June 23, 2017

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नोटबंदी: सड़कों पर आई राजनीतिक पार्टी SUCI (C), जलाए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले का सड़कों पर विरोध शुरू हो गया।

SUCI (C) के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी जलाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले का सड़कों पर विरोध शुरू हो गया। सोमवार (14 नवंबर) को कोलकाता में सोसलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्यूनिस्ट) SUCI (C) के लोगों ने सड़कों पर पीएम मोदी के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा 500-1000 के नोट के लिए किया गया यह पहला प्रदर्शन था। कार्यकर्ताओं की रैली कॉलेज स्क्वायर से शुरू हुई थी। रैली में शामिल लोगों ने मोदी के फैसले को आम लोगों के खिलाफ बनाई गई पॉलिसी बताया। पार्टी के सचिव सुमैन बसु ने कहा, ‘केंद्र सरकार को नोटबंदी के फैसले से पहले उचित कदम उठाने चाहिए थे। आम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। मरीजों के परिवार को खुल्ले पैसों के लिए भागते देखना काफी दुख देने वाला होता है। कई लोगों की इस चक्कर में मौत हो गई।’ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पीएम मोदी का पुतला भी जलाया। गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी एनडीए सरकार के फैसला का विरोध जता चुकी हैं। बसु ने कहा कि अगर ममता उनकी पार्टी के लोगों को उनके साथ आने के लिए कहेंगी तो वह जरूर उनका साथ देंगे।

गौरतलब है कि 500-1000 के नोटों के बैन होने के बाद से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, राहत देने के लिए 14 नवंबर को सरकार द्वारा फैसला लिया गया कि 500 और 1000 के जो पुराने नोट पहले 14 नवंबर की रात तक मान्य थे वह अब 24 नवंबर की रात तक मान्य होंगे। पुराने नोट सरकारी हॉस्पिटल, पेट्रोल पंप पर मान्य होंगे। इसके अलावा बैंक और एटीएम से बदले और निकाले जाने वाले पैसे की लिमिट भी अब बढ़ा दी गई है। वित्त मंत्रालय ने रविवार रात को को बताया था, ‘सभी बैंकों को सलाह दी गई है कि एटीएम से एक दिन में 2000 रुपए निकालने की सीमा को 2500 रुपए, सप्ताह में अकाउंट से 20 हजार रुपए निकालने की सीमा को 24 हजार रुपए और नोट बदलने की सीमा को 4000 रुपए से 4500 रुपए किया जाए। इसके साथ ही कहा गया है कि एक दिन में चेक से केवल 10 हजार रुपए निकालने की सीमा को खत्म किया जाए।’

गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, सरकार द्वारा कई तरह के भरोसे देने के बावजूद बैंकों और एटीएम के बाहर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान आठ नवंबर को किया था।

वीडियो: जानिए क्या है विमुद्रीकरण, क्यों लेती हैं सरकारें इसका फैसला और अब तक भारत में ऐसा कब-कब हुआ?

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First Published on November 15, 2016 9:59 am

  1. L
    lalan kumar
    Nov 15, 2016 at 11:09 am
    नोट की चाहत में बिना वजह मरनेवालों के हत्यारों पर हत्या का केस तो दर्ज होना ही चाहिए..मौत तो मौत है...किसी की भी जिंदगी किसी से काम नहीं !
    Reply
    1. S
      sanjay
      Nov 15, 2016 at 8:18 am
      आज हमें एहसास हुआ है की भरस्टाचार की इस लड़ाई में मोदी अकेला पड गया है, बाकी सभी पार्टिया एक होकर भरस्टाचार और कालेधन के पक्ष में एक हो गई है,और सड़को पर उतर आई है!अब जनता के सामने स्पष्ट हो गया है की कोन ईमानदार है और कोन बेईमान है!जब पूरा विश्व भरस्टाचार आतंकवाद ब्लैकमनी से झूझ रहा है तब भी हमारी पार्टिया जाग नहीं रही है और अशिक्षित जनता को मोहरा बनाकर मोदी के खिलाफ लामबंद हो रही है उनके इस कार्य को देश कभी माफ़ नहीं करेगा!
      Reply
      1. S
        sanjay
        Nov 15, 2016 at 8:08 am
        देश परेशान है भरस्टाचार महंगाई आतंकवाद से उसकी चिंता पार्टियों को नहीं है नोटबंदी की परेशानी पार्टियों को सता रही है! जनता के इमोशनल पहलुओ पर एवम उसकी परेशानियों की आड़ लेकर पार्टिया राजनीति नहीं करे,अन्यथा चुनाव में आपका सफाया हो जाएगा! जब पूरा विश्व मोदी के इस फैसले से ख़ुशी जाहिर कर रहा है तो पार्टिया क्यों दुखी हो रही है जबकि जनता इस फैसले से गर्व महसूसस कर रही है!नेताओ को अपनी परेशानी को जनता की परेशानी बता रही है,जनता की असली परेशानी आतंकवाद है भरस्टाचार है नोटबंदी नहीं है !
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        1. S
          sanjay
          Nov 15, 2016 at 8:33 am
          भरस्टाचार,आतंकवाद,ब्लैकमनी की इस लड़ाई में मीडिया भी ईमानदारी से उतर आये,और राष्ट्रहित में ी रिपोर्टिंग कर देश को बताये जनता को समझाए की यह परेशानी कुछ पलो की है इसके बाद जल्दी ही अच्छे परिणाम आएंगे! मीडिया के लिए देश भक्ति के लिए यह समय बहुत ही अनुकूल है यदि वह इस समय जनता को ी राह सयंम धैर्य हेतु प्रार्थना करे समझाए तो देश के अच्छे दिन आ सकते है! सभी राजनीतिक पार्टिया जो नोटबंदी के खिलाफ है मीडिया के लिए यह समय ी पत्रकारिता का है,और इन पार्टियों से पूछे की इस लड़ाई में आप पीछे क्यों है!
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          सबरंग