को दर्शाता है। जो आज हुआ वह शुक्रवार को जारी हुए स्टिंग को सही साबित करता है।

दोनों खेमों के आप स्वयंसेवक कापसहेड़ा में बड़ी संख्या में एकत्र हुए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की। रिसॉर्ट के चारों ओर पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजंसियों के जवान तैनात किए गए थे।

यहां राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को काउंटर पर पंजीकरण के बाद भीतर आने की इजाजत दी जा रही थी। पहचान, मोबाइल नंबर और निमंत्रण का एसएमएस नहीं दिखा पाने वाले सदस्यों को भीतर आने की इजाजत नहीं दी गई।

 

प्रतिभा शुक्ल

 

 

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  1. B
    Bhuwan Joshi
    Mar 29, 2015 at 8:38 am
    ये आप का इंटरनल मैटर है.. केजरीवाल को काम करने के लिए थोड़ा टाइम दीजिये. कोई भी पार्टी अनुसाशन के बिना नहीं चल सकती इसलिए शायद ये कदम जरूरी हो गया था..
    Reply
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