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वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव से बचना है तो रोज करें ये तीन आसन

आज आपको बताते हैं कि योग और प्राणायाम के किन आसनों से आप वायु प्रदूषण से बचाव कर सकते हैं।
वायु प्रदूषण से बचने का प्राकृतिक तरीका होता है प्राणायाम।

दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में स्मॉग का भयंकर प्रभाव लोगों की जान का मुसीबत बना हुआ है। लोग हवाओं में घुले विषैले गैसों को सांसों के रास्ते अंदर लेने को मजबूर हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण से बचने का प्राकृतिक तरीका होता है प्राणायाम। तो चलिए आज आपको बताते हैं कि योग और प्राणायाम के किन आसनों से आप वायु प्रदूषण से बचाव कर सकते हैं।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम – इसमें नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं और बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी प्रकार फिर नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है और नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। रोज़ाना 3-5 मिनट तक इस योग को करने से फेफड़े शक्तिशाली बनते है तथा नाड़िया शुद्ध होती हैं।

वाह्य प्राणायाम – इसके लिए सबसे पहले सामान्य स्थिति में बैठकर गहरी सांस लें। अब पूरी सांस को तीन बार रोकते हुए बाहर छोड़ें। शरीर से हवा पुश करने के लिए अपने पेट और डायाफ्राम का इस्तेमाल करें। लेकिन ध्यान रखें, श्वांस छोड़ना आपके लिए किसी भी स्थिति में असहज न हो। अब अपनी ठोड़ी को अपने सीने से स्पर्श करें और अपने पेट को पूरी तरह से अंदर और थोड़ा ऊपर की ओर खींच लें। अपनी क्षमता के हिसाब से इस स्थिति में बैठे रहें। फिर अपनी ठोडी धीरे से ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे में सांस लें। फेफड़ों को पूरी तरह से हवा से भर लें। तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

कपालभाति प्राणायाम – इसे करने के लिए सबसे पहले पालथी लगाकर सीधे बैठ जाएं। अब पेट के निचले हिस्से को अंदर की ओर खींचे व नाक से सांस को बल के साथ बाहर फेंके। यह प्रक्रिया बार-बार इसी प्रकार तब तक करते जाएं जब तक थकान न लगे। फिर पूरी सांस बाहर निकाल दें और सांस को सामान्य करके आराम से बैठ जाएं। इससे मन शांत, सांस धीमी व शरीर स्थिर हो जाता है। इससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और रक्त शुद्ध होने लगता है।

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