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कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों के हथियार में शामिल हुआ तीखी जेली वाला ग्रेनेड, जानिए क्या है खासियत

कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शनों को दबाने के लिए तीखी जेली से भरे हुए ग्रेनेड सुरक्षा बलों के हथियारों के जखीरे में शामिल किए जा सकते हैं।
Author नई दिल्ली | March 29, 2017 13:18 pm
कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शनों को दबाने के लिए तीखी जेली से भरे हुए ग्रेनेड सुरक्षा बलों के हथियारों के जखीरे में शामिल किए जा सकते हैं।

कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शनों को दबाने के लिए तीखी जेली से भरे हुए ग्रेनेड सुरक्षा बलों के हथियारों के जखीरे में शामिल किए जा सकते हैं। इस ग्रेनेड के फटने पर आंखों में जलन होती है । हालांकि, पेलेट गन का इस्तेमाल जारी रहेगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पेलेट गनों का इस्तेमाल तभी किया जाएगा जब कम जानलेवा हथियार पत्थरबाजों पर काबू पाने में नाकाम रहेंगे और बिल्कुल अंतिम तरीके के तौर पर फायरिंग का आदेश दिए जाने से पहले तक इसे इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अर्ध-ठोस अवस्था के रसायन ओलोइयोरेसिन के साथ तीखे जेल ग्रेनेड में डाले जा सकते हैं, ताकि उपद्रवी भीड़ से निपटा जा सके। ऐसे ग्रेनेड इस्तेमाल करने का सुझाव केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में आया। यह बैठक उस वक्त बुलाई गई जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने पेलेट गन से नाबालिगों को हुए शारीरिक नुकसान पर चिंता जताई थी और केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे प्रदर्शनों से निपटने के लिए अन्य प्रभावी तरीकों पर विचार करें, क्योंकि यह ‘जिंदगी और मौत’ से जुड़ा मामला है।

सूत्रों ने बताया कि ओलोइयोरेसिन आधारित गोले तत्काल समाधान के तौर पर उभरकर आए और जरूरी परीक्षणों के बाद सुरक्षा बल इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की रक्षा प्रयोगशाला रक्षा अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (डीआरडीई) की ओर से इसका निर्माण किया जा रहा है। बहरहाल, बैठक में आम राय बनी कि पेलेट गन का इस्तेमाल ऐसी स्थिति में जारी रहना चाहिए जब हिंसक भीड़ को काबू में करने में कम जानलेवा हथियार नाकाम हो गए हों।

बता दें कि मंगलवार को केंद्र सरकार ने कहा था कि कश्मीर घाटी में दंगाइयों को तितर बितर करने के लिए यदि सुरक्षा बलों के वैकल्पिक उपाय विफल हो जाते हैं तो वे पैलेट गन का इस्तेमाल ‘‘कर सकते हैं।’’ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने 26 जुलाई 2016 को एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी कि वह गैर घातक हथियारों के रूप में पैलेट गन के अन्य संभावित विकल्पों की तलाश करे। उन्होंने बताया कि समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और उचित क्रियान्वयन के लिए सरकार ने उसकी सिफारिशों का संज्ञान लिया है।

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