December 08, 2016

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डिप्रेशन को कंट्रोल रखने में मददगार साबित हो सकते हैं फेसबुक और ट्विटर

ब्रिटेन के लैनकास्टर यूनिवर्सिटी के डेविड बेकर तथा गुईलेरमो पेरेज द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, इस जटिल संबंध पर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, व्यवहार तथा व्यक्तिगत कारणों का प्रभाव पड़ सकता है।

Author नई दिल्ली | November 30, 2016 15:53 pm
ट्विटर और फेसबुक की मदद से डिप्रेशन हो सकता है कंट्रोल।

अमूमन सोशल नेटवर्किंग साइटों पर ज्यादा समय गुजारना मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, लेकिन एक नए अध्ययन के मुताबिक कुछ लोगों के लिए फेसबुक और ट्विटर डिप्रेशन को नियंत्रित करने का एक साधन हो सकता है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अध्ययन के मुताबिक, किसी व्यक्ति के स्वस्थ होने में सोशल नेटवर्किंग का सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ता है। पत्रिका ‘साइबरसाइकोलॉजी, बिहैवियर एंड सोशल नेटवर्किंग’ में प्रकाशित अध्ययन दर्शाता है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों और डिप्रेशन के बीच बेहद जटिल संबंध हैं और कुछ लोग वर्चुअल मीडिया से भी सामाजिक समर्थन का फायदा उठाते हैं। ब्रिटेन के लैनकास्टर यूनिवर्सिटी के डेविड बेकर तथा गुईलेरमो पेरेज द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, इस जटिल संबंध पर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, व्यवहार तथा व्यक्तिगत कारणों का प्रभाव पड़ सकता है। निष्कर्ष के मुताबिक, चिकित्सकों को अपने मरीजों को यह सलाह देनी चाहिए कि वे दवा के अलावा, सोशल सपोर्ट सिस्टम का भी सहारा लें।

बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने एक बार अपने डिप्रेशन के दौर की कहानी सुनाई थी। उन्होंने बताया था कि किस तरह वह इस खतरनाक चीज से उबर कर बाहर आई थीं। अब कुछ इसी तरह की कहानी एक और स्टार ने सुनाई है। इस बार ऋतिक रोशन ने अपनी लाइफ से जुड़े हिस्से को सबके साथ शेयर किया। उनका कहना है कि उन्होंने जिंदगी में कई उतार-चढ़ावों का सामना किया। उन्होंने कहा कि डिप्रेशन ऐसी चीज नहीं है जिसे किसी गलत चीज की तरह खुद से जोड़ कर देखा जाए। ऋतिक ने कहा कि मेंटल हेल्थ के बारे में भी नॉर्मल तरह से बात करनी चाहिए। इन्हें लाइलाज बीमारी मानना गलत है।

ऋतिक ने कहा ‘मैंने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। मैंने डिप्रेशन को एक्सपीरियंस किया है। मैंने शक को एक्सपीरियंस किया है, जैसे कि हम सभी करते हैं। ये बहुत साधारण सी बात है। हम जब भी इस पर बोलें, इसे साधारण तरीके से ही लें। ऋतिक ने बताया ‘मैंने अपनी पर्सनल लाइफ में कई मुद्दों का सामना किया। ऐसा हम सभी के साथ होता है, ऊपर जाना जरूरी है तो नीचे आना भी उतना ही अहम है। ये दोनों ही आपकी शख्सियत को बनाने के लिए जरूरी हैं। जब आप नीचे जाते हैं तो आपके विचारों का क्लियर होना जरूरी होता है। आपका दिमाग आप पर हावी हो जाता है। अनचाहे खयाल आपके दिमाग पर छा जाते हैं। उस वक्त आपको दूसरे या तीसरे इंसान की जरूरत होती है जो आपको बता सके कि आपके साथ क्या हो रहा है।’

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First Published on November 30, 2016 3:53 pm

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