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भारत के पास नहीं है कोई एयरक्राफ्ट कैरियर, 8 महीने बाद ही काम कर पाएगा INS विक्रमादित्‍य

नेवी लंबे वक्‍त से तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स की मांग करती रही है ताकि पश्चिमी और पूर्वी समुद्र तटों की रक्षा की जा सके।
Author नई दिल्‍ली | July 27, 2016 15:51 pm
INS विक्रमादित्‍य (FILE PHOTO)

सुपरपावर बनने की सोच रखने वाले भारत के पास फिलहार कोई भी एयरक्राफ्ट कैरियर चालू हालत में नहीं है। देश का इकलौता एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रमादित्‍य+ अभी रिपेयर हो रहा है और 8 महीने बाद ही जंग के लिए तैयार होगा। चिंता की बात यह है कि 44,570 टन के विक्रमादित्‍य को अगले 6-7 सालों के लिए अकेले ही सारी जिम्‍मेदारी संभालनी होगी। मंगलवार को संसद में रखी गई रिपोर्ट में CAG ने कहा है Cochin Shipyard के मुताबिक, पहले से ही लटके पड़े INS Vikrant को 2023 से पहले तैैयार नहीं किया जा सकेगा। विपरीत परिस्थितियों में समुद्र में एक एयरक्राफ्ट कैरियर की लड़ाकू क्षमता को कम करके नहीं आंका जा सकता। चीन और अमेरिका भी एयरक्राफ्ट कैरियर्स को ‘एक महान देश का प्रतीक’ मानते हैं।

भारत इस मामले में जमीन पर कोई ठोस एक्‍शन ले पाने में नाकाम रहा है। नेवी लंबे वक्‍त से तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स की मांग करती रही है ताकि पश्चिमी और पूर्वी समुद्र तटों की रक्षा की जा सके। तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को किसी भी वक्‍त के लिए तैयार रखा जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अपनी रिपोर्ट में, CAG ने INS Vikrant के निर्माण से जुड़े प्रोजेक्‍ट में देरी की आलोचना की है। CAG ने यह भी कहा कि 2023 से पहले भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर होने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने INS Vikramaditya और INS Vikrant के लिए रूस से जो 45 MiG-29K लड़ाकू विमान मंगाए थे, वह लड़ाकू एयरफ्रेम, RD-33 MK इंजन और फ्लाई-बाई वायर सिस्‍टम में खराबी की वजह से ‘समस्‍याओं से घिरे हुए’ हैं। इस तरह, MiG-29K की परिचालन उपलब्धता सिर्फ 15.93 से 37.63 प्रतिशत ही रह गई है।

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हालांकि भारतीय नौसेना को विश्‍वास है कि उसे दिसंबर 2018 तक INS Vikrant मिल जाएगा। इस युद्धपोत को 1999 में स्‍वीकृित दी गई थी और नवंबर 2006 में निर्माण शुरू किया गया था।

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