December 03, 2016

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वायुसेना के लिए बड़ी खरीद की तैयारी

नई दिल्ली, 20 अक्तूबर।

Author October 21, 2016 03:08 am

दीपक रस्तोगी 

भारतीय वायुसेना के लिए कम से कम 14 नए स्क्वाड्रन खड़े करने की खातिर बड़ी संख्या में चौथी पीढ़ी के मध्यम और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (मीडियम एंड मल्टी रोल कॉम्बैट एअरक्राफ्ट) खरीदने की तैयारी चल रही है। विमान की तकनीकी विशेषताएं किस तरह की हों- इसका ब्योरा यानी ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल्स’ (आरएफपी) तैयार करने में भारत सरकार के आला अफसर जुटे हैं। अगले कुछ दिनों में टेंडर प्रक्रिया के लिए छांटी गई कंपनियों को आरएफपी का मसविदा भेज दिया जाएगा। पहले से स्वीडन की एक और अमेरिका की दो कंपनियां दौड़ में शामिल थीं। इस हफ्ते के मध्य में रूसी कंसोर्टियम को भी सौदे की टेंडर प्रक्रिया के लिए तैयार रहने को कह दिया गया। रक्षा मंत्रालय की योजना है कि अगले छह से आठ महीनों में वैश्विक टेंडर जारी कर दिए जाएं। इस कवायद में 252 नए विमानों को वायुसेना में शामिल किए जाने की योजना है। भारतीय वायुसेना से मिग-21 और मिग-27 के 20 बेड़े (स्क्वाड्रन ) 2019 तक रिटायर कर दिए जाने की तैयारी है। तब तक कम से कम 11 स्क्वाड्रन (एक स्क्वाड्रन में 18 विमान) नए खड़े कर लेने की योजना है। इनमें कम से कम छह स्क्वाड्रन स्वदेशी तकनीक से निर्मित तेजस विमानों की उन्नत श्रेणी ‘तेजस मैक-1ए’ को शामिल कर तैयार किए जाएंगे।

एक इंजन वाले हल्के लड़ाकू विमान तेजस का उन्नत संस्करण तेज रफ्तार वाला और दुश्मन के रडार से बचने की तकनीक से लैस होगा। ये विमान डीआरडीओ की एअरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजंसी विकसित कर रही है जिनका निर्माण हिंदुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) करेगी। वायुसेना के अधिकारी तेजस श्रेणी में सिर्फ मैक-1ए को ही लड़ाई के लिए मुफीद मान रहे हैं। सेवानिवृत्त एअर वाइस मार्शल कपिल काक कहते हैं, ‘स्वदेश में बने होने के चलते शुरुआत में सौ तेजस जंगी विमानों को राजनीतिक कारणों से वायुसेना में शामिल कर लिया जाएगा। लेकिन असल जरूरत मैक-1ए की है, जो लड़ाई में काम आएंगे।’
बहरहाल, तेजस के अलावा बाकी आठ स्क्वाड्रन (144 विमानों) के लिए टेंडर में अमेरिका की ‘लॉकहीड मार्टिन’ और ‘बोइंग’, स्वीडन की ‘साब’ और रूसी ‘रशियन एअरक्राफ्ट कॉरपोरेशन-मिग’ शामिल होंगी। 2019 से 2022 तक विमानों की आपूर्ति के लिए टेंडर अगले साल की पहली छमाही में जारी किए जाने हैं। चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (एफजीसीए) के लिए प्राथमिक तौर पर जरूरतों की सूची बनाई गई है। वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, ऐसे विमानों में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर स्टेशन, सस्पेंडेड आॅप्टो-इलेक्ट्रॉनिक साइटिंग कंटेनर्स, हवा से हवा में और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल लादने की क्षमता और भारी नुकसान पहुंचा सकने वाले हल्के बम लादने की क्षमता होनी चाहिए।
वैश्विक टेंडर में शामिल होने के लायक मानी गईं कंपनियां अपने विमानों के तकनीकी ब्योरे के अलावा यह प्रस्ताव भी बना रही हैं कि भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम से वे कैसे जुड़ सकती हैं। रूसी ‘रशियन एअरक्राफ्ट कॉरपोरेशन-मिग (आरएसी)’ ने अपने कंसोर्टियम (यूनाइटेड एअरक्राफ्ट कॉरपोरेशन एंड आरएसी-मिग) के जरिए मिग-35 का प्रस्ताव तैयार किया है। इस विमान में अत्याधुनिक राडार प्रणाली (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे रडार, एईएसए) लगी है। रूसी कंपनी इस राडार प्रणाली से लेकर विमान की पूरी तकनीक का हस्तांतरण करने का वादा कर रही है। मिग श्रेणी के विमानों के रखरखाव और मरम्मत का ढांचा भारत में पहले से मौजूद होने के चलते रक्षा मंत्रालय ने रूसी कंसोर्टियम को सौदे की प्रक्रिया में शामिल करने की योजना बनाई।
दूसरी ओर, अमेरिकी ‘लॉकहीड मार्टिन’ ने अपने एफ-16आइएन विमानों की प्रोडक्शन लाइन भारत में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। 70 के दशक की तकनीक पर निर्मित इन विमानों की मांग कम होने के चलते लॉकहीड मार्टिन टेक्सास स्थित अपना मौजूदा प्रोडक्शन लाइन 2017 तक बंद कर रही है। वायुसेना के बेड़े में अभी उपलब्ध सुखोई-एसयू 30 एमकेआइ को एफ-16 से बेहतर माना जा रहा है। मिराज-2000 को अपग्रेड करने के बाद यह भी एफ-16 से बेहतर हो जाएगा। लॉकहीड मार्टिन को भारत स्थित प्रोडक्शन लाइन के लिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों से आर्डर मिलने की उम्मीद है। यह विमान भी एईएसए तकनीक से लैस है, लेकिन अमेरिकी कंपनी इसके तकनीकी हस्तांतरण के लिए तैयार नहीं है। यही स्थिति बोइंग के एफ-18 हारनेट विमानों के साथ है।
जहां तक स्वीडिश ‘साब’ की ओर से प्रस्तावित स्वीडिश ‘ग्रिपेन एनजी’ विमानों की पेशकश का सवाल है, इसके ज्यादातर पुर्जों की आपूर्ति अमेरिकी बोइंग और यूरोपीय कंपनियों ने की है। भारत में इसका उत्पादन करने पर उन कंपनियों से अनुमति जरूरी होगी, जिसके लिए अभी बातचीत भी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में स्वीडिश कंपनी ने तेजस मैक-1ए की प्रोडक्शन लाइन के लिए तकनीकी उन्नयन की योजना रखी है। इस कंपनी का कहना है कि हमसे विमान खरीदें, हम तेजस के उत्पादन केंद्र का आधुनिकीकरण कर देंगे। बहरहाल इस कंपनी का एक प्रस्ताव यह है कि वह स्वदेश विकसित हो रहे भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एएमसीए के विकास में तकनीकी मदद करने को तैयार है। यह प्रस्ताव अभी रक्षा मंत्रालय के विचाराधीन है।

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First Published on October 21, 2016 3:05 am

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