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बिलासपुर: सुरंग हादसे में 9 दिन बाद बचाए गए दो मज़दूर

पिछले नौ दिनों से सुरंग में फंसे तीन मजदूरों को निकालने में बचाव दलों के लोग दिनरात एक किए हुए हैं। ऐसे में आज बड़ी ख़बर यह सामने आ रही है कि शाम तक मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा कता है।
Author , शिमला | September 21, 2015 18:50 pm
(Express Photo by Lalit Kumar)

हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर के निकट निर्माणाधीन सुरंग के आंशिक रूप से ध्वस्त हो जाने से उसके भीतर फंसे दो श्रमिकों को नौ दिनों की मशक्कत के बाद आज निकाल लिया गया। वहीं तीसरे श्रमिक की तलाश का काम जारी है जिसके अभी भी मलबे के अंदर फंसे होने की आशंका है।

नई दिल्ली से बचाव अभियान की निगरानी कर रहे एनडीआरएफ के महानिदेशक ओ पी सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि वहां से निकाले गए दो श्रमिकों की पहचान मणि राम और सतीश तोमर के तौर पर हुई है। हालांकि तीसरे श्रमिक हृदय राम से संपर्क नहीं हो पाया है।

सिंह ने कहा, ‘‘एक सप्ताह से ज्यादा समय से सुरंग में फंसे तीन श्रमिकों में से दो को हमने बचा लिया है। आज सुबह की शुरुआत के साथ हमारी टीमों ने एक क्षैतिज ड्रिलिंग अभियान शुरू किया और तीसरे श्रमिक को ढूंढा जिसके बारे में हम मान रहे हैं कि वह वहीं कहीं मलबे में फंसा है।’’

डीजी ने साथ ही कहा कि वह अभी भी एनडीआरएफ बचाव टीम से संपर्क में हैं और शुरुआती खबरों से पता चला है कि बचाए गए लोग काफी कमजोर हो गए हैं लेकिन, वह बातचीत कर रहे हैं।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के कर्मियों के बचाव अभियान के एक दिन पहले घटना स्थल वाले इलाके में भारी बारिश हुयी थी और ड्रिलिंग में बाधा पैदा हो गयी थी।

हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर के निकट कीरतपुर-नेरचौक फोर लेन परियोजना के सुरंग नंबर चार का एक हिस्सा धंस जाने के बाद 12 सितंबर को कर्मी भीतर फंस गए थे। घटनास्थल से जिस तरह के फुटेज आए हैं उसमें दिखता है कि संकरी और अंधेरी सुरंग से दो लोगों को निकालने के बाद बचावकर्मी दो ऊंगलियों से जीत का चिह्न बनाते हुए खुशियां मना रहे हैं।

फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए 1.2 मीटर व्यास की एक और सुरंग की ड्रीलिंग करीब करीब पूरी हो गयी थी और एक मीटर से कम की ड्रीलिंग का काम बचा था तभी कल रात खुदाई में दिक्कतें पैदा हो गयी । ड्रिल का एक हिस्सा बदलना था इसलिए ऑपरेशन को रोक दिया गया था।

इससे पहले बचावकर्मियों ने डिजिटल कैमरा और माइक्रोफोन के जरिए फंसे हुए तीनों श्रमिकों में दो से संपर्क साधा था। अभियान के लिए काम कर रही 45 सदस्यीय एनडीआरएफ की एक टीम में से खास तौर पर चुने गए तीन कर्मी अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। 47 मीटर और चार मीटर व्यास के सुराख के जरिए फंसे हुए कर्मियों तक खाने और पानी की आपूर्ति की गयी।

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