December 10, 2016

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ग्रहों ने टेढ़ी की चाल: आमजन से लेकर शासक वर्ग भी रह सकता है परेशान

भारत में ये काल आर्थिक सुधारों की आधारशिला रखने के लिये ही नहीं, कालांतर में लक्ष्य से भटकने के लिये भी जाना जायेगा।

जैसे जैसे वक़्त फिसल रहा है, वैसे वैसे आने वाले दिनों की पदचाप सुन कर नज़ूमियों (भविष्य पढ़ने वालों) की आँखें सिकुड़ती जा रही हैं। समय की दस्तक उनको बेचैन किये जा रही हैं। वजह है सितारों की उलटी चाल। इस समय शनि अपने महाशत्रु मंगल के घर वृश्चिक में बैठकर अजीबोग़रीब हालात पैदा किये हुए है, वहीं वृहस्पति अपने वैचारिक विरोधी बुध के घर कन्या लंगर डाल कर आमजन को बेचैन कर रहे हैं। राहु अपने कट्टर शत्रु सूर्य के गृह सिंह में तनावपूर्ण प्रवास कर रहा है, वहीं मंगल भी अपने धुरविरोधी शनि के घर में परेशान होता और करता नज़र आ रहा है। ऐशवर्य के मालिक शुक्र भी बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। वो भी विरोधी खेमे के गुरु, वृहस्पति के घर धनु में खुन्नस के साथ गतिशील हैं।

शनि का शत्रु मंगल के घर में चक्रमण दो बरसों से नकारात्मक हालात पैदा किये हुआ है। जैसा साल के आग़ाज़ पर अनुमान था, शनि ने वृश्चिक में बैठकर जहां बरस को लहुलुहान किया, वहीं बड़े बड़े व्यापारियों को ज़मींदोज़ और बाज़ार से धन को ग़ायब कर देने का कारक बना। हालात को गंभीर बनाने में बड़ा हाथ वृहस्पति के कन्या में आगमन का सिद्ध हो रहा है। शत्रु राजकुमार बुध के घर देवगुरु कुछ विचित्र कारनामों के लिये जाने जाते हैं। लेकिन लगता है कि पिक्चर अभी बाक़ी है। जब सेनापति मंगल महाशत्रु शनि की राशि मकर से कुंभ में प्रविष्ट होकर हुंकार लगायेंगे, लोग सिहर जायेंगे। पेशानी पर और बल पड़ना अभी शेष है। क्योंकि मंगल की चाल से शनि पर न्याय का जुनून अभी और सर चढ़ कर बोलेगा। ये स्थिति आने वाले किसी अनिष्ट का संकेत समझी जा सकती है। वह ग्रहयोग देश और विश्व में किसी गंभीर बेचैनी की ओर इशारा कर रही है।

सितारे किसी बड़ी साज़िश की ओर इशारा कर रहे हैं। ये ग्रहस्थिति किसी काम समय के लिये ही सही पर किसी बड़े असंगठित आंदोलन की ओर ढकेलेगी। वाद-विवाद और तनाव बढ़ेगा। हवाई/रेल/सड़क दुर्घटना के साथ बड़ी आगजनी में जन और धन की हानि की तस्वीर उभर कर आ रही है। वर्ष के अंत से नये साल के मध्य तक किसी नेता या बड़े व्यक्ति से सम्बंधित बुरी ख़बर परेशान करेगी। शासकों की मामूली त्रुटि गले में हड्डी की तरह फंस जायेगी। सिर्फ़ विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष भी उलझन में नज़र आयेगा।

ये दौर नये अमीरों को जन्म देगा और पुरानों धनियों को नेस्तनाबूद करेगा। भारत में ये काल आर्थिक सुधारों की आधारशिला रखने के लिये ही नहीं, कालांतर में लक्ष्य से भटकने के लिये भी जाना जायेगा। सुधारों की दवा से जी मिचलायेगा। अपनी कड़वाहट से औषधि आसानी से न हलक के अन्दर जायेगी, बाहर आने का साहस कर पाएगी। विश्व के कुछ देशों में परस्पर तनाव में इज़ाफ़ा होगा। कुछ राष्ट्र और लोग भय के व्यापार से मोटा माल कमायेंगे। भारत- पाकिस्तान की परिस्थितियों पर यह कालखण्ड नकारात्मक असर डालेगा। सनक और जुनून परवान चढ़ेगी। २६ फरवरी, २०१७ के पश्चात् स्थिति में जादुई सुधार आयेगा, पर आने वाला लगभग ढाई-तीन साल योग्य व्यक्तियों के हाशिये पर जाने और नाक़ाबिल लोगों के शीर्ष पर आने का होगा।

(यह आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषिय चिंतक सदगुरु आनन्द जौहरी के विचार हैं।)

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First Published on November 13, 2016 10:34 am

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